कांग्रेस का भंडाफोड़ …… गांगेय♨️

कांग्रेस राजनीति में अस्तित्व हीन होती जा रही है आखिर इसका क्या कारण है जिम्मेदारी कौन लेगा,किस पर ठिकरा फूटेगा। लगातार असमंजस्य बरकार है। पार्टी की दुर्गति हो रही है उसके नेताओं को समझ नहीं आ रहा है सेकुलर के अलावा भी कुछ है कि नहीं।

कांग्रेस और कांग्रेसी नेता तक बात ठीक है जब यह बढ़कर कांग्रेसी वोटर की ओर जाती है तब स्थिति हास्यास्पद बन जाती है। मूढ़ कांग्रेसी तरह-तरह की दलीलें पेश करने लगता है कि बीजेपी राजनीति में धर्म का सहारा ले रही है वर्णाश्रम,मनुस्मृति,शास्त्र और ब्राह्मण को सम्मान नहीं दे रही है आदि-आदि।

कुछ मुद्दे जिस पर परिचर्चा आम रहती है कृषि,विकास,सुरक्षा,रोजगार,शिक्षा,स्वास्थय, संस्कृति और लोग।

सुरक्षा पर प्रथम दृष्टि डाले👉
बंटवारे की जिम्मेदारी किसकी थी और सत्ता कौन पाया?दोष किसपर लगाया गया,नरसंहार किसका हुआ? यदि मालवीय, सावरकर हिंदुओं के प्रतिस्थापित नेता थे तब लीग ने गांधी और नेहरू को नेता क्यों स्वीकार नहीं किया। जबकि गांधी और नेहरू का एजेंडा सेकुलिरिज्म का था हिन्दू मुस्लिम भाई-भाई का था यहाँ तक कि देश बटने के बाद मुस्लिम को एक नये पाकिस्तान बनाने के लिए क्यों रोका गया?

जम्मू&कश्मीर को विशेष छूट 370 के रूप क्यों दी गयी। जबकि जूनागढ़ और हैदराबाद की स्थिति वही थी।

पाकिस्तान ने नेहरू के समय कश्मीर का हिस्सा अधिकृत कर लिया बदले में पिद्दी देश से निपटने को कौन कहे,मामले को नेहरू UN में लेकर चले गये। परिणाम यथास्थिति! नुकसान किसका हुआ , भू क्षेत्र किसका गया।

नेहरू अभी विश्व नेता बनने की फिराक में कूटनीति को खूँटी टांग कर UN की स्थायी सीट, जिसे भारत को दिया गया, हिंदी- चीनी भाई-भाई के ख्याल में चीन को दे दिया गया। बदले में चीन ने 1962 में अश्काई चीन क्षेत्र भारत से कब्जा कर लिया।

नेपाल और भूटान को वहाँ के तत्कालीन राजा के कहने के बावजूद नेहरू ने भारत मे सम्मिलित नहीं किया। आज वही चीनी सीमा पर चुनौती बन रही है।

भारत का विकास एक एम्स, सात IIT ,कुछ बांध से पूरा हो गया क्या? भारत के लोगों का अभ्युदय हुआ; अंग्रेजों ने भारत पर शारीरिक गुलामी रोपी थी नेहरू एंड कम्पनी ने मानसिक गुलामी। अब मूढ़ कांग्रेसी जिरह करेगा। उसके लिए तुम जिस इतिहास की आलोचना कर रहे उसे किसने लिखवाया? सावरकर,वाजपेयी या मोदी ने?

स्वतंत्रता के क्या पैमाने कांग्रेसी रखेगा, हिन्दू आस्था की ऐसी-तैसी करना। बुर्के वालो पर मौन, क्योंकि वह सत्ता की चाभी बनते रहे है। बंटवारे में भारत आये हिन्दू,सिख,बौद्ध,ईसाई को नागरिकता मिले, उस पर तुम्हें आपत्ति है।

आइये इंदिरा जी पर आवाज लगाये। उनके पास जमा तीन-चार चीजें है । पहला बांग्लादेश की मुक्ति करके पाकिस्तान को दो टुकड़ों में विभाजित कर देना। भारत के इतने संसाधन बर्बाद हो चुके थे तब क्यों नहीं बंगलादेश को भारत में सम्मिलित नहीं किया गया। परिणाम बांग्लादेश से हिन्दू गायब और भारत के कई राज्यों मुस्लिम फर्जी नागरिक बनने लगे। मुस्लिम वोटर कांग्रेस का है इस लिए NRC पर देश जले तो जल जाएं। यह देश मुस्लिम अल्पसंख्यको का ही है! क्योंकि वह वोटर उनका है।

स्वास्थ्य का हाल यह था कि अभी कुछ सालों पहले तक महिला को टैक्टर आदि अस्पताल पहुँचाने में सड़के इतनी अच्छी होती थी कि सड़क के गड्ढे से जिन नौनिहालों का जन्म अस्पताल में होना था वह रास्ते में पैदा हो जाते थे।

ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा की हत्या दिल्ली में पंजाबियों का नरसंघार और पंजाब में हिंदुओं का ,अरे भिंडरावाले को पैदा इंदिरा ने किया नाहक सिख कौम आतंकवादी बना दी गयी।

तुम आतंकवादियों के लिए देर रात कोर्ट का दरवाजा खुलवाते हो, राममंदिर की जगह अस्पताल को समर्थन देते हो ,शत्रु देश की टूल किट बन जाते हो,अपनी सेना पर प्रश्न करते हो,दंगाइयों से गलबहियां यहाँ तक अंधे हो गये की भारत के प्रधानमंत्री का काफिला रुकवा देते हो।

राम मंदिर बनने से रोकने के लिए और राम के अस्तित्व पर हलफनामा देने वाले यही कांग्रेसी है। नार्थ ईस्ट और कोस्टल भारत में ईसाइयत फैलाने में नेहरू से लेकर राहुल गांधी की बड़ी भूमिका रही है।

टेरेसा जैसे ईसाई लालची को भारत रत्न राजीव गांधी की सरकार द्वारा दिया गया।

मिस्टर कांग्रेसी आज तुम पर धर्म का जो जुनून सवार है वह नेहरू,इंदिरा और राजीव और सोनिया के समय में क्यों नहीं हुआ।

होता भी कैसे तुम तब गा रहे थे अल्लाह को प्यारी है कुर्बानी,शांति के कबूतर छोड़ रहे थे। तराने चल रहे थे अमर,अकबर,एंथोनी।

अरे वो मूढ़मति कांग्रेसी कम से कम वही इतिहास देख लेते जो तुम्हारें अब्बाजान लोगों ने लिखा है। लेकिन तुम कैसे देखते पिछले 15 साल से टट्टू को घोड़ा बनाने में जो लगे हो।

तुम्हारे वेद का स्रोत मैक्समूलर है तुम्हारें इतिहास का स्रोत अंग्रेज। तुम्हारें संविधान का स्रोत अंग्रेज शासित देश।

भारत ऋषि मुनियों,यति,तपसी,साधू, वृन्द ,धरती को माता मानने वाले लोगों की भूमि है तुम विधर्मी,विदेशी मानसिकता वाले काले अंग्रेज की गुलामी करने ,चरण चिंतन करके भरतीत संस्कृति को भ्रष्ट कर रहे हो।

प्रयाग के एक ब्राह्मण संत रामानंद जी ने कभी कहा था कि …

जाति पाति पूछय नहीं कोई जो हरि का भजय वो हरि का होई।।

यह कैसा न्यू ईयर है●●●●💘👅

भारतीयों का होता सांस्कृतिक पतन जिस गति से बढ़ रहा उससे लग रहा है जल्द ही भारत का मुख्य त्यौहार क्रिसमस और न्यू ईयर हो जायेगे।

किस तरह से युवा पीढ़ी आधुनिकता और स्वतंत्रता की अति के लिए न्यू ईयर सेलिब्रेट कर रही है। युवा पीढ़ी फैशन के नकल की ऐसी दीवानी हो गयी है कि न्यू ईयर पार्टी, दारू पार्टी, कपल का होटल के एकांत कमरे का आनंद। गोवा बीच की अश्लीलता को भी वह आनंद के विषय से जोड़ लिया है।

फैशन की गिरफ्त में युवा पीढ़ी में किस जगह जाकर सेलिब्रेशन हुआ ,उसका महत्व अत्यधिक हो चुका है।

यह सिर्फ क्रिसमस और न्यू ईयर तक सीमित नहीं है बल्कि बर्थडे पार्टी,सक्सेस पार्टी, मैरिज पार्टी आदि में सब तत्व अप संस्कृति से आ चुके है। हमारी भारतीयता कहाँ गुम होकर किनारे खड़ी निहार रही है कि मेरा बच्चा कैसे काला अंग्रेज बन गया।

एक अनपढ़ चाचा कह रहे थे कि मेरा पोता आज सुबह बिस्तर से से उठते ही हैप्पी-हैपी कह रहा है। तब जानते है उन्होंने क्या कहा… बेटा हैप्पी का मतलब खुशी से है तुम कितना खुश हो ,कितना मीठा खाया, मीठे से मतलब है कि भारत के उत्सवों में मिठाई एक महत्वपूर्ण चीज है। साथ ही चाचा ने कहा कि बेटा यह त्यौहार ईसाइयों का है, हिंदुओं का नहीं है।

हिन्दू के त्यौहार संक्रांति,चौथ,अमावश्या,चैत्र प्रतिपदा है क्रम से आयेंगे, चैत्र प्रतिपदा के दिन हिन्दू संवत्सर का प्रारम्भ होता है। किंचित तुम्हें ध्यान हो #विक्रम संवत्,शक संवत्, #कल्कि संवत्।।

डीजे लगा कर कानफोड़ू संगीत के बीच शराब पीकर जोर जोर हैप्पी न्यू ईयर कहना किस तरह खुशी का पर्याय बन सकता है?

भारत में लागू अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था,राजनीतिक व्यवस्था ने पूरी सरकारी व्यवस्था को उसी तरह बना दिया है। हमारे बच्चें इन नकली उत्सव को महोत्सव समझने लगे है। कब्र में #मैकाले की रूह मुस्करा रही है।मैकाले ने भारत के लिए जिस सोच के साथ अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था को लागू किया था उसके परिणाम अब मिल रहे है।

अंग्रेजों के हिसाब से दिसम्बर में छुट्टी, क्योंकि उन्हें इंग्लैंड परिवार के साथ #क्रिसमस और #न्यू ईयर मनाना था। गर्मी का भी हाल यही था जून भारत में बहुत गर्म महीना रहता है और ब्रिटेन में बच्चों के स्कूल इस समय बन्द रहते थे।

हमारे बच्चें अपने त्यौहार भूल गये संक्रांति में तिल के लड्डू क्यों खाये जाते है किंचित उन्हें पता हो। यह अपसंस्कृति का प्रभाव है कि शहर क्या गांवों तक #अंग्रेजी कल्चर हावी होते जा रहे है।

स्वागत जीवन में कम होने का नहीं होता बल्कि बढोत्तरी का होता है नववर्ष नव संकल्प के साथ शुरू किया जाता है दारू पार्टी,रेव पार्टी, पेज थ्री से नहीं है । बल्कि बुद्धि विवेक आपका खूब चिल्लाईये हैप्पी न्यू ईयर…

हमारी संस्कृति के सबसे बड़े वाहक थे हमारे परिवार। जिसमें #दादा-दादी,चाचा-चाची,बुआ,मामा, मौसी उनके बच्चों के साथ बड़े होते थे । गौरतलब है कि परिवार टूटने से रिश्ते लुप्त हो गये अब बच्चें मोबाइल के साथ बड़े होने लगे।

काश की भारत अपनी संस्कृति के अनुरूप व्यवस्था को अपना सके। व्यवहारिक रूप में #दक्षिण भारत के लोग उत्तर भारत के हाइब्रिड कल्चर से बहुत आशंकित रहते है क्योंकि उन्होंने उत्तर भारत की अपेक्षा अपने त्योहार,परम्परा,मान्यता आदि को बचा रखा है।

उत्तर भारत राजनीतिक गढ़ होने से कुछ ज्यादा सेकुलर फील कराता है।।

वर्षांत..गढ़ती छवि🍁🍁

नरेंद्र मोदी कैसे वह गुजरात से भारत के जन और मन नेता बन गये। कांग्रेस उन्हें राजनीतिक बिरादरी में अछूत घोषित कर रखा था। दिल्ली का लुटियंस गैंग मोदी नाम से बिदक जाता था। भारत का सो कॉल्ड बौद्धिक वर्ग गुजरात दंगे का न्याय, मोदी को सजा देकर लेनाचाहता था।

एक खास वर्ग जिसकी तालीम हावर्ड, आक्सफोर्ड आदि से हुई थी जो भारत का होने पर भी अपने को इतना मॉडर्न मानता था कि उसे काला अंग्रेज कहना ही सही होगा। कपिल सिब्बल,मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर यहाँ तक अमर्त्यसेन,अभिजीत बनर्जी जैसे विद्वान एक खास मानसिकता की वजह से मोदी का विरोध कर रहे थे।

मोदी का राजनीति में जितना विरोध होता , मोदी की छवि जनता के मन उतनी और उभरती। मंझे नेताओं को मोदी कैसे मात दे गये। कांग्रेस पार्टी के बड़े दिग्गज मोदी के विरुद्ध नैरेटिव बनाने में लग रहे। वह कांग्रेस पार्टी के इतिहास को भूल कर एक टट्टु को हाथी के मुकाबले में जीता मान कर चल रहे थे जबकि मोदी की हिंदुत्व की अपील जनता के सिर चढ़ कर बोली।

कांग्रेस और बुद्धिजीवी झूठे इतिहास के सहारे हिन्दू मुस्लिम एकता के तराने गाते रहे है । अटल, आडवाणी,सिंहल,तोगड़िया से शुरू हुआ व्यूह मोदी के रूप में अर्जुन बन गया। तुम होंगे पितामह,द्रोण और कर्ण जैसे महारथी अर्जुन की जिम्मेदारी जनार्दन की है, वही राजनीति में मोदी के इर्द गिर्द हुआ जनार्दन नहीं तो जनता ही जनार्दन बन गयी।

विपक्षी अपनी मूर्खता से अभी भी बाज नहीं आ रहे है मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहते जिस तरह बर्ताव सोनिया की टीम ने किया “मौत का सौदागर” अभी उस समय के कैबिनेट मंत्री शरद पवार पोल खोल रहे है। आये दिन कोई न कोई कांग्रेसी वह बोल जाता है जिससे मोदी को फायदा हो।

चाय वाला.. चायवाला और भारत का प्रधानमंत्री .. यह कर्ण जैसे महारथी को रास नहीं है क्योंकि उसे स्वयं के बाहुबल से ज्यादा दुर्योधन को राजा बनते देखना है क्योंकि दुर्योधन ने उसकी आकांक्षा को लाभ दिया। जो धर्म- अधर्म से भी ऊपर है। इसी मानसिकता को जीवित रखते हुए फेंके हुए जूठन खाये झूठे लोगों ने मनवाया कि सत्ता का अधिनायकत्व गांधी-नेहरू के परिवार में ही है। इनके बिना लोकतंत्र मर जायेगा। इसी के लिए यहाँ लोकतांत्रिक राज परिवार बन गये है जिससे लोकतंत्र जिंदा रहे।

उस परिवार की विचारधारा को सम्पूर्ण कांग्रेस पार्टी पर थोप दिया गया। जबकि तुम्हें मालूम है आमजन मानस क्या चाहता है । भारत में राजनीति की बयार बदल गयी है। फिर भी तुम चिड़िया उड़ ,कौआ उड़ खेलना चाहते हो।

आपने विचार किया है कि कोई आप की जमीन पर कब्जा कर ले ,आप के बहन-बेटियों अस्मत लूट ले,आपके पूजा स्थल पर अपना इबादतगाह बना दे, कब्जे के बाद जमीन को धर्म के नाम अलग कर ले। आप सब भूल जाएंगे? क्योंकि कुछ लोग तराने सुना रहे है हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई भाई-भाई। चंद लोगों की भलाई से देश और संस्कृति नहीं भूला दी जाती है।

उनके दिए घाव बहुत गहरे है हमारी आवाज बनने वाला कोई राणा, कोई शिवाजी न रहा। हमारे ऊपर गांधी और नेहरू को थोप दिया गया, पूरा माहौल सेकुलर बना के। हम कैसे और कब राम-कृष्ण को छोड़ कर बुद्ध की रुबाइयां गाने लगे। जिसके युद्ध को महाभारत कहा गया वह अहिंसावादी हो गये।

नहीं दोस्त हमारी आवाज दबा दी गयी इतिहास के माध्यम से सिनेमा,साहित्य और शिक्षा से। देखिये न आप, जैसे ही कोई मोदी आया पूरा हिन्दू समाज एक जुट हो गया। वह धर्म,संस्कृति,संस्कार,आध्यात्म यहाँ तक कि विद्या माता की बात करने लगा है।

यह हिन्दू है किसी के किये गये उपकार और अपकार को सूद समेट लौटता है। आपको पीड़ा हो सकती है क्योंकि आप सेकुलर हो और एक खास परिवार के पुजारी भी। आपका सत्य रोमिला थापर और अमर्त्यसेन जैसे पर आश्रित है , आप की दृष्टि गांधी परिवार के इबादत में चली गयी है।

सौ की सीधी एक बात बाना पहनने से कोई जोधा नहीं बन जाता। उसके लिए सीने में धधकती ज्वाला चाहिए।

काशी बोल रहा है🌻

भारत की राजनीति में मोदी से पूर्व का भारत और पश्चात के भारत पर हम सभी कभी चिंतन करेंगे। मोदी के पूर्व का भारत नेता सेकुलर थे फिल्मकार,पत्रकार,अध्यापक,
इतिहासकार और लेखक का एक विजन था भारत की आत्मा पर दासता का अंकन।

बच्चों को शिक्षा के नाम पर बर्बर मुस्लिमों, मुगलों को सेकुलर और अंग्रेजों का भारत का उद्धारक सिद्ध करके पढ़ाया जाता रहा है। इसके लिए दोषी कौन था विचार आप को करना है।

राजनीतिक आरोप की बात की जाय तो सरल भाषा में साहब राजनीति तुम भी कर सकते थे किंतु तुम हिन्दू धर्म का मखौल उड़ाने में लगे थे तुम्हें अब्दुल का ही मजहब दिखाई दिया। हिंदुओं की आह लगी है कि आज सत्ता पाना तुम्हारें लिए गधे की सींग की तरह हो गया है।

एक परिवार के प्रति ऐसी अटूट श्रद्धा रोपी गयी जैसे भारत का जन्म उसी से हुआ है। हिंदू होना लगभग अपराध बना दिया गया था दलित,पिछड़ा,ज्यादा पिछड़ा हो सकते हो। मुस्लिम को वोट बैंक बना, सत्ता की सीढ़ियां खूब चढ़ी गयी। खुले में नमाज हो या इफ्तिखार पार्टी सब जायज था क्यों राजनीतिक सेकुलर का अर्थ बनाया गया हिन्दू संस्कृति से ,उसे खत्म करने से।

वामियों से इतिहास का लेखन एक सामंतवादी प्रकार का कराया गया जिसमें लिखा गया भारत की परतंत्रता और समाज के विखंडन के ब्राह्मण और क्षत्रियों का दोष रहा है। न्यूज में एक एंगल बनाया गया दलित,पिछड़ा और अल्पसंख्यक।

हिंदुओं की लड़कियों के साथ खूब प्रेम का प्रकटीकरण हुआ ,प्रेमी लौंडे मुस्लिम के हो गये। हिन्दू त्यौहारों पर बालीबुड से लेकर मीडिया और प्रचार तंत्र में यहाँ तक कि मुस्लिम भी ज्ञान देता/देती मिल जाता था कि होली ऐसी हो दिवाली ऐसे मने। हिन्दू का मतलब मसखरी ,मुस्लिम का अर्थ मजहबी बनाया गया। वह मुस्लिम जो तीन तलाक,बुर्का, जानवरों की हत्या त्यौहार मनाने के लिए कर रहा है।

ईसाई मिशनरियां चुपचाप हिंदुओं का धर्मांतरण करती रही है जिसमें सहायक थे उनके आधुनिक स्कूल और वेटिकन वाली सोच। यह सनातन धर्म है जो स्वयं के साथ खड़ा रहा है हम अद्वैत पर अडिग रहे है और यह कहा कि ईश्वर दंड दे रहा है उसे स्वीकार करना पड़ेगा। कितनी स्थिति खराब हो एक दिन निश्चित सनातन हिन्दू धर्म का समय आयेगा।

हिन्दू भूत झाड़ने का धर्म नहीं बल्कि स्वयं को जानने का है। सनातनी उद्घोष करता है अहं ब्रह्मस्मि अर्थात मैं ही ब्रह्म हूँ। ब्रह्म अर्थात उस परम शक्ति और हमारे मध्य किसी पैगम्बर ,किसी दूत की जरूरत नहीं है।

भारत की राजनीति ही नहीं बदली वरन समाजिक व्यूह भी बदल गया। भारतियों की अदम्य शक्ति श्रीराम मंदिर से दिखने लगी है बहुत जल्द एक बड़ा परिवर्तन देखेंगे जिन्हें लोभ,लालच और तलवार के जोर पर धर्मांतरित किया गया वह सभी अपने घर हिन्दू धर्म में वापस आयेंगे। जिसके दौर का आरंभ हो चुका है।

गलत इतिहास लिख देने से, सत्ता पा लेने से भारतीयता को ज्यादा दिन दबाया नहीं जा सकता है। यह सदी भारत की सदी बनने वाली है। आप तैयार रहे जितना आप ने सोचा है उससे अधिक मिलने वाला है। यह हिन्दू धर्म है न भूतों न भविष्यति। मनुष्य है तो मनुष्य की गरिमा और महिमा दिखनी चाहिए।

सर्बिया, इराक,सीरिया,अफगानिस्तान की तरह मानव बलात्कार की वस्तु बन कर न रह जाय। जो जैसा है वैसा दिखता है।

मैं अभी एक विवाह में हूं विवाह में आते समय रास्ते भर बारात आते-जाते देखता रहा । दिनभर का थका हारा बाराती सूट बूट पहनकर चमक बिखेर रहा है । कानभोडू बैंड परीक्षा ले रहे है चल बे बोल कितना सुन सकता है। दूर आतिशबाजी की तैयारी चल रही है। बैड पर नाचने वाले शराब के इंतजाम में व्यस्त है। कुछ महिला वर्ग चेहरे की हजामत करके , चेहरे को गहरे मेकअप से तैयार किया है । इन महिलाओं की तैयारी किस लिए है वह बाराती जो पीछे दारू पीकर मदहोश हो कर आया।

बारात में भागदौड़ है बराती से पहले घराती खाना खाकर निकलना चाहते है। बारातियों का अपना DJ बैंड का अश्लील गाना है… वही घरातियों का बाबुल की दुआएं लेती जा तुझको सुखी संसार मिले…। इस गाने पर किसी का ध्यान नहीं है क्योंकि आज से आफत वर पक्ष के लिए है इस बहु के साथ सामंजस्य बिठाने की।

बराती नाचने के बाद भोजन की टोन में क्या-क्या खा ले। उसके बाद भी पूछता है और कुछ है क्या??

विवाह में एक पंडितजी द्वारा मंत्र और कुछ चीजों को छोड़ दिया जाय तो कोई सनातन तत्व नहीं है ब्रह्म विवाह कैसे कहा जाय। बगल में चमचमाती गाड़ी और दहेज का समान रखा है। कोई बिगड़ कर गाली भी दे रहा । माहौल कुल मिलाकर खुशमिजाज और फोटो शेशन का चल रहा है।

कोई कोई नैना चार की फिराक में है किंतु सोसल मीडिया के समय मे सब पहले से दो है। खैर तुम लगे रहे परिणाम सुबह पता चलेगा😂

कृषक कानून और बदहाल किसान.. गांगेय

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार होकर बदहाल कैसे हो सकती है कृषि उपार्जन की ,किसान अर्थव्यवस्था पर बोझ बन गया है? सरकार चुनाव के दबाव में वापस कदम खींचे। सरकार द्वारा वापस लिए गये तीन कानून

१. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य संवर्धन और सरलीकरण विधेयक (2020) यह कानून निकट भविष्य में सरकारी मंडियों की प्रासंगिकता को शून्य कर देगा। निजी क्षेत्र को बिना पंजीकरण और बिना किसी जबाबदेही के कृषक उपज के क्रय विक्रय की खुली छूट। अधिक से अधिक कृषि उपज की खरीदारी निजी क्षेत्र करें।

२. कृषि कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक ( 2020) इसी के तहत कांट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा। बड़ी कम्पनियों और भारी भरकम मशीनीकृत खेती के सामने कैसे भूमिहीन,संसाधनहीन किसान कैसे टिकेगा।

३. आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक (2020) निजी क्षेत्र को असीमित भंडारण की छूट। उपज जमा करने के लिए निजी निवेश की छूट। यह एक प्रकार से जमाखोरी और कालाबाजारी को मान्यता देना है।

2011 की जनगणना के अनुसार देश में कुल 26.3 करोड़ परिवार खेती किसानी के कार्य में लगे हुये है। इसमें महज 11.9 करोड़ किसान के पास खुद की जमीन है जबकि 14.43 करोड़ किसान भूमिहीन है। भूमिहीन किसान बड़ी संख्या में बटाई पर खेती करते है। भूमि के मालिक से खेती के बदले आधा उपज दिया जाता है। श्रम और भूमि से मिलकर उपज पर आधा-आधा बटवारा।

भारत की GDP में कृषि का हिस्सा 14 फीसदी है वही इस पर आश्रित जनसंख्या कुल का 50 फीसदी है।

किसान की सबसे बड़ी समस्या है उसका असंगठित होना। नेता भी जानता है किसान अपने हकूक के लिए इकट्ठा नहीं होगा इस उसके हित के कानून कभी पास नहीं किये जाते। यह जरूर है उसे खेती से हतोत्साहित करने के कानून बनाये जाते है।

बिजनेसमैन कार्टेल बना कर अपने उत्पाद का मूल्य बढ़ा लेता है वह किसान को सरकार द्वारा घोषित MSP के इर्द गिर्द रहना पड़ता है।

MSP की व्यवस्था भी ऐसी है कि सामान्य किसान की पहुँच से दूर रहती है जैसे उत्तर प्रदेश में धान की कटाई अक्टूबर के अंतिम तक कटाई शुरू हो जाती है जबकि MSP पर खरीद दिसम्बर में शुरू होती है। उसमें में कहा जाता है कि हाइब्रिड धान नहीं लिया जायेगा। सिर्फ मंसूरी लिया जायेगा। जिस किसान ने मंसूरी धान की फसल नहीं की है उसका क्या हो। MSP खरीद मात्र एक या ज्यादा से ज्यादा डेढ़ महीने तक धान में होती है। यही आलम गेंहू का भी है।

MSP को पूरे फसल सत्र के लिए लागू क्यों नहीं किया जाता है। उसमें सभी तरह के धान और गेहूं की छूट मिलनी चाहिए।

किसान अपने मूल्य का निर्धारण कब तक मंडी और सरकार से करवाता रहेगा। भारत द्वारा WTO में हस्ताक्षर करने के साथ स्पष्ट कर दिया गया है कि वह उद्योग और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देगा। प्राथमिक क्षेत्र कृषि को हतोत्साहित करेगा।

सरकारें भी कृषि नीति में सुधार की जगह मुफ्त बाटने में लगी है यह मुफ्त उसे वोट दिलायेगा कृषि सुधार नहीं।

किसान के 2 एकड़ खेत का मूल्य 2 करोड़ रुपये हो सकता है किंतु इससे उसका जीवन नहीं चल सकता। जबकि एक चपरासी 5 लाख घूंस देकर खुशहाल जीवन के साथ प्रॉपर्टी बना लेता है।

किसान विवश और मजबूर है उसकी सुनवाई कही नहीं है उत्तर प्रदेश में किसान की मेहनत का आधा छुट्टे जानवर खा जा रहे है छुट्टे जानवर की कोई व्यवस्था नहीं है बस घोषणा जरूर की जाती है।

आप की राजनीति पक्ष-विपक्ष, राष्ट्रवादी-सेकुलर की हो सकती है लेकिन किसान वास्तव में दुःखी है उसकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल रहा है। 5 एकड़ खेती वाला किसान भी अपने किसानी की आय से गुजारा नहीं कर पा रहा है वही एक छोटी नौकरी वाला,व्यापार वाला खुश है यह अंतर आखिर किसने पैदा किया।

उत्तम खेती कही जाने वाली कृषि,चाकरी भीख निदान वाले से ही भीख मांगने पर मजबूर है। उसे उर्वरक की बदहाली से लेकर,बीज,बिजली के लिए तरसना पड़ता है।

संस्कृति की खोज 🚩 गांगेय🏵️

संस्कृति की खोज 🚩 गांगेय🏵️

भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्रचीन संस्कृति है सनातन धर्म शाश्वत तरीके से गतिशील है।

आज के आधुनिक युग में विश्व के हर कोने से लोग भारत के धर्म और संस्कृति में रुचि ले रहे है। इसी दीपावली पर अमेरिका भी सेलिब्रेट करने के साथ इसकी प्रशंसा करता दिखाई पड़ा।

सनातन हिन्दू धर्म के विरोध में विश्व में अनेक मत,पन्थ,मजहब के अलावा भारत में ही एक खास वर्ग बन गया है जो हिन्दू धर्म के विरोध में है। यह विरोधाभाष है कि भारत की राजनीति हिन्दू धर्म के विरोध में रही है । क्योंकि नकल के संविधान का एक उद्देश्य है भारत को नास्तिक बनाना। लोगों पर संविधान की सर्वश्रेष्ठता लोकतंत्र के नाम पर आरोपित करना।

बीजेपी के उभार से पुराने सेकुलर भी अपने को हिन्दू कहता नजर आ रहा है जो अपने को अभी तक इंसान,सेकुलर,बौद्धिक,मार्डन, कम्युनिस्ट न जाने क्या क्या कहता फिरता था।
सोचने का विषय है कि भारत बाह्य शत्रु से संघर्ष करे या आंतरिक शत्रु से।

विश्व में सिर्फ भारत में खासकर हिंदुओं में ही लोग मिलेंगे जिन्हें अपनी संस्कृति और धर्म से द्रोह है। अब समझिये यह द्रोह क्यों है? प्रचीन काल से भारत में एक वर्ग रहा है जिसे सत्ता प्राप्त करने की प्रबल आकांक्षा रही है उसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार रहा है। विदेशियों के लिए अपने देश की जासूसी। उन्ही के वंशज आज भी वही कार्य कर रहे है।

कोई नीली छतरी, कोई लाल तो कोई पंजा पकड़ लिया है। सूरतेहाल यह कि देश रहे या न रहे सत्ता मेरी रहे ,मेरी जाति केंद्र में हो।

सबसे बड़े आतंकवादी वह है जो जनसंख्या वृद्धि में लगे। यह बढ़ती जनसंख्या सभी समस्या का पर्याय बन जा रही है। लोकतंत्र में लगता है कि जनसंख्या अधिक करने पर सत्ता का अपहरण स्वमेव हो जायेगा।

भारत के अंदर धर्म -संस्कृति का विरोध करने वाले के पीछे सत्ता की भावना छिपी है। सबसे बढ़कर अंग्रेजी व्यवस्था भारतीयता के विरोध में है वह भारत में काले अंग्रेज चाहती है जिसकी श्रद्धा लंदन और पोप में रहे।

भारतीय मूल के लेखक वी यश नायपाल सही लिखते है कि विश्व में एक मात्र भारत देश है जहाँ के इतिहासकार अपने गुलाम बनाने वाले देश को आधार मानकर लिखा है अंग्रेज लेखन आज भारत का अभिलेखीय प्रमाण है।भारत का इतिहासकार उन्ही अंग्रेजों के लिखे इतिहास को सत्य मानता है और उसी को अपनी पीढियां को पढ़ाता है यदि वह पढ़ कर भारत को गाली देने लगा समझिये एक आधुनिक मनुज तैयार हो गया।

भारत की मानसिक पकड़ भारत से बाहर के विदेशी निर्धारित करते है। नोबल जैसा पुरस्कार अब तक जितना दिया गया है उसे देखिये यह किन देशों को अधिकतम दिया गया है फिर भारत का पढ़ा लिखा आदमी इसी पुरस्कार का सपना सजो लेता है।

भारत को मानसिक रूप से आज भी गुलाम बनाने वाले देश ब्रिटेन पर विचार करिये उसने अपने भौतिक विकास के लिए आधे विश्व को उपनिवेश बना दिया था क्योंकि उसको लंदन और लंकाशायर जैसे शहरों का विकास करना था। 18 वीं सदी तक ब्रिटेन के लोग हग कर पालीथीन में रखते थे । वह भारत पर 200 वर्ष तक शासन कैसे कर सकते है क्योंकि भारत में कुछ लोग ऐसे थे जिन्हें सत्ता की नजदीकी चाहिए थी।

आप को क्या लगता है विकास का पर्याय शहरीकरण है दिल्ली,मुम्बई जैसे मेट्रोपोलिटन सिटी बना कर क्या मनुष्यता का विकास हो जायेगा?

संस्कृति का वाहक ग्राम्य भारत और माता रही है। भारत की सबसे मजबूत ईकाई परिवार को बिखण्डित करने के लिए माता को भारत के विरुद्ध, देह सुविधा के नाम पर खड़ा किया गया। वह बड़े अभिमान से अपनी तुलना फिल्मी पतुरिया से करने लगी। हांडा रानी,लक्ष्मीबाई उसके लिए गाली का पर्याय बन गयी है। यहाँ तक कि सनी लियोनी से तुलना को भी वह स्वीकार ली । यह बौद्धिक दिवालयापन है।

एक विषय सदा जीवन रहेगा किसका विकास और कितना विकास ? भौतिक विकास के बीच संवहनीय विकास की बात मजबूती से होनी प्रारम्भ है। विकास के नाम मनुष्य वस्तु बना दिया गया उसकी जीवंतता गायब है वह जून के महीने काला कोट और टाई लगाये घूम रहा है।

भौतिक विकास नगर-शहर-सिटी तक पहुँच गया है विकास समृद्धि नहीं बन सकता है भौतिक परिसम्पत्तियों का विकास कर मानवीय पूंजी और वास्तविक बौद्धिक पूंजी को कैसे सुरक्षित रखेगे ।

भारत की एकमात्र समस्या है इसकी मानसिक गुलामी। भारत का व्यक्ति भारतीय मूल का बन कर नोबल कैसे पा जाता है। छोड़िए आप विचार न करोगे। तुम अपनी जाति के लिए सोच रहे हो ।

भय होना कितना जरूरी है.

भय का होना बहुत जरूर है भय कर्तव्य का स्मरण करता है स्वयं को जाग्रत रखता है बेअदबी करने की हिमाकत नहीं होती है। साहस अपनी जगह है भय का अपना महत्व है। धर्म, संस्कृति ,देश,परिवार,समाज का मूल्य बना रहता है। भय नियंत्रण हीन नहीं होने देता, वह पागल भी नहीं बनने देता।

इस लिए कहा जाता है कि भय बिनु होय न प्रीति। आप भी भय के भयंकर को नमस्कार करिये जिससे मानव की गरिमा आप में बनी रही।

फिर आप पूछेगें भय इतना जरूरी क्यों है क्योंकि शोयब मिया जैसे एम्स से तालीम ले रहें कट्टरपंथी सेकुलर को भी इल्म रहे कि राम भारत की जनमानस की श्रद्धा का केंद्र है उसके इस कुकृत्य (राम लीला मंचन) पर भले कोई तालिबानी गर्दन पर छुरा न चलाये किन्तु कानून अपना काम करेगा। बार बार हिन्दू श्रद्धा का मजाक इस लिए उड़ाया जा रहा है कि उसे भय नहीं है दंडित होने का।

सखी…3

वह रूठी थी नाराज थी जाने क्या बात थी। मैंने पूछा तो बोली कोई बात नहीं बस बात नहीं करनी है।

सोच के विचरने की क्षमता मनुज धरता है फिर भी अकड़ता है। किस बात की अकड़ है यह कभी नहीं समझता। एक जीवन है इसे प्रेम में बिता लो या बैर में, कोई पूछने वाला नहीं है।

यदि दुःख है तो दुःख कारण है उसका निवारण है मैं तुम नहीं बन सकता है बस यही रिक्त स्थान को स्याह करना चाहते हो । मेरा मैं, तुम्हारा तुम ही इस दुनिया के अजूबे है जो इसे समझ गया वह जगत-जीव के सम्बन्ध को पा लिया।

हम तुममें उतरना चाहते है लेकिन तुमने खिड़की दरवाजे सब बन्द कर रखे है। हम तो चाहते है यह मैं और तुम की दीवार हम गिरा दे।

पहले प्रेम की गली सकरी हुई अब जीवन की गली सकरी हो गयी है जामे दो न समाय। यह दूसरा कहाँ जाय, जब गली तुम्हारें लिए ही तंग है। संकुचित सोच और बन्द दरवाजे, कोई कैसे करे प्रवेश? संसार तब छोटा हो जाता है जब हम लघुता से मित्रता गांठ लेते है। तुम जीवन की गहराई में न उतर कर,किनारे-किनारे चल कर गूगल से जीवन की खोज करना चाहते हो?

👉अरे भाई मूड डिस्टर्ब तो नहीं हुआ😻

मजहब बैर सिखाता है😡


मुस्लिम कौम के साथ कोई कैसे रह सकता है। मुस्लिम किसी सामाजिकता का पालन तब तक करता है जबतक की वह बहुसंख्यक न हो जाये।

कश्मीर में पंडितों के पलायन हो या स्कूल में आई कार्ड देखकर हिन्दू- सिख टीचर की हत्या। बंगाल और केरल पर हावी होते इस्लाम से आंख नहीं मूंदी जा सकती है। मुसलमान को हद में रखने के लिए उन्हें अल्पसंख्यक रूप में रखना होना। अल्पसंख्यक वह तभी रह सकता है जब आप उनके जन्म दर पर रोक लगाएं । एक सामान्य मुस्लिम के औसत पांच बच्चें होते है।

बंगलादेश में दुर्गा पूजा में पंडाल को नष्ट करने के साथ हिंदुओं को मारा गया, स्त्रियों का रेप किया गया। एक परिवार के पुरुष के अंगों को नोच लिया गया वही उसकी पत्नी,बहन और मां के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।

ऐसी ही दुर्दांत घटना वर्णन तस्लीमा नसरीन ने अपनी पुस्तक “लज्जा” में किया है । अयोध्या में जब विवादित ढांचा गिराया गया उसकी प्रतिक्रिया बंगलादेश के मुस्लिमों ने की । 13 साल की हिन्दू बच्ची का रेप उसी के मुहल्ले के मुस्लिमों ने किया। इन रेपिस्टों में तीन पीढ़ी के मुस्लिम शामिल थे जब 85 का दंगाई रेप करने लगा तो बच्ची ने कहा चच्चा आप भी, अरे आप की गोद में खेल कर बड़ी हुई हूँ। तस्लीमा नसरीन को दंगे की हकीकत उजागर करने के लिए बंगलादेश छोड़ना पड़ा । वह फ्रांस,ब्रिटेन होते हुये निर्वासित रूप से भारत में रह रही है।

मुस्लिम जबकि अपनी औरत का सगा नहीं है उसे बच्चा पैदा करने की मशीन समझता है बुर्के में कैद रखता है। वह औरत जब तक जवान है उसकी कोख हरी भरी रखाता है। उससे मानवता की आशा बेमानी है।

पाकिस्तान में कृष्ण जन्माष्टमी में मन्दिर तोड़ने का वीडियो वायरल हुआ था। अफगानिस्तान में तालिबान मन्दिर और गुरुद्वारे को मस्जिद बना दे रहे है।

सुन्नी के लिए शिया काफिर, शिया और सुन्नी के लिए कूर्द काफिर । शिया सुन्नी और कूर्द के यजीदी और अहमदिया काफिर। इन सबके के लिए हिन्दू,बौद्ध,ईसाई, पारसी काफिर।

मुस्लिम आप के सामाजिक नियम को तब तक ही मानता है जब तक वह अल्पसंख्यक है यह अल्पसंख्यक ज्यादा दिन तक नहीं रहता है क्योंकि इसकी पैदावार सुअर जैसे बढ़ती है। एक से सात ,सात से उनचास।

आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है फिर भी सभी आतंकवादी मुसलमान क्यों है? मुस्लिम आतंकवाद की पहचान कर लेने पर जो कुछ मजहब नाम का वह भी सामने आ जायेगा। सामान्य मुस्लिम डरता है वह कमियों की बात करेगा उसकी गर्दन जिबह कर दी जायेगी।आतंकवादी से लेकर मौलवी और आईएएस मुस्लिम तक यही कहता है वह वही कर रहा है जो कुरान में लिखा है।

कुरान में लिखा है कि काफिर का कत्ल करो जन्नत में 72 हूर पाओ। अल्लाह का काम करो,काफिर को कुरान का इल्म दो इस रास्ते मारे जाते हो फिर भी तुम्हें जन्नत अता होगी। 72 हूरें मिलेगी।

मुस्लिम तादाद बढ़ते ही वह शरिया की मांग करता है पिछले दिनों तमिलनाडु कोर्ट में मामला आया एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के एक मौलवी ने कहा हिन्दू की शोभायात्रा पर रोक लगे क्यों कि मेरा मजहब इसकी इजाजत नहीं देता है उसके अजान में बेजा खलल पड़ती है। यह हालत भारत की है तब सोचिये पाकिस्तान में किस तरह से 13-14 साल की हिन्दू बच्चियों के अपहरण करके उन्हें मुस्लिम बना कर निकाह कोई मजहबी कर लेता है।

अधिकार जन्म से मिलता है किंतु कर्तव्य के निर्वहन की जिम्मेदारी भी बनती है। यदि तुम्हारा दीन असल है उस मजहब की रक्षा हिंसा करेगी? दहशत से इस्लाम का इल्म कम तक कराया जायेगा। जिस धर्म में जोर जबरदस्ती,धर्म परिवर्तन ,हिंसा आदि है वह धर्म नहीं है। वह राजनीतिक विचार है।

गलतियां कुरान में है दोष मुल्ला मौलवी का ज्यादा नहीं है। इस्लामिक कट्टरता अन्य धर्मावलंबियों को विवश कर रही है तुम भी विराथु बनों। हमें अमन चैन नहीं है न ही तुम्हें लेने देंगें।

फ्रांस में कार्टून की घटना,कश्मीर का हजरतबल, मन्दिर का विवाद। अब गौर करने वाली बात है कि मुस्लिम कब हिन्दू के साथ मिल कर रहा है यदि उसे मिलकर रहना ही आता है तो भारत में हिन्दू मुस्लिम दंगे का इतिहास नहीं रहता।