मैं अभी एक विवाह में हूं विवाह में आते समय रास्ते भर बारात आते-जाते देखता रहा । दिनभर का थका हारा बाराती सूट बूट पहनकर चमक बिखेर रहा है । कानभोडू बैंड परीक्षा ले रहे है चल बे बोल कितना सुन सकता है। दूर आतिशबाजी की तैयारी चल रही है। बैड पर नाचने वाले शराब के इंतजाम में व्यस्त है। कुछ महिला वर्ग चेहरे की हजामत करके , चेहरे को गहरे मेकअप से तैयार किया है । इन महिलाओं की तैयारी किस लिए है वह बाराती जो पीछे दारू पीकर मदहोश हो कर आया।

बारात में भागदौड़ है बराती से पहले घराती खाना खाकर निकलना चाहते है। बारातियों का अपना DJ बैंड का अश्लील गाना है… वही घरातियों का बाबुल की दुआएं लेती जा तुझको सुखी संसार मिले…। इस गाने पर किसी का ध्यान नहीं है क्योंकि आज से आफत वर पक्ष के लिए है इस बहु के साथ सामंजस्य बिठाने की।

बराती नाचने के बाद भोजन की टोन में क्या-क्या खा ले। उसके बाद भी पूछता है और कुछ है क्या??

विवाह में एक पंडितजी द्वारा मंत्र और कुछ चीजों को छोड़ दिया जाय तो कोई सनातन तत्व नहीं है ब्रह्म विवाह कैसे कहा जाय। बगल में चमचमाती गाड़ी और दहेज का समान रखा है। कोई बिगड़ कर गाली भी दे रहा । माहौल कुल मिलाकर खुशमिजाज और फोटो शेशन का चल रहा है।

कोई कोई नैना चार की फिराक में है किंतु सोसल मीडिया के समय मे सब पहले से दो है। खैर तुम लगे रहे परिणाम सुबह पता चलेगा😂

कृषक कानून और बदहाल किसान.. गांगेय

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार होकर बदहाल कैसे हो सकती है कृषि उपार्जन की ,किसान अर्थव्यवस्था पर बोझ बन गया है? सरकार चुनाव के दबाव में वापस कदम खींचे। सरकार द्वारा वापस लिए गये तीन कानून

१. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य संवर्धन और सरलीकरण विधेयक (2020) यह कानून निकट भविष्य में सरकारी मंडियों की प्रासंगिकता को शून्य कर देगा। निजी क्षेत्र को बिना पंजीकरण और बिना किसी जबाबदेही के कृषक उपज के क्रय विक्रय की खुली छूट। अधिक से अधिक कृषि उपज की खरीदारी निजी क्षेत्र करें।

२. कृषि कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक ( 2020) इसी के तहत कांट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा। बड़ी कम्पनियों और भारी भरकम मशीनीकृत खेती के सामने कैसे भूमिहीन,संसाधनहीन किसान कैसे टिकेगा।

३. आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक (2020) निजी क्षेत्र को असीमित भंडारण की छूट। उपज जमा करने के लिए निजी निवेश की छूट। यह एक प्रकार से जमाखोरी और कालाबाजारी को मान्यता देना है।

2011 की जनगणना के अनुसार देश में कुल 26.3 करोड़ परिवार खेती किसानी के कार्य में लगे हुये है। इसमें महज 11.9 करोड़ किसान के पास खुद की जमीन है जबकि 14.43 करोड़ किसान भूमिहीन है। भूमिहीन किसान बड़ी संख्या में बटाई पर खेती करते है। भूमि के मालिक से खेती के बदले आधा उपज दिया जाता है। श्रम और भूमि से मिलकर उपज पर आधा-आधा बटवारा।

भारत की GDP में कृषि का हिस्सा 14 फीसदी है वही इस पर आश्रित जनसंख्या कुल का 50 फीसदी है।

किसान की सबसे बड़ी समस्या है उसका असंगठित होना। नेता भी जानता है किसान अपने हकूक के लिए इकट्ठा नहीं होगा इस उसके हित के कानून कभी पास नहीं किये जाते। यह जरूर है उसे खेती से हतोत्साहित करने के कानून बनाये जाते है।

बिजनेसमैन कार्टेल बना कर अपने उत्पाद का मूल्य बढ़ा लेता है वह किसान को सरकार द्वारा घोषित MSP के इर्द गिर्द रहना पड़ता है।

MSP की व्यवस्था भी ऐसी है कि सामान्य किसान की पहुँच से दूर रहती है जैसे उत्तर प्रदेश में धान की कटाई अक्टूबर के अंतिम तक कटाई शुरू हो जाती है जबकि MSP पर खरीद दिसम्बर में शुरू होती है। उसमें में कहा जाता है कि हाइब्रिड धान नहीं लिया जायेगा। सिर्फ मंसूरी लिया जायेगा। जिस किसान ने मंसूरी धान की फसल नहीं की है उसका क्या हो। MSP खरीद मात्र एक या ज्यादा से ज्यादा डेढ़ महीने तक धान में होती है। यही आलम गेंहू का भी है।

MSP को पूरे फसल सत्र के लिए लागू क्यों नहीं किया जाता है। उसमें सभी तरह के धान और गेहूं की छूट मिलनी चाहिए।

किसान अपने मूल्य का निर्धारण कब तक मंडी और सरकार से करवाता रहेगा। भारत द्वारा WTO में हस्ताक्षर करने के साथ स्पष्ट कर दिया गया है कि वह उद्योग और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देगा। प्राथमिक क्षेत्र कृषि को हतोत्साहित करेगा।

सरकारें भी कृषि नीति में सुधार की जगह मुफ्त बाटने में लगी है यह मुफ्त उसे वोट दिलायेगा कृषि सुधार नहीं।

किसान के 2 एकड़ खेत का मूल्य 2 करोड़ रुपये हो सकता है किंतु इससे उसका जीवन नहीं चल सकता। जबकि एक चपरासी 5 लाख घूंस देकर खुशहाल जीवन के साथ प्रॉपर्टी बना लेता है।

किसान विवश और मजबूर है उसकी सुनवाई कही नहीं है उत्तर प्रदेश में किसान की मेहनत का आधा छुट्टे जानवर खा जा रहे है छुट्टे जानवर की कोई व्यवस्था नहीं है बस घोषणा जरूर की जाती है।

आप की राजनीति पक्ष-विपक्ष, राष्ट्रवादी-सेकुलर की हो सकती है लेकिन किसान वास्तव में दुःखी है उसकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल रहा है। 5 एकड़ खेती वाला किसान भी अपने किसानी की आय से गुजारा नहीं कर पा रहा है वही एक छोटी नौकरी वाला,व्यापार वाला खुश है यह अंतर आखिर किसने पैदा किया।

उत्तम खेती कही जाने वाली कृषि,चाकरी भीख निदान वाले से ही भीख मांगने पर मजबूर है। उसे उर्वरक की बदहाली से लेकर,बीज,बिजली के लिए तरसना पड़ता है।

संस्कृति की खोज 🚩 गांगेय🏵️

संस्कृति की खोज 🚩 गांगेय🏵️

भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्रचीन संस्कृति है सनातन धर्म शाश्वत तरीके से गतिशील है।

आज के आधुनिक युग में विश्व के हर कोने से लोग भारत के धर्म और संस्कृति में रुचि ले रहे है। इसी दीपावली पर अमेरिका भी सेलिब्रेट करने के साथ इसकी प्रशंसा करता दिखाई पड़ा।

सनातन हिन्दू धर्म के विरोध में विश्व में अनेक मत,पन्थ,मजहब के अलावा भारत में ही एक खास वर्ग बन गया है जो हिन्दू धर्म के विरोध में है। यह विरोधाभाष है कि भारत की राजनीति हिन्दू धर्म के विरोध में रही है । क्योंकि नकल के संविधान का एक उद्देश्य है भारत को नास्तिक बनाना। लोगों पर संविधान की सर्वश्रेष्ठता लोकतंत्र के नाम पर आरोपित करना।

बीजेपी के उभार से पुराने सेकुलर भी अपने को हिन्दू कहता नजर आ रहा है जो अपने को अभी तक इंसान,सेकुलर,बौद्धिक,मार्डन, कम्युनिस्ट न जाने क्या क्या कहता फिरता था।
सोचने का विषय है कि भारत बाह्य शत्रु से संघर्ष करे या आंतरिक शत्रु से।

विश्व में सिर्फ भारत में खासकर हिंदुओं में ही लोग मिलेंगे जिन्हें अपनी संस्कृति और धर्म से द्रोह है। अब समझिये यह द्रोह क्यों है? प्रचीन काल से भारत में एक वर्ग रहा है जिसे सत्ता प्राप्त करने की प्रबल आकांक्षा रही है उसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार रहा है। विदेशियों के लिए अपने देश की जासूसी। उन्ही के वंशज आज भी वही कार्य कर रहे है।

कोई नीली छतरी, कोई लाल तो कोई पंजा पकड़ लिया है। सूरतेहाल यह कि देश रहे या न रहे सत्ता मेरी रहे ,मेरी जाति केंद्र में हो।

सबसे बड़े आतंकवादी वह है जो जनसंख्या वृद्धि में लगे। यह बढ़ती जनसंख्या सभी समस्या का पर्याय बन जा रही है। लोकतंत्र में लगता है कि जनसंख्या अधिक करने पर सत्ता का अपहरण स्वमेव हो जायेगा।

भारत के अंदर धर्म -संस्कृति का विरोध करने वाले के पीछे सत्ता की भावना छिपी है। सबसे बढ़कर अंग्रेजी व्यवस्था भारतीयता के विरोध में है वह भारत में काले अंग्रेज चाहती है जिसकी श्रद्धा लंदन और पोप में रहे।

भारतीय मूल के लेखक वी यश नायपाल सही लिखते है कि विश्व में एक मात्र भारत देश है जहाँ के इतिहासकार अपने गुलाम बनाने वाले देश को आधार मानकर लिखा है अंग्रेज लेखन आज भारत का अभिलेखीय प्रमाण है।भारत का इतिहासकार उन्ही अंग्रेजों के लिखे इतिहास को सत्य मानता है और उसी को अपनी पीढियां को पढ़ाता है यदि वह पढ़ कर भारत को गाली देने लगा समझिये एक आधुनिक मनुज तैयार हो गया।

भारत की मानसिक पकड़ भारत से बाहर के विदेशी निर्धारित करते है। नोबल जैसा पुरस्कार अब तक जितना दिया गया है उसे देखिये यह किन देशों को अधिकतम दिया गया है फिर भारत का पढ़ा लिखा आदमी इसी पुरस्कार का सपना सजो लेता है।

भारत को मानसिक रूप से आज भी गुलाम बनाने वाले देश ब्रिटेन पर विचार करिये उसने अपने भौतिक विकास के लिए आधे विश्व को उपनिवेश बना दिया था क्योंकि उसको लंदन और लंकाशायर जैसे शहरों का विकास करना था। 18 वीं सदी तक ब्रिटेन के लोग हग कर पालीथीन में रखते थे । वह भारत पर 200 वर्ष तक शासन कैसे कर सकते है क्योंकि भारत में कुछ लोग ऐसे थे जिन्हें सत्ता की नजदीकी चाहिए थी।

आप को क्या लगता है विकास का पर्याय शहरीकरण है दिल्ली,मुम्बई जैसे मेट्रोपोलिटन सिटी बना कर क्या मनुष्यता का विकास हो जायेगा?

संस्कृति का वाहक ग्राम्य भारत और माता रही है। भारत की सबसे मजबूत ईकाई परिवार को बिखण्डित करने के लिए माता को भारत के विरुद्ध, देह सुविधा के नाम पर खड़ा किया गया। वह बड़े अभिमान से अपनी तुलना फिल्मी पतुरिया से करने लगी। हांडा रानी,लक्ष्मीबाई उसके लिए गाली का पर्याय बन गयी है। यहाँ तक कि सनी लियोनी से तुलना को भी वह स्वीकार ली । यह बौद्धिक दिवालयापन है।

एक विषय सदा जीवन रहेगा किसका विकास और कितना विकास ? भौतिक विकास के बीच संवहनीय विकास की बात मजबूती से होनी प्रारम्भ है। विकास के नाम मनुष्य वस्तु बना दिया गया उसकी जीवंतता गायब है वह जून के महीने काला कोट और टाई लगाये घूम रहा है।

भौतिक विकास नगर-शहर-सिटी तक पहुँच गया है विकास समृद्धि नहीं बन सकता है भौतिक परिसम्पत्तियों का विकास कर मानवीय पूंजी और वास्तविक बौद्धिक पूंजी को कैसे सुरक्षित रखेगे ।

भारत की एकमात्र समस्या है इसकी मानसिक गुलामी। भारत का व्यक्ति भारतीय मूल का बन कर नोबल कैसे पा जाता है। छोड़िए आप विचार न करोगे। तुम अपनी जाति के लिए सोच रहे हो ।

भय होना कितना जरूरी है.

भय का होना बहुत जरूर है भय कर्तव्य का स्मरण करता है स्वयं को जाग्रत रखता है बेअदबी करने की हिमाकत नहीं होती है। साहस अपनी जगह है भय का अपना महत्व है। धर्म, संस्कृति ,देश,परिवार,समाज का मूल्य बना रहता है। भय नियंत्रण हीन नहीं होने देता, वह पागल भी नहीं बनने देता।

इस लिए कहा जाता है कि भय बिनु होय न प्रीति। आप भी भय के भयंकर को नमस्कार करिये जिससे मानव की गरिमा आप में बनी रही।

फिर आप पूछेगें भय इतना जरूरी क्यों है क्योंकि शोयब मिया जैसे एम्स से तालीम ले रहें कट्टरपंथी सेकुलर को भी इल्म रहे कि राम भारत की जनमानस की श्रद्धा का केंद्र है उसके इस कुकृत्य (राम लीला मंचन) पर भले कोई तालिबानी गर्दन पर छुरा न चलाये किन्तु कानून अपना काम करेगा। बार बार हिन्दू श्रद्धा का मजाक इस लिए उड़ाया जा रहा है कि उसे भय नहीं है दंडित होने का।

सखी…3

वह रूठी थी नाराज थी जाने क्या बात थी। मैंने पूछा तो बोली कोई बात नहीं बस बात नहीं करनी है।

सोच के विचरने की क्षमता मनुज धरता है फिर भी अकड़ता है। किस बात की अकड़ है यह कभी नहीं समझता। एक जीवन है इसे प्रेम में बिता लो या बैर में, कोई पूछने वाला नहीं है।

यदि दुःख है तो दुःख कारण है उसका निवारण है मैं तुम नहीं बन सकता है बस यही रिक्त स्थान को स्याह करना चाहते हो । मेरा मैं, तुम्हारा तुम ही इस दुनिया के अजूबे है जो इसे समझ गया वह जगत-जीव के सम्बन्ध को पा लिया।

हम तुममें उतरना चाहते है लेकिन तुमने खिड़की दरवाजे सब बन्द कर रखे है। हम तो चाहते है यह मैं और तुम की दीवार हम गिरा दे।

पहले प्रेम की गली सकरी हुई अब जीवन की गली सकरी हो गयी है जामे दो न समाय। यह दूसरा कहाँ जाय, जब गली तुम्हारें लिए ही तंग है। संकुचित सोच और बन्द दरवाजे, कोई कैसे करे प्रवेश? संसार तब छोटा हो जाता है जब हम लघुता से मित्रता गांठ लेते है। तुम जीवन की गहराई में न उतर कर,किनारे-किनारे चल कर गूगल से जीवन की खोज करना चाहते हो?

👉अरे भाई मूड डिस्टर्ब तो नहीं हुआ😻

मजहब बैर सिखाता है😡


मुस्लिम कौम के साथ कोई कैसे रह सकता है। मुस्लिम किसी सामाजिकता का पालन तब तक करता है जबतक की वह बहुसंख्यक न हो जाये।

कश्मीर में पंडितों के पलायन हो या स्कूल में आई कार्ड देखकर हिन्दू- सिख टीचर की हत्या। बंगाल और केरल पर हावी होते इस्लाम से आंख नहीं मूंदी जा सकती है। मुसलमान को हद में रखने के लिए उन्हें अल्पसंख्यक रूप में रखना होना। अल्पसंख्यक वह तभी रह सकता है जब आप उनके जन्म दर पर रोक लगाएं । एक सामान्य मुस्लिम के औसत पांच बच्चें होते है।

बंगलादेश में दुर्गा पूजा में पंडाल को नष्ट करने के साथ हिंदुओं को मारा गया, स्त्रियों का रेप किया गया। एक परिवार के पुरुष के अंगों को नोच लिया गया वही उसकी पत्नी,बहन और मां के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।

ऐसी ही दुर्दांत घटना वर्णन तस्लीमा नसरीन ने अपनी पुस्तक “लज्जा” में किया है । अयोध्या में जब विवादित ढांचा गिराया गया उसकी प्रतिक्रिया बंगलादेश के मुस्लिमों ने की । 13 साल की हिन्दू बच्ची का रेप उसी के मुहल्ले के मुस्लिमों ने किया। इन रेपिस्टों में तीन पीढ़ी के मुस्लिम शामिल थे जब 85 का दंगाई रेप करने लगा तो बच्ची ने कहा चच्चा आप भी, अरे आप की गोद में खेल कर बड़ी हुई हूँ। तस्लीमा नसरीन को दंगे की हकीकत उजागर करने के लिए बंगलादेश छोड़ना पड़ा । वह फ्रांस,ब्रिटेन होते हुये निर्वासित रूप से भारत में रह रही है।

मुस्लिम जबकि अपनी औरत का सगा नहीं है उसे बच्चा पैदा करने की मशीन समझता है बुर्के में कैद रखता है। वह औरत जब तक जवान है उसकी कोख हरी भरी रखाता है। उससे मानवता की आशा बेमानी है।

पाकिस्तान में कृष्ण जन्माष्टमी में मन्दिर तोड़ने का वीडियो वायरल हुआ था। अफगानिस्तान में तालिबान मन्दिर और गुरुद्वारे को मस्जिद बना दे रहे है।

सुन्नी के लिए शिया काफिर, शिया और सुन्नी के लिए कूर्द काफिर । शिया सुन्नी और कूर्द के यजीदी और अहमदिया काफिर। इन सबके के लिए हिन्दू,बौद्ध,ईसाई, पारसी काफिर।

मुस्लिम आप के सामाजिक नियम को तब तक ही मानता है जब तक वह अल्पसंख्यक है यह अल्पसंख्यक ज्यादा दिन तक नहीं रहता है क्योंकि इसकी पैदावार सुअर जैसे बढ़ती है। एक से सात ,सात से उनचास।

आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है फिर भी सभी आतंकवादी मुसलमान क्यों है? मुस्लिम आतंकवाद की पहचान कर लेने पर जो कुछ मजहब नाम का वह भी सामने आ जायेगा। सामान्य मुस्लिम डरता है वह कमियों की बात करेगा उसकी गर्दन जिबह कर दी जायेगी।आतंकवादी से लेकर मौलवी और आईएएस मुस्लिम तक यही कहता है वह वही कर रहा है जो कुरान में लिखा है।

कुरान में लिखा है कि काफिर का कत्ल करो जन्नत में 72 हूर पाओ। अल्लाह का काम करो,काफिर को कुरान का इल्म दो इस रास्ते मारे जाते हो फिर भी तुम्हें जन्नत अता होगी। 72 हूरें मिलेगी।

मुस्लिम तादाद बढ़ते ही वह शरिया की मांग करता है पिछले दिनों तमिलनाडु कोर्ट में मामला आया एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के एक मौलवी ने कहा हिन्दू की शोभायात्रा पर रोक लगे क्यों कि मेरा मजहब इसकी इजाजत नहीं देता है उसके अजान में बेजा खलल पड़ती है। यह हालत भारत की है तब सोचिये पाकिस्तान में किस तरह से 13-14 साल की हिन्दू बच्चियों के अपहरण करके उन्हें मुस्लिम बना कर निकाह कोई मजहबी कर लेता है।

अधिकार जन्म से मिलता है किंतु कर्तव्य के निर्वहन की जिम्मेदारी भी बनती है। यदि तुम्हारा दीन असल है उस मजहब की रक्षा हिंसा करेगी? दहशत से इस्लाम का इल्म कम तक कराया जायेगा। जिस धर्म में जोर जबरदस्ती,धर्म परिवर्तन ,हिंसा आदि है वह धर्म नहीं है। वह राजनीतिक विचार है।

गलतियां कुरान में है दोष मुल्ला मौलवी का ज्यादा नहीं है। इस्लामिक कट्टरता अन्य धर्मावलंबियों को विवश कर रही है तुम भी विराथु बनों। हमें अमन चैन नहीं है न ही तुम्हें लेने देंगें।

फ्रांस में कार्टून की घटना,कश्मीर का हजरतबल, मन्दिर का विवाद। अब गौर करने वाली बात है कि मुस्लिम कब हिन्दू के साथ मिल कर रहा है यदि उसे मिलकर रहना ही आता है तो भारत में हिन्दू मुस्लिम दंगे का इतिहास नहीं रहता।

सोच रहा हूँ किसपर लिखूं!युवा नशेड़ी बन रहा है बिगबॉस जैसे सीरियल उसके आइडिल है बॉलीबुड का बहुत अंदर तक दीवाना है। बहका और भटका युवा डेटिंग, गर्लफ्रैंड के महाचक्कर में है। दूसरी ओर वह नेता है जो चुनाव आयोग की पहली लाइन कि चुनावी खर्च की सीमा को तोड़ कर ,जाति का जहर घोलकर सत्ता की सीढ़ी चढ़ जाता है। आकंठ भ्रष्टाचार की सांप सीढ़ी चल रहा है ,धर्म का मठाधीश हो ,आईएएस अधिकारी,बड़ा बिजनेसमैन अभिनेता,प्रोफेसर या साइंटिस्ट भारत में सब नेता बनना चाहते है।जनता परिवार और पड़ोस के प्रपंच में मस्त है ज्यादा हुआ तब टेलिविजन और न्यूजपेपर तक। किसान की हालत खराब है किंतु उनके नेता मौज में है वह किसी न किसी पार्टी के फंड से उत्पात मचाये है। दिल्ली हो या लखीमपुर खीरी। किसान हिंसा कैसे कर सकता है यह विचारणीय विषय है। पहले लाल किले की प्राचीर से तिरंगे का अपमान यह खीरी में निरपराध चार ब्राह्मण युवक को तथाकथित किसान डंडे से पीट-पीट कर मार देते है।क्या लगता है किसान की वास्तविक चिंता है यदि किसान नेता को होती तो सीधी सी बात है वह मंडियों तक राशन,सब्जी और फल कुछ दिन पहुँचने न देता है। उसकी मांग सरकार से होनी चाहिए थी जिसप्रकार मार्केट की वस्तुओं की मूल्य वृद्धि हुई, जिसतरह से नौकरी वालों की तनख्वाह में इजाफा हुआ है उसी बनिस्पत किसान की फसलों का मूल्य होना चाहिए।सबसे बढ़कर किसान की फसलों के मूल्य का निर्धारण किसान आयोग या सरकार MSP कैसे घोषित कर सकती है? किसान की फ़सलों के मूल्य का निर्धारण किसान करें, राजनीति नहीं ! एयर कंडीशन कमरे में बैठ कर जिंस करोबार वह भी वायदा तरीके किया गया।किसान के नेता अब तक मौन थे? अब मुखर कैसे हो गये । किसान ने आर्थिक उदारीकरण के बाद निरन्तर अपने को खोता जा रहा है। 5 बीघे खेती करने वाला ,जिसके भूमि का मूल्य लगभग 1 करोड़ है वह अपनी बिटिया का विवाह खेती से क्यों नहीं कर पाता?नेता राजनीति चमकायेगा तुम मौत के खेल में मारे जाओगे। वह आग बुझाने के लिए मुआबजा देगा। जांच कमेटी बनेगी फिर वही पन्ने दर पन्ने लीपापोती फिर किसी हिंसा का इंतजार गिद्ध करेगा ,गिद्ध विलुप्त हो गये अब गिद्ध रूपी नेता कर रहा है।कृषि घाटे का सौदा बन कर निर्वाहमूलक बन गयी। सरकारें WTO का हवाला देती रही,कृषि में निवेश को हतोत्साहित कर व्यापार में निवेश बढ़ाया गया। किसान मरे, लोग मरे यह लोकतंत्र के मजबूत होने की निशानी। चलो एक बार पुनः चुनाव में चले। गूंज आ रही है तुम्हें चूतिया बना रही है “सिंघासन खाली करो जनता अभी आती होगी”।

यह लोकतंत्र है

भारत की कमजोरी 🎯

आखिरकार अफगानियों का आखिरी किला पंजशीर भी ढह गया। कार्यकारी राष्ट्रपति सालेह देश छोड़कर ताजिकिस्तान में पनाह ली है। अब बस नार्दन आलाइन्स के अशद का छिटपुट प्रतिरोध बचा है उन्होंने कहा है कि वह आखिर सांस तक लड़ेंगें। पाकिस्तान ने जब देखा पंजशीर में तालिबान असफल हो रहे है उन्हें भारी क्षति पहुँची है उन्होंने पंजशीर के साथ ही हक्कानी नेटवर्क का दबदबा तालिबान पर बना दिया है।

पिछले दिनों की गोलाबारी में तालिबान प्रमुख बरादर गोली लगने से घायल है जिसका इलाज अनजानी जगह चल रहा है। अफगानिस्तान पर विदेशी समुदाय खासकर अमेरिका का रुख बौद्धिक लोगों की समझ से बाहर रहा है। बाइडेन को तालिबान और हक्कानी में क्या गुड दिखा है। अलकायदा और ISIS में बैड इस लिए दिखा क्योंकि इनके द्वारा अमेरिका को चुनौती दी जा चुकी है।

अफगानिस्तान में विश्व की आतंकवाद की सबसे बड़ी फैक्ट्री बन रही है पाकिस्तान और चीन का सहयोग तालिबान को इस लिए प्राप्त है क्योंकि उन्हें भारत को अस्थिर करना है।

भारत की स्वयं की नीतियां उसके लिए आत्मघाती है। अफगानिस्तान मामले में मोदी ने जो रुख अपनाया है वह विल्कुल नेहरू से मिलता जुलता है गुट निरपेक्षता, भारत की अभी जारी है।

नार्दन आलाइन्स को विश्व समुदाय खासकर भारत से बड़ी उम्मीद थी लेकिन भारत का लोकतांत्रिक इतिहास कहता है कि भारत ने अपने मित्रों का साथ कभी नहीं दिया। एक इंदिरा गांधी का बंगलादेश की मुक्तिवाहिनी को छोड़कर।

तालिबान,पाकिस्तान और चीन से मिलकर नार्दन आलाइन्स अकेले कब तक प्रतिरोध करता है। नार्दन आलाइन्स की बार बार अपील विश्व सनुदाय और भारत से करता रहा। अमेरिका का हित भारत के लिए सर्वोपरि दिखा।

भारत अपनी आंतरिक राजनीति में उलझा रहा है। जैसे पड़ोस में कुछ हो न रहा हो। मुफ्त के अनाज की बंदरबाट ,ओबीसी आरक्षण विधेयक और हिंदु मुस्लिम के पागल प्रेम प्रलाप में अभियान जारी है। भारत की कुटिनीति बिल्कुल भारत के पति-पत्नियों जैसी है दिनभर गहमा-गहमी रात में मान मनौव्वल ।।

विदेश नीति में ज्यादा दूरदृष्टि नहीं है उसका कारण है भारतीय लोकतंत्र का रोज कही न कही चुनाव।।

स्वस्थ्य नीति और मजबूत नेतृत्व के अभाव में भारत जैसा सम्पन्न देश कायर बना हुआ है। सेना का मतलब बहुत ज्यादा नहीं है वीर योद्धाओं को कायर नेता द्वारा सीमित कर दिया गया है। यह विश्व गुरु बनने का ढोंग रचता है उसके पीछे कोई रचनात्मकता नहीं है।

अफगानिस्तान को बर्बरों ने जिस तरह हथियाया है कभी मध्य काल में इसी तरह भारत के क्षेत्र पर अवैध अधिकार होता गया यहाँ के कुछ राजाओं ने मोर्चा संभाला बाकी आज की दिल्ली की तरह गुटनिरपेक्ष और पंचशील के पालन में लगे थे उन्हें ज्यादा मतलब आंतरिक राजनीति से था। फिर कोई अरबी,गुलाम,अफगान,मुगल और अंग्रेज शासक बन गये।

हम नुक्ता चीनी में लगे रहे वह उच्च है वह नीच उसकी पत्नी ऐसी है उसका पति ऐसा है। विदेशी शासकों ने खैरात बाटी यह बात भारतीयों को जच गयी वह भूल गये कि गुलाम है। जैसे मुफ्त खाया उसकी बची खुची बुद्धि चली गयी। वह उन विदेशियों की प्रशस्ति गायन करने लगा,कुछ पुरस्कार पाने की फिराक में।

भरतीयों की स्थिति में बहुत आमूल चूल परिवर्तन नहीं आया है वह आज भी मुफ्त पाने के लिए कतार में खड़ा है उसे देश से ज्यादा फिक्र, अधिक पाने की है।

यह वही दिल्ली है जहाँ से कभी भीष्म ने कंधार को हस्तिनापुर में शामिल किया था। आज यहाँ की जनता मुस्लिम है फिर भी इसने तालिबान और पाकिस्तान का विरोध किया गोली के दम से उनकी आवाज को रौंद दिया गया। यहाँ की जनता के पास ज्यादा कुछ नहीं आसन्न गरीबी ऊपर से मौलवियों का तालिबान को समर्थन ,विरोध पर सीधे गोली शरीर पर लेना।

भारत का नकारापन है कि भारत की भूमि पर आतंकी शरिया लागू कर रहे है हमें चिंता अमेरिका,रूस,चीन की है कही वह नाराज न हो जाये। पाकिस्तान ने सीख दी है भारत को मित्रता कैसे निभाई जाती है। यह अफगान भूमि हमारी है हम मौन है। कुर्सी का मोह से अधिक कुछ नहीं है। हमारी चिंता जातीय जनगणना और अपनी अपनी मूर्तियां लगाने की कही अधिक है।

अफगानिस्तान प्राचीन भारत का हिस्सा🚩


अफगानिस्तान भारत की भूमि है रामायण काल में महाराज दशरथ का शासन था यह कैकेय राज्य के अंतर्गत आता था। भरत जी की माता कैकेई यही की थी।

महाभारत काल में भीष्म ने गांधार को हस्तिनापुर राज्य में मिला लिया था गांधार नरेश सुबाला के पुत्र राजा शकुनि और बहन गांधारी इसी राज्य से है। तक्षशिला विश्वविद्यालय इसी की सीमा पर था।

महाराज चन्द्रगुप्त ने पूरा अफगानिस्तान मौर्य साम्राज्य में मिलाया जो अशोक और गुप्त साम्राज्य में शामिल था।

सिकंदर के समय मालव जनजाति यही की थी जिसने हमला करके सिकन्दर को घायल कर दिया तत्पश्चात उसकी मृत्यु हो गयी। यह महाराज पुरु के साम्राज्य का हिस्सा था।

राजा दाहिर के वंश का शासन में अफगानिस्तान के कुछ भाग उनके साम्राज्य में था महाराज रणजीत सिंह का भी अफगानिस्तान के कुछ हिस्से पर अधिकार था। अंततः यह अंग्रेजों के समय 1893 में अंग्रेजों की डूरंड रेखा से भारत से अलग हुआ। तब से अराजकता फैली हुई है।
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अफगानिस्तान के लोगों ने पूजा पद्धति बदली है किंतु संस्कृति भारतीय ही है। किसी कोने में ही सही भारत की ज्योत प्रज्ज्वलित है। महमूद गजनवी और अहमदाबाद शाह अब्दाली के आदर्शों का पालन तालिबान कर रहा है लेकिन उसके मन्शुबे कभी पूरे नहीं होंगे।

आतंक के शासन की अवधि लम्बी नहीं होती है। रूस के प्रभाव को खत्म करने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद से तालिबान को खड़ा किया। 9/12 की घटना के बाद तालिबान अमेरिका के गले की हड्डी बन गया अमेरिका ने तालिबान को 2003 में खदेड़ दिया।

इस समय तालिबान से मोर्चा लेने के लिए खड़े है अफगानिस्तान के कार्यकारी राष्ट्रपति रमुल्लाह सालेह और पंजशीर का शेर कहे जाने वाले अहमद मसूद और उनका संगठन नार्दन आलाइन्स । उनका कहना है कि यदि विश्व समुदाय उनकी हथियारों की मदद करे तो वह तालिबान को खदेड़ कर पाकिस्तान पहुँचा दे।

भारत गुप्त तरीके से मदद करता रहा है किंतु आज आवश्यकता है खुले तौर पर नार्दन आलाइन्स की मदद करने की। यदि भारत नहीं चाहता है कि उसकी सीमा पर आतंक की फैक्टी हो ,हमें नार्दन आलाइन्स की हथियारों और पैसे से सहायत करनी पड़ेगी।

तालिबान सरकार में आते ही भारत से सभी तरह के व्यापार बन्द कर दिया और कश्मीर पर बोलना शुरू किया। हिजबुल मुजाहिदीन का अजहर मसूद कह रहा है कि तालिबान कश्मीर में हमारी मदद करे।

अजहर मसूद आज जीवित होने का कारण यही तालिबान है इसी के समय भारतीय विमान का अपहरण करके कंधार ले जाया गया था जिसमें तालिबान ने मध्यस्थता करके अजहर मसूद को छुड़ाया था। यही मसूद कश्मीर और POK में दहशतगर्दी का दूसरा नाम है।

भारत अपनी नीतियों को खुल के अंजाम दे । Pok वापस लेने के साथ बलूच लोगों की मदद से बलूचिस्तान को आजाद करवाएं। पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता दिला सकता है तो भारत बलूचियों को क्यों नहीं ? नार्दन आलाइन्स को अफगान की सत्ता में लाने के लिए उद्यम करने ही होने।

हम अपनी सुरक्षा को अमेरिका से पूछ कर नहीं चला सकते है स्वतंत्र निर्णय लेना होगा। इंदिरा जी ने बांग्लादेश मामले में ऐसा करके दिखा चुकी है।

साहस और कूटनीति दोनों की जरूरत है कि पाकिस्तानी कोढ़ को सदा के लिए खत्म करें। इजरायल की तरह आक्रामक नीति ही एक विकल्प है। युद्ध सदा विनाश नहीं लाते है पुराने का पतन सृजन का द्वार खोलते है।

अफगानिस्तान के 34 प्रान्तों में तालिबान ने 33 पर कब्जा जमाया है लेकिन स्थिति बदलती नजर आ रही है नार्दन आलाइन्स ने पंजशीर के अलावा अहमद मसूद जिनके पिता पंजशीर के शेर अहमद शाह मसूद है जिन्होंने तालिबान को कभी पंजशीर में घुसने नहीं दिया उन्हें 2001 में तालिबान और अलकायदा ने मिल कर मारा था। वही सालेह की बहन का 1996 में तालिबान ने अपहरण कर ,यातना देकर मार डाला।

सालेह अहमद शाह मसूद के साथ 2001 से ही जुड़ गये थे अब उनके बेटे अहमद मसूद के साथ मिल कर नार्दन आलाइन्स ने बगलान प्रान्त का बानू, पोल ए हिसार ,देह ए सलाह प्रान्त में लोगों के साथ मिलकर अफगानी झंडा फहरा दिया। नार्दन आलाइन्स अफगानिस्तान में लोकतंत्र समर्थक है। भारत को कठोर कदम उठाने होंगे क्योंकि घरेलू नीति आरक्षण और चावल बाटने से सीमाएं सुरक्षित नहीं हो जायेगी।

सेकुलर और अफगान जलेबी…


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नसीरुद्दीन शाह हो या जावेद अख़्तर इन्हें तालिबान से गुरेज नहीं है वो तो इनके दीन के कुरानी है इन्हें दिक्कत RSS ,विश्व हिन्दू परिषद है क्यों कि इनके नाचने वाले कार्यक्रम अर्थात पेट पर लात पड़ रही है।

जहाँ तक लाल्लुक तालिबान का है वह मनोरंजक का पेशा करने वाले को पहले लातों से पीटता, फिर पत्थर मरता है अंत में गर्दन काट देता है। जैसा कि पिछले दिनों मशहूर अफगानी कमेडियन के साथ किया गया।

भारत का सेकुलर जब मुसलमान का मामला आता है या तो वह मौन हो जाता है या ऊलजलूल की दलील देने लगता है। अफगानिस्तान के हालात से इन्हें सबक नहीं मिल रही है तालिबान,अलकायदा,हक्कानी नेटवर्क, isis कौन सही दाबेदार है और कुरान तथा अल्लाह का रहगुजर है।

पाकिस्तान चाहता है कि तालिबान गुट अब्दुल गनी बरादर अफगानिस्तान की सरकार का नेतृत्व न कर हक्कानी नेटवर्क करें। हक्कनी नेटवर्क पर पाकिस्तान का पूरा नियंत्रण है।उसके लिए बाकायदा ISI चीफ अफगानिस्तान पहुँचे है, जिससे दो बार विफल हुए सरकार गठन का काम पूरा किया जा सके। मीडिया चैनल पंजशीर लाइव ने दावा किया है कि हक्कनी नेटवर्क और तालिबान में नेता को लेकर हुए विवाद में गोली चलने से बरादर घायल हो गया है।

हिन्द के मुस्लिममीन की तरफ से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तालिबान का इस्तकबाल किया है उन्हें स्वतंत्रता की लड़ाई जीतने की बधाई दी है। भारत का मुस्लिम मजबूरी में भारत में रुका है क्योंकि 99% से ज्यादा मुस्लिम वोटिंग में अपना मत जिन्ना की लीग को दिया था। हिन्दू कितना मुस्लिम को सम्मान दे ले, लेकिन वह हिन्द की भूमि को मादरे वतन नहीं मानता। भारत को कुफ्र कहता है। भारत के मुसलमान के नाम,पहनावे,खान- पान में अरबी और मध्य एशिया की नकल है।

भारत के मौलवियों को चीन द्वारा उईगुर मुसलमानों का शोषण नहीं दिखाई पड़ता है उसे गुजरात दंगा , 370 और NRC की बहुत पीड़ा है। भारत के पड़ोसी मुस्लिम देश पाकिस्तान,बंगलादेश, अफगानिस्तान, मालदीव का मुसलमान भारत में शरण चाहता है जबकि भारत मे रहने वाला मुसलमान डरा हुआ है। ऐसा क्यों है? न सेकुलर न मौलवी इसका उत्तर दे पाता है।

भारत में एक नया चलन चला है कल तक सेकुलर हिंदु आज सेकुलर सनातनी बन गया है वह श्री राममन्दिर के निर्माण का श्रेय कोर्ट को देता है। पूर्व सरकारों में यही कोर्ट थी तब निर्णय को नहीं ले लिया। सेकुलर सनातनी के तरह तरह के प्रश्न है यह शुद्ध नहीं या सही नहीं है। RSS मुस्लिमों को बढ़ा रही है वही भारत से लेकर पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिम अपने धर्म में RSS जैसा संगठन और मोदी जैसा नेता चाहता है।

भारत का मुस्लिम अभी 1000 वर्ष बाद भी भारत के विरोध में रहेगा जबतक भारत दारुल हर्ब से दारुल इस्लाम न हो जाये। कुछ अपने को प्रगतिशील कहते है सिर्फ हिन्दू धर्म को गाली देने और मखौल उड़ाने के लिए।

भारत में मुस्लिम न शांत रहा है न शांत रहेगा। बल्कि देश हिंदुओं का है कदम तुम्हें उठाने होंगे ,सोचिये कल अफगानिस्तान और पाकिस्तान की स्थिति भारत में हो जाये तब हिंदुओं को कौन देश शरण देगा नेपाल?

राष्ट्र की सुरक्षा के लिए गद्दारों को चिन्हित करके उन्हें देश से बाहर निकलना और उन्हें मृत्युदंड देना ही होगा। ज्यादा उदारता का परिणाम है अब्दुल और हसन के 13-13 बच्चें होकर सभी छोटे आर्थिक उपक्रम पर कब्जा जमाये है। भारत के संसाधनों को चट कर जा रहे है। ट्रेन से लेकर बस में मारामारी बनी है।

नाम अब्दुल मेरा मैं बूट पालिश करता हूं… आंख खोलिए सेकुलर के चक्कर में , उस विदेशी औरत की पार्टी के लिए यह देश छोड़ कर भागना न पड़ जाएं। शरण के लिए तुम्हारें पास यह हिन्द महासागर होगा,जिसमें डूब मरना पड़ेगा।

धर्म के मर्म को न समझने वाले हिंदुओं पूरे विश्व में आज तक के युद्ध के पीछे धर्म रहा है सिर्फ सनातन धर्म अन्य लोगों सताने को पाप कहता है मुस्लिम और ईसाई मजहबियों की संख्या बढ़ाने से जन्नत में सीट रिजर्व कर लेता है उसके लिए चाहे वह तलवार का प्रयोग करें, धन का करे या बम का, सब जायज है।