श्रीराममंदिर और अयोध्या ★

यू तो मंदिर के लिए तरह-तरह के विचार चिरकुट टाइप के विचारक दे रहे है। फला को पूजन शामिल करिये, फला ताला खुलवाया ,फलाने बाबरी ढांचे को नष्ट होने दिया आदि- आदि। इनको मंचासीन करिये ,इन्हें दर्शक दीर्घा में स्थापित करिये।-तिथि-मुहूर्त का विवाद । चहु ओर श्रेय लेने की होड़ मची है।

मंदिर का इतिहास कहता है कि द्वापर में भगवान #कृष्ण ने पुनरस्थापना की था। कलयुग में महाराज #विक्रमादित्य ने भव्य श्रीराममंदिर की पुनरस्थापना की । आगे समय समय पर मंदिर बनता रहा है। एक प्रकार से 1526 में बर्बर बाबर के भारत के आगमन के पूर्व मंदिर त्रेता से कलयुग तक शाश्वत तरीके चलता रहा है।

आक्रमणकारी मुस्लिमों के भारत आगमन से मंदिर जो सिर्फ अर्चना के केंद्र न होकर समाज की गतिविधियों के भी केंद्र थे, नष्ट किये गये जिसमें लगभग 3000 मंदिर शामिल है।

राममंदिर का संघर्ष विजय श्री के साथ पूर्ण हुआ है जिसके क्रम को कोठरी बंधु सहित कितने वीर आहूत हो गये। वह काला बंदर भी याद आता है जब अयोध्या में मुलायम सिंह यादव द्वारा गोली चलवाने जाने पर उन्हें गोली लगी तो श्री राम पताका काला बंदर ले कर चला गया। लोगों ने काले बंदर को हनुमानजी से जोड़ कर देखा।

इतना लंबा 500 वर्षों का संघर्ष कोई राजनीति यदि करता है तो करें ,हमें मंदिर से काम ,रामलला विराजित हो रहे है। विश्व की सबसे प्राचीन राजधानी आयोध्या एकबार पुनः राम के आधीन होगी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी ने संसद में कहा था कि जिसदिन पूर्ण बहुमत हमारा होगा हम मंदिर बनवा देगें। मोदी के 6 वर्ष में मंदिर का कार्य पूर्ण हो रहा है।

आप यदि अयोध्या गये हो तो मुस्लिम के कुकर्म दिख जायेगे। हनुमान गढ़ी,सीता रसोई,दशरथ दरबार, भरत स्थल के इर्दगिर्द कब्रें बना रखी है।
मुस्लिम का अरमान श्रीराम के जन्मस्थल को मक्का के तरीके का कब्रिस्तान बनाने का रहा है। जो कभी पूर्ण नहीं हुआ। श्रेष्ठ धर्म आचरण से बनता है मंदिर को मस्जिद बनाने से नहीं।

हिन्दु समय – समय पर अयोध्या का #रक्तस्नान करता रहा है जिसका प्रतिफल है भव्य राममंदिर। यह विश्व के पुराने विवाद में से एक था। जिसे भारत की न्यायपालिका ने बहुत शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया। इसके लिए पूर्व न्यायाधीश वर्तमान राज्यसभा सांसद गगोई जी कोटि कोटि धन्यवाद के पात्र है ।

राममंदिर राजनीतिक इच्छाशक्ति की बात रही है। कांग्रेस को बहुत अवसर मिले किंतु वह स्वयं ही अड़ंगा डाल रही थी क्योंकि उसकी सेकुलर राजनीति में मुस्लिम बहुत बड़ा फैक्टर है जिसे वह मंदिर निर्माण से नाराज नहीं करना चाहती । नेहरू,इंदिरा,राजीव, और सोनिया के पास अवसर थे लेकिन मामले को इन्होंने और लंबा खींचा। इन्होंने सरकारी वामपंथी इतिहासकारो का प्रयोग कर राम के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे थे। वह राममंदिर बनाने जायेगें?

इंदिरा गांधी पर गौर करिये जिन्होंने स्वर्ण मंदिर पर टैंक चढ़ा दिया। राज्य की सरकारें उन्ही की मर्जी पर चलती थी उनके लिए राममंदिर का निपटारा कराना बड़ी बात नहीं थी। किन्तु वह उस मार्ग से होकर आती है जहाँ अहिंसा की बातें होती है लेकिन बकरीद पर हलाल होते निरीह बकरे हिंसा की दृष्टि में नहीं आते।

कुछ कांग्रेसी कहते है राममंदिर में कांग्रेस की महती भूमिका रही है तो प्रश्न खड़ा होता है कि काशी,मथुरा के मंदिर पर इन्होंने कितना काम किया है? श्रीराममंदिर के लिए विश्व हिंदू परिषद की भूमिका सराहनीय रही है 1983 से जिस तरह बढ़-चढ़ कर अशोक सिंहल जी कार्य किया। वह कबीले तारीफ है शिलान्यास से लेकर बाबरी ढांचे के ढहने तक ।

रामलला का मंदिर, सिर्फ एक मंदिर ही नहीं है वरन यह हिन्दु स्वाभिमान,भारत के पहचान,भारत के आदर्श का स्थान है। हिन्दू 5 अगस्त 2020 के बाद एक दूसरे तरह का विश्व में नजर आयेगा। वामपंथी मंदिर पर अर्थव्यवस्था और लाभ हानि समझा रहे है। ये मूर्ख वर्ग हित से ज्यादा स्वहित पर कपड़े फाड़ रहे है ,हो भी क्यों न वर्षों की दुकान अब टूटती नजर आ रही है।

हे राम सबको सुमति दे🏹

समाजवाद तक…

नमाजवादी पार्टी अब भगवान परशुराम और स्वतंत्रता का शुभारंभ करने वाले मंगल पांडे के सहारे ब्राह्मण राजनीति करेगें! बुद्धि-शुद्धि करिये इनके पाप राममंदिर से लेकर,सैफई नाच तक बहुत किये है । अब यादव- मुस्लिम गठजोड़ का क्या होगा ? कांग्रेस और BSP के सहारे सत्ता का स्वप्नदोष वाले अब ब्रह्म राजनीति का ख्वाब पाल रहे है😊

जब सत्ता में थे परिवार से 36 नेता थे । बिरादरी की खैर बात नहीं उसी की पीड़ा आज भी स्वजातीयों में हो रही है। अक्ललेश व्यक्तिगत तौर पर ब्राह्मण को गाली देने वाले नेता है। पिछड़ा की राजनीति से अगड़ा का इंजन फिट करने की जुगत। जो व्यक्ति कभी चाचा,पिता और बड़े का सम्मान न सीख पाया। मंच से धक्का दे दिया।

लगातार तीन चुनाव महागठबंधन के बाद बुरी गत होना। अहंकार हिलोरे 300 सीट तक गया जो अब बढ़ कर 351हो गया। नेता की जमीन क्या है नेता किसे कहते है? जैसे साधरण सी परिभाषा न जान पाया हो वह सर्वसमाज कैसे जानेगा।

हिस्ट्रीशीटर पिता नेताजी के विरुद लोन पर ले आये,जिनकी विरासत की मौज 5 साल उड़ी।अब आगे का कैसे हो। सैफई का नाच उत्सव जैसा समाज नहीं है जातिवाद और वंशवाद की राजनीति के दिन पूरे हो चुके।

समाजवादी की हालत यह है कि 2 साल किसी के साथ नहीं रहते वही 1 साल दूर भी नहीं रह पाते। जो नेता जमीन पर काम करेगा उसे बहुत जोड़- तोड़ की जरूरत नहीं है। लोकतंत्र में कभी अपने को राजा नहीं समझना चाहिए । सत्ता चढ़ाने की शक्ति जनता में है जिसे चिढ़ाने का कार्य किया जाता है तुम उसके वोटर हो वो मेरे वोटर है ।

खैर खून खासी खुशी वैर पीत मदपान।
रहिमन दाबे न दबे जानत सकल जहान।। ✍️

श्रीराममंदिर और बाबरी विवाद

सुप्रीमकोर्ट के निर्णय पर 5 अगस्त से मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। इसी श्रीराम मंदिर के लिए हिंदुओ ने पिछले 500 वर्ष तक संघर्ष किया । कुल 36 युद्ध लड़े जिसमें लगभग 1 लाख से अधिक हिन्दु वीरगति को प्राप्त हुये।

मंदिर के इतिहास में हिंदुओं के रक्त से कई बार अयोध्या लाल हुई है आखिर बार 1990 में मुलायम सिंह द्वारा कारसेवकों पर गोली चलवा कर लाल किया था, यह गोली जमीन से लेकर हवा में हेलीकॉप्टर से चलायी गई। हिन्दू जमीन पर खून से लथपथ जरूर गिरा लेकिन उसकी दृढ़ता खड़ी रही है जो अब साकार हो रही है।
……………………….

सुप्रीमकोर्ट में मुस्लिम पक्षकार ने कहा राम चबूतरा था, फिर कहा नहीं था। बाबरी ढांचे के लिए पक्षकार ने कहा कि यह ईदगाह पर बनी थी अगले दिन कहा कि यह समतल मैदान पर बनी थी। कोर्ट में बाबरी पक्षकार सिर्फ खीझ दिखाते रहे ,सबूत कपोल-कल्पित ही रहे। अयोध्या से मुस्लिम का क्या काम वह तो विवाद के लिए था।

कोर्ट में कहा गया कि बाबर ने कोई मंदिर नहीं तोड़ा था। जिस जगह बाबरी ढांचा खड़ा था उस जगह से हिंदुओं का कोई सर्वकार नहीं है।
1949 गर्भगृह में रामलला के प्राकट्य से स्पष्ट हो गया कि रामजी की जन्मभूमि यही है। जिसका सबूत उस समय तैनात मुस्लिम सिपाही ने भी दिया।
★★★★★★★★★★★

स्वतंत्रता के बाद सत्ता काले अंग्रेज को मिली, जिसकी धर्म में आस्था नहीं थी वह अंग्रेजों को लम्बरदारी में गर्व महसूस करता था।

जब देश का बटवारा धर्म के आधार पर होगया तो मुस्लिम को देश में रोकने औचित्य नहीं रह जाता। सेकुलरिज्म का छद्म विचार धारण करने की क्या जरूरत थी ? सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस्लाम का सम्बंध अयोध्या,मथुरा,काशी,
उज्जयनी,सोमनाथ से क्या था ?

इतिहास में दर्ज बर्बर मुस्लिमों के आक्रमण जिसमे मंदिर तोड़े गये महिलाओं की अस्मत को तार-तार किया गया। इसके बाबजूद पूरे मध्यकालीन इतिहास में अरबी,गुलाम,मुगल ही हावी रहे है उनके चरित्र को गढ़ने में सेकुलरिज्म शासन और इतिहासकार की महती भूमिका रही है।


तुर्की की 1500 साल पुरानी हागिया सोफिया जो मूलरूप से चर्च था मस्जिद बना , लाइब्रेरी अब पुनः मस्जिद बना दिया गया। यह है इस्लामिक देशों की हकीकत, मुस्लिम की सेकुलरिज्म अब कहा गयी। इसी तुर्की के खलीफा के लिए 1920 में खिलाफत आंदोलन भारतीय मुस्लिम ने चलाया था । यह दूसरे के मंदिर ,चर्च में मीनार बना और थोड़ा बहुत परिवर्तन करके इसे अल्लाह के इबादत का स्थल घोषित कर लेते है।

इराक के पूर्व मुस्लिम तानाशाह सद्दाम हुसैन ने कहा था कि जहाँ तक मैं जानता हूँ भारत के ईमाम,अल्लाह ‘राम’ है जो करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र है भारतीय मुस्लिम रामजन्मभूमि पर नाहक विवाद पैदा कर रहा है। जो कुरान के रास्ते से भी अलग है। कुरान कहती है कि विवादित स्थल पर की गयी इबादत को अल्लाह स्वीकार नहीं करता है।

भारत का मुस्लिम सेकुलरिज्म का हिमायती है वह भी हिन्दू कीमत पर। यदि सेकुलरिज्म और भाई चारे की उसे जरा भी परवाह होती तो वह गलती स्वीकार करता और बड़ा ह्रदय दिखाकर अयोध्या,मथुरा ,काशी आदि पर अपना दावा छोड़ देता।
“”””””””””””””””””

सुप्रीमकोर्ट ने जो निर्णय दिया उसमें पांच न्यायाधीश में एक मुस्लिम अब्दुल नजीर थे जिन्होंने भी सर्वसहमति से अपना मत भी हिंदुओं के मंदिर के पक्ष में दिया।

2003 के विवादित स्थल से खुदाई करा के पुरातत्वविदों द्वारा इकट्ठा किये गए अवशेष भी मंदिर की पुष्टि की है।

सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के बाद भूमि के स्थलीकरण में पुरातात्विक अवशेष जिसमें हिंदु स्थापत्यकला निर्माण जिसमें कमलपुष्प,आमलक,9 फीट शिवलिंग के मिलने से रोमिला थापर, हबीब जैसे इतिहासकरो कि हकीकत को उजागर करते हुए मंदिर होने के साक्ष्य की पुष्टि की।
■■■■■■■■

राममंदिर का बनना वामपंथियों की सबसे बड़ी पराजय है। वह मुस्लिम पक्ष की जगह बौद्ध तथ्य को इसमें शामिल करने का प्रयास किया। साकेत नगरी,सम्राट अशोक के स्तंभ से शिवलिंग की साम्यता आदि-आदि। कुछ नहीं मिला तो तिथि विवाद,करोना गाइडलाइंस पर सुप्रीम दौड़े जहाँ से भगा दिया गया।

वास्तविकता भारतीय मुस्लिमों को भी पता है बाबरी की, किन्तु वह कोई सेकुलर नहीं है यह एक मजहबी कट्टरपंथी समुदाय है जिसमें मौलवियों ने कह दिया, वही इस्लामिक आईन बन जाता है।

यदि विवाद को खत्म किया जाना होता तो जिस समय देश को स्वतंत्रता मिली, देश धर्म के नाम पर बट चुका था । इस्लाम के पैरोकार मार-काट, दंगो पर आधारित रक्तरंजित पाकिस्तान ले चुके थे। उसी समय अयोध्या,मथुरा,काशी मंदिर का प्रस्ताव संसद में पास कर , बना दिया जाता।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆

सेकुलरिज्म के हिमायती सोमनाथ मंदिर बनने का विरोध कर रहे थे वह कैसे अयोध्या,
काशी और मथुरा की पैरवी करते । विवाद जिंदा था मुस्लिम थोक वोट कांग्रेस की झोली में था। परिवार को पीढ़ी दर पीढ़ी चांदी की चम्मच में प्रधानमंत्री पद से बेहतर क्या मिलता?

जिन्होंने सरकारी इतिहासकारों को “राम” को ही काल्पनिक बनाने पर लगा दिया। जैसा कि मनमोहन सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा लगाया कि राम काल्पनिक पात्र हैँ।

स्वतंत्रता के बाद मुस्लिम से ज्यादा, शासन व्यवस्था मंदिर नहीं बनने देने के पक्ष में रही है ।
राजीव सरकार शाहबानों मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटकर हिन्दु तुष्टिकरण में अयोध्या में ताला खुलवाया था। साफ्ट हिंदुत्व के मसीहा बनने की जोड़ में नरसिंहाराव ने विवादित स्थल को कारसेवकों द्वारा गिराने में बाधा नहीं बने । जबकि पूरी कांग्रेस सरकार इसके खिलाफ थी। इसी कारण सोनिया गांधी ने कभी नरसिंहा राव को माफ नहीं किया।
●●●●●●●●●●●●●●●●●●

लड़की वाला और जनता मूर्ख लगती है पर होती नहीं है। उसे बेहतरी पता होती है। 80% हिन्दुओं वाले देश में स्वतंत्रता के बाद मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट के निर्णय का इंतजार किया गया। न कि पाकिस्तान की तरह , राजधानी इस्लामाबाद में बन रहे पहले कृष्ण मंदिर को सरकार ने मौलवियों के दबाव से बनाना कैंसिल कर दिया। जिसकी दीवार को मौलवी प्रेरित लोगों ने गिरा दिया। यह होता है बहुसंख्यक।

भारत में सेकुलरिज्म सत्ता का फंडा रहा है जिसकी हिमायत सब करते है किंतु संविधान इसकी स्वीकारोक्ति नहीं देता । इंदिरा ने इमरजेंसी के समय 1975 में सेकुलरिज्म शब्द को घुसा दिया। धर्म की गुणा- गणित की राजनीति चालू है।

बाबरी ढांचे के इतिहास की धूल लिए कभी शौचालय,धर्मशाला ,हॉस्पिटल के हिमायती आज मंदिर विचार के इर्द गिर्द जमा हो रहे है।
—————————–

नागयोनि और नागवंश✍️

श्रीमद्भागवत और पद्मपुराण में बताया गया है कि महिर्षि कश्यप की पत्नी दिति से दैत्य,अदिति से आदित्य,विनीता से गरुण और कद्रु से सर्प की उत्पति हुई। नागों में आदि राजा शेषनाग को माना जाता है क्रमशः तक्षक,कार्कोट,धनंजय आदि हुये।

विचारणीय विषय है नाग और नागवंशी राजाओं की। नाग एक योनि है और नागों के पूजक ही नागवंशी कहलाये जिस तरह से सूर्यवंशी
,चन्द्रवंशी,अग्निवंशी रहे है। भारत में प्राचीन परंपरा से नागवंशियों का शासन रहा है। नागों का प्राचीनतम वर्णन अथर्ववेद में है जिसमें कई तरह के नाग बताये गये है।

त्रेतायुग में रावण ने कई नागवंशी राजा को पराजित किया था। मेघनाद की पत्नी सती सुलोचना एक नाग राजकुमारी थी। लक्ष्मण जी स्वयं शेष के अवतार थे। द्वापर में बलराम शेषावतार थे नागवंश का यहाँ भी वर्णन मिलता है।

कलयुग में मगध साम्राज्य में शिशुनाग नाम के राजा का वंश सत्तासीन था। गुप्त शासन में समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति में नाग राजाओं को पराजित करने का वर्णन मिलता है।

हिमालय पर्वत के पास ही कश्मीर,मेघालय,
नगालैंड आदि में नागवंश के राजाओं का अधिकार रहा है। नागवंशियों में ब्राह्मण,क्षत्रिय,
वनवासी सभी रहे है। छत्तीसगढ़ और झारखंड की जनजातियों में कई नागपूजक है अपने को नागवंशी कहते है।

नागों के राजा तक्षक ने ही तक्षशिला नामक नगर बसाया था जोकि पाकिस्तान में है प्राचीन समय में शिक्षा का केंद्र रहा है। भारत में कार्कोट वंश का भी शासन रहा है।

नागों से सम्बंधित नगर,नदी,झीलें , जाति राज्य भी भारत में है जैसे नागोदा,नागपुर और यही नाग नदी,शेषनाग झील कश्मीर में और नागालैंड राज्य। नागा जनजाति नागपूजक है और अपने को नागवंशी कहते है।

नाग पंचमी क्यों मनाएं…

84 लाख योनियों में मनुष्य योनि की तरह नाग योनि भी बहुत महत्वपूर्ण है। शेष नाग जिन्होंने धरती धारण कर रखा है। वासुकी जी जो समुद्र मंथन में लुप्त हुई विशिष्टता को निकालने के क्रम में जब देव-दानव इकट्ठा हुए तब उन्होंने मदरांचल के साथ मथनी की रज्जु बन सृष्टि के प्रक्रिया के सहभागी बने। यही वासुकी नाग भगवान शिव के गले के कंठाहर है।
★★★★★★

हिन्दु धर्म में सर्पो का यत्र- तत्र वर्णन मिलता है।
महाभारत ,पद्मपुराण,भागवत पुराण के अनुसार नाग पाताललोक के स्वामी होते है और साथ ही पंचमी के भी। सर्प किसानों के मित्र होते वह चूहे से किसान की फसलों की रक्षा करते है।

महाभारत और भागवतपुराण में कहा गया है कि जब परीक्षित को सर्प दंश हो गया। उनके पुत्र जन्मेजय ने सर्पो को सृष्टि से नष्ट करने की सौगंध खाई । तब सर्प ब्रह्मजी की शरण में गये और ब्रह्माजी ने उन्हें जो उपाय बताया वह दिन श्रावण मास की शुक्लपक्ष की पंचमी का दिन था।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆

जरत्कारु पुत्र आस्तीक ने जिस दिन सर्पो की रक्षा जन्मेजय के यज्ञ से रक्षा की वह दिन भी श्रावण मास के शुक्लपक्ष की पंचमी ही थी। जलते सर्प के ऊपर उन्होंने दुग्ध का छीटा मारा। ब्रह्म जी ने जरत्कारु पुत्र आस्तीक के लिए ही बताया था। जरत्कारु का विवाह तक्षक की बहन से हुआ था। सर्प रक्षा के कारण हिन्दू इसे त्योहार के रूप मानते है। सर्पो के प्रति आदर प्रकट करते है।

ज्योतिष के अनुसार इस दिन विधिवत नाग पूजन से कालसर्प दोष का निवारण हो जाता है। जो इस दिन पूजन करता है उसे सर्प दंश का भय भी नहीं रहता है। सबसे बढ़कर सभी प्रकार के जीव जंतु अपनी विशेषता के मनुष्य के सहभागी है और सहभागियो को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी मनुष्य पर ही है।
●●●●●●●●●●●●

नागों का इतिहास●◆●

✳️महाभारत✳️के आदिपर्व के अंतर्गत #आस्तीक पर्व के 35 वें अध्याय के श्लोक संख्या 5-16 में नागों और सर्पो का वर्णन है🔱

नागों में सबसे पहले शेष जी तदन्तर वासुकि,ऐरावत,तक्षक,कर्कोटक,धनजंय,कालिय,मणिनाग,आपूरण,पिंजरक,एलापत्र,वामन,नील,अनील,कल्माष,शबल,आर्यक,उग्रक,कलशपोतक,सुमनाख़्य, दधिमुख,विमलपिंडक,आप्त,
कर्कोटक द्वितीय,शंख,वालिशिख,निष्टानक।

हेमगुह,नहुष,पिंगल,वह्यकर्ण,हस्तिपद,मुद्गरपिंडक,कम्बल,अश्वतर,कालीयक, वृत्त,संवर्तक,
पद्म प्रथम,पद्म द्वितीय,शंखमुख,कुष्माण्डक,
क्षेमक,पिण्डारक,करवीर,पुष्पदंष्ट्र,बिल्वक,बिल्वपांडुर,मूषकाद,शंखशिरा,पूर्णभद्र,हरिद्रक,अपराजित,ज्योतिक ।

श्रीवह,कौरव्य,धृतराष्ट्र,पराक्रमी,शंखपिंड,विरजा,सुबाहु,वीर्यवान,शालिपिण्ड,हस्तिपिंड,पिठरक,सुमुख,कौणपाशन,कुठर,कुंजर,प्रभाकर,कुमुद,कुमुदाक्ष,तित्तिरि,हलिक,महानाग कर्दम, बहुमूलक,
कर्कर,कुंडोदार और महोदर।
कुल ♀️79 नाग की प्रजाति उपन्न हुई।

यह सनातन धर्म कि महिमा है जो सर्पो का सम्पूर्ण विवरण देती है तब मनुष्य के लिए क्या कहा जाय। एक बार अपने शास्त्रों को जरूर पढ़िये।🚩🚩

पुलिस इनकाउंटर पर कुछ न कहना🌻

न्याय का समाज में महत्वपूर्ण स्थान है किंतु भारत में न्याय बहुत घिसड़-पिसड़ के मिलता है सामान्य व्यक्ति के लिए वह भी दुरूह है। न्यायपालिका में केश इतने ज्यादा है कि न्याय मिलते-मिलते इतनी देर हो जाती है कि कितने अपराधी पहले ही सामान्य मौत मर चुके होते है।
:::::::::::::::::::::::::

पुलिस के खिलाफ न्याय पाना टेढ़ी खीर है क्योंकि पुलिस की गलती पर पर्दा डालना तत्कालीन सरकार सबसे महत्वपूर्ण मानती है जिससें स्वयं की किरकिरी से बचा जा सके।
दो मामले एक IAS अधिकारी किंजल सिंह और प्रिंजल के पिता DSP KP सिंह को 1982 बलिया के मुठभेड़ में अपराधियों से मिलकर उनके पुलिस वाले ने मार दिया।

तत्कालीन सरकार इसे अपराधियों द्वारा अंजाम दी गयी हत्या बताया था। किंजल अपने पिता को न्याय इस लिए दिला पायी क्योंकि वह स्वयं जिलाधिकारी पद पर थी। सामान्यजन का सोचिये जो कंट्रोल के राशन के लिए कई दिन लाइन में लगता है और पूरा भी नहीं पाता।
😢😢😢😢😢

दूसरा मामला भरतपुर के राजा मानसिंह जो जाटों के नेता थे 1985 में सरकार और पुलिस की मिलीभगत से इनकाउंटर कर दिया था। जिन्हें आज न्याय मिला है, सामान्य मौत से बचे 11 पुलिस वाले को सजा दी गयी।

तत्कालीन घटना कानपुर के बिकरु गांव की है जिसमें DSP मिश्रा और उनके टीम के अन्य 9 लोगों की हत्या कर दी गयी मीडिया और पुलिस वाले ने अपराधी विकास दुबे को दोषी ठहराते हुये इनकाउंटर में मार गिराया। इन सबके बाबजूद वहाँ के पुलिस वालों की भूमिका संदिग्ध है वास्तव में वारदात के वक्त क्या हुआ था।


विकास दुबे को जिंदा न्यायपालिका के समक्ष क्यों पेश नहीं किया गया? पुलिस की कहानी पूर्व में DSP KP सिंह ,राजा मानसिंह और DSP जियाउल हक वाली ही है। 2014 में कुंडा में हुये जियाउल हक की हत्या में अपराधी कौन था पुलिस गुत्थी सुलझा नहीं पायी,फिर CBI भी नाकाम रही।

पुलिस का व्यवहार और प्रणाली शायद किसी से छुपी हो,किन्तु पुलिस रिफॉर्म पर सरकारें मौन है, क्योंकि गलत-सही काम को अंजाम देने में पुलिस सबसे अहम भूमिका में नेताओं के लिए काम करती है। SP ऑफिस से लेकर थाने-पुलिस चौकी तक घूस का जो “खुला खेल फरुखाबादी चलता है” इसमें आखिर सहमति किसकी है? सब मौन है।
?????????????

एक जिले से करोड़ो रूपये वसूल के महीने के महीने जाता है फला थानाध्यक्ष बनने के लिए इतने रुपये का चढ़ावा ऊपर के अधिकारियों को चढ़ाया जाता है जिस पर सरकारें गाँधीजी के बंदर का व्यवहार करती है।

गुंडा,पुलिस,नेता के गठजोड़ से आमजन ठगा सा रहता है उसकी आवाज ज्यादा दूर तलक नहीं जाती सिर्फ हथमल के रह जाता है। आज के UP के मुख्यमंत्री 2007 में संसद में रोते हुये लोकसभा अध्यक्ष से कहा था कि पुलिस उनका इनकाउंटर कर देगी। लेकिन आज वही पुलिस पूरी तरह सही है … क्योंकि सत्ता में वह बैठे है। गलत तो विपक्ष में नजर आता है?
●●●●●●●●●

पुलिस का आलम यह है कि हर थानाध्यक्ष के पास करोड़ो की संपत्ति बन जाती है लेकिन वह टैक्स अधिकारियों की पहुँच में कभी नहीं आता। घूस का एक नियम है “लेके के घूस फंस जा देके घूस छूट जा”।

न्यायपालिका बार-बार इनकाउंटर को गलत कहती है फिर भी अंजाम दिया जाता है। अपराधी के पहले वारदात पर पुलिस उसे पैसा लेकर नहीं छोड़ती तो वह अपराधी आज बन नहीं पाता । विधायक,सांसद,नेता आदि बनना दूर की बात है। देखेगे तो पता चलेगा जहाँ सफल गुंडा नेता है वही असफल नेता गुंडा है।

समय रहते सुधार करिये क्योंकि आज लोकतंत्र,नेता,पुलिस और व्यवस्था सभी लोकतंत्र के आधार जनता को चिढ़ा रहे है।
★★★★★★★★★★

मुलायम सिंह यादव हिस्ट्रीशीटर से मुख्यमंत्री

मुलायम सिंह के ऊपर हत्या,डकैती सहित कुल 32 मुकदमें के हिस्ट्रीशीटर के साथ ही फूलनदेवी सहित सभी दस्युओं के संरक्षक रहे है 1981 में मुख्यमंत्री VP सिंह जो दस्युओं को बड़े जोर शोर से खत्म करना चाहते थे मुलायम सिंह यादव के इनकाउंटर का आदेश दिया ।

मुलायम सिंह यादव को इटावा के पुलिस वाले से सूचना मिली वह तुरंत ही साइकिल से गांव -गांव होते हुये दिल्ली चौधरी चरणसिंह के पास पहुँचे ,पैरों में गिर के रोते हुये कहने लगे कि VP सिंह की पुलिस से मेरी जान बचाइये। चौधरी चरणसिंह ने मुलायम सिंह को विधानमंडल में लोकदल का नेता चुन कर, जान बचा दी। नेता-गुंडा का यह शानदार गठजोड़ है।

इसी बीच ‘बेहमई गांव’ में मुलायमसिंह की चेली फूलन देवी ने 22 क्षत्रियों का बेरहमी से मार डाला। इस घटना से विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार गिर गयी। आगे चल कर हिस्ट्रीशीटर मुलायम सिंह समाजवादीपार्टी बनाई, मुख्यमंत्री “माननीय” “नेताजी” आदि-आदि बन गये। 1989 का वह दौर था जिन गुंडों को लोहिया और चरणसिंह आजमा रहे थे मुलायम ‘स्वयं’ सफल प्रयोग थे और गुंडों को सांसद बनाने का सिलसिला चल पड़ा इसी फेहिस्त में ‘फूलनदेवी’ भी सांसद बन गयी।

मुलायम पिछड़े के नेता का आडम्बर करके अपने पूरे कुनबे को राजनीति में सफल कर लिया , अपने साथ ही लड़के को भी मुख्यमंत्री बना दिया। वह अल्पसंख्यक के मसीहा अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवा के बने थे। यह अलग बात है कुंडा में 2013 में DSP जियाउल हक की हत्या होने के बाद उनके पुत्र अखिलेश ने एक भी मुजरिम पकड़ नहीं पाये। सिर्फ अल्पसंख्यक को वोट वैंक के रूप प्रयोग हुआ। “कुंडा के गुंडा” की राजनीति उसी समाजवादी पार्टी में चमकती रही।

गुंडे को आदर्श बनाने वाले क्षत्रिय “बेहमई” में मारे गये 22 क्षत्रिय को भूल कर मुलायम सिंह यादव को ‘क्षत्रिय शिरोमणि’ घोषित कर के दो बार समाजवादी सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। गुंडा पूजन की एक परिपाटी है लोकतंत्र में जिस तरह वोट के लिए जातियां है। गुंडे पूरे भारत में बूथ कैप्चरिंग से लेकर डराने धमकाने,दंगा-फसाद के लिए नेताओं के लिए उपयुक्त है।

DSP जियाउल हक

मुलायम सिंह यादव भारत के पहले “हिस्ट्रीशीटर विधायको” में से एक है । 1989 से लेकर 2003-04 सीधे गुंडे ही विधायक जिताने की स्थिति में आ गये थे। राजनीति का अपराध,
माफिया,गुंडे से चोली दामन का साथ लगातार जारी रहा है । क्योंकि बिना मेहनत के विधायक मिल जाते है। अंसारी,मुख्तार,बृजेश,धनंजय,
राजा इसी श्रेणी के नेता है। “रंग लगे न फिटकरी रंग चोखा”

2004 में दस्यु सरगना निर्भय सिंह गुर्जर ने बयान दिया “इटावा के दो शेर एक मुलायम सिंह यादव दूसरा निर्भय सिंह गुज्जर”। मुलायम सिंह उस समय मुख्यमंत्री थे उसी रात निर्भय का इनकाउंटर हो गया, कही दस्यु का मामला विश्वनाथ प्रताप की तरह सरकार न गिरा दे।

सोचिये यदि 1981 में चौधरी चरण सिंह ,
मुलायमसिंह यादव का इनकाउंटर न बचाते तो आज गुंडे,बदमाश,माफिया विधानसभा,
लोकसभा की सीढ़ियां नहीं चढ़ पाते।

बूढ़ी कांग्रेस कीबूढ़ी सोच🔥

कांग्रेस पार्टी का एक समृद्धिशाली इतिहास रहा है किन्तु आज की परिस्थितियों में उसके वयोवृद्ध नेताओं की कसरत ने उसे नेतृत्व विहीन बना दिया है। कांग्रेस के लिए “अंधा बाटे रेवड़ी फिर- फिर अपने देय” कहावत विल्कुल चरितार्थ है।

वही पुराने जमे जमाये वृद्ध नेताओं का वर्चस्व बना हुआ है अहमद पटेल,दिगविजयसिंह, पी चिदंबरम, मोतीलाल बोरा, रोसैया,कपिल सिब्बल,अशोक गहलोत, गुरुदास कामत,कमलनाथ आदि- आदि। राहुल गांधी जब अध्यक्ष बने तब उन्होंने नई टीम गठित की जिसमें जयराम रमेश,शशि थरूर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट ,
डीके शिवकुमार,मुरली देवड़ा,संजय निरुपम थे जिन्होंने जोश के साथ ,जमीन से जुड़कर काम किया।


2009 में UPA की सरकार बनाने में इनका बड़ा योगदान था। अब की कांग्रेस में जमीन से जुड़े नेताओ की जगह वर्चुअल और एयर कंडीशन वाले नेताओं ने ले रखी है। पुराने कॉंग्रेसियों को 70 साल के अनुभव का गुमान है ज्यादातर जुगाड़ लगाकर सत्ता न रहने पर भी पार्टी में अहम भूमिका रखना चाहते है। हार के विश्लेषण और उसकी नैतिक जिम्मेदारी की किसी को परवाह नहीं है।

सबसे बढ़ के शैडो राजनीति बार बार करने का प्रयास,वृद्ध नेताओं को लगता है कि गांधी नाम के सहारे नैया पार लगती रहेगी । कांग्रेस में युवाओं को आगे बढ़ाने को कोई तैयार नहीं है। ध्यान रहे जो आगे बढ़ कर नई पीढ़ी का स्वागत नहीं करता वह अपने साथ नई पीढ़ी की ऊर्जा को बेकार कर देता है। वृद्ध नेताओं को जब लगा कि राहुल गांधी उन्हें BJP की तरह मार्गदर्शक मंडल में डालने वाले है तो झट ही राहुल गांधी की भूमिका को ही पार्टी में घुन की तरह खा गये।
●●●>●>●●●●●◆●

सोनिया गांधी को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया जोकि काफी समय से बनी है सोचने वाली बात है कि जो पार्टी अपने लिए अध्यक्ष नहीं चुन पा रही हो उसे जनता कैसे नेतृत्व सौंप दे? स्पष्ट है मार्गदर्शक मंडल में जाने से अच्छा था कांग्रेस में राहुल गांधी को ‘नाचीज़’ बना के प्रियंका की ताजपोशी का माहौल तैयार किया जाय।

कांग्रेस पार्टी में शैडो राजनीति का इतिहास रहा है शास्त्री जी मृत्यु के बाद कांग्रेस सिंडीकेट “गूंगी गुड़िया” इंदिरा गांधी की तजपोसी की जबकि नेहरू जी परिवार की राजनीति को दरकिनार करके शास्त्रीजी को अपना उत्तराधिकारी बनाया था, यह अलग बात है गूंगी गुड़िया ने सिंडीकेट राजनीति खत्म करके कांग्रेस को ही इंदिरा कांग्रेस कर दिया।
★★★★★★★★★

संजय गांधी के रहते राजीव गांधी की इंट्री नहीं हो पायी किन्तु इंदिरा की मृत्यु ने सिंडीकेट को मौका दिया कि राजीव गांधी को केंद्र बना दिया। जल्द ही पार्टी के कुछ लोगों की महत्वाकांक्षा ने राजीव गांधी को राजनीति का शिकार कर दिया। राजीव के बाद कांग्रेस को मजबूत करने के लिए सिंडीकेट जिसमें अहमद पटेल की भूमिका मुख्य थी, सोनिया गांधी को राजनीति की सीढ़ी चढ़ाना शुरू कर दिया।

राजनीति में सौंदर्य के बहुत पुजारी है इंदिरा,सोनिया और प्रियंका को आगे करके राजनीति बिसात चलने वाले माहिर खिलाड़ियों में कामराज, अहमद पटेल रहे है। अब प्रियंका को राहुल गांधी के विकल्प के रूप खड़ा करने की कीमत प्रियंका से वही ले रहे है, जो एक पुरुष एक स्त्री से लेता है , पूर्व में इंदिरा और सोनिया को भी इसी रास्ते हो कर गुजरना पड़ा था।
~~~~|||•••••••••••••••

राजनीति कीमत वसूल करती है “आप क्या दे सकते हो और कितना” ? कांग्रेस में सिंडीकेट सदा ही वृद्धो का बना रहा है जिसे सत्ता और सौंदर्य दोनों चाहिए । आप बनो इंदिरा,सोनिया और प्रियंका?? राजीव और राहुल की बलि दी जाती रहेंगी। कपिल सिब्बल सही कह रहे कि जब “अस्तबल से घोड़े चले जायेंगे तब हमारे जगने का भी फायदा नहीं है “।

संस्कृति की खोज 😑

भारत अपनी परम्परा को भूल बैठा वह वर्णसंकरता और #कर्मसंकरता को रोकने में विफल रहा है प्राचीन गौरवमयी सभ्यता कुछ छलछंदियो के हाथ पड़ गयी। फिर भी वह संधर्ष करती रही । सबसे बुरा समय #स्वतंत्रता के बाद आया जब सत्ता कम्युनिस्टों के हाथ लग गयी।

वह अंग्रेजी संस्कृति के महत्व को स्थापित करने और भारतीय संस्कृति को कमजोर करते गये । हमारे युवान अपनी संस्कृति न जान दूसरे पर पीठ थपथपाने लगे । क्योंकि किसी परम्परा को गति उसकी संस्कृति देती है। भारत स्वतंत्र हुआ लोग स्वतंत्र हुये किन्तु हिन्दू धर्म स्वतंत्रता के बाद संविधान का गुलाम बना दिया गया।

लोगों में मानसिक गुलामी की आदत डाली जाती रही है। महानता का दम्भ अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली ने विकास और विज्ञान को दिया। अंग्रेज उद्धारक बन गया भारत के वास्तविक गुरु घृणा के पात्र बना दिये गये। पूरी पीढ़ी अंधेरे में जीने लगी उसके आदर्श रंगमंच के नचनिये बनते गये।

अन्य देश वस्तुओं का आयात करते है वही हम संस्कृति के साथ बुद्धि के आयातक बन गये। हमारे भित्ति में भारत नष्ट होकर “इंडिया” का आकार लेता गया। हम अबोध की भांति सेकुलर जामा पहनते गये। भारत के अभाव में विश्व में शांति,प्रेम का पाठ कौन पढ़ाये। अपाहिज इंडिया अपनी आत्मा इंग्लैंड में तो कभी रूस में कभी अमेरिका में देखने की भरपूर नकल करता गया।

कौन कहे वेद,शास्त्र, गीता,रामायण पढ़ने को ,कौन गीत गुनगुनाये महान भारत के जिसने विश्व को मानवता की पहचान करवायी। काले अंग्रेजों ने हमें पढ़ा दिया कि “भारत की खोज” वास्कोडिगामा ने की थी।

जब तक हम #भारत को अपने में नहीं खोज लेते तब तक भारत विश्व गुरु कैसे बन सकता है…?