जब राजनीति बदचलन और झूठी है तब न्याय कैसे मिलेगा। ये अंग्रेजी वाला न्याय शास्त्र जो सीधे इंग्लैंड से लाद लाये। वह भारत को न्याय कैसे देगा। मैकाले कहता था कि भारत के समाज से सबसे पहले न्याय व्यवस्था को खत्म करना है।

जब न्याय की बारी आती है तुम जाति,
प्रजाति,सम्प्रदायिक चश्में चढ़ा लेते हो।

वह स्त्री को न्याय कैसे देगा? न्याय के पूर्व उसकी पूरी स्थिति समझी जाती है। जैसे वह
अल्पसंख्यक है कि नहीं,दलित है कि नहीं ,
अपराध करने वाला सवर्ण समाज ब्राह्मण,ठाकुर से ताल्लुक रखता है नहीं, आदि-आदि।

यदि यही अपराध दलित- मुस्लिम द्वारा सवर्ण पर किया गया है तो उसे उस तरह के अपराध की श्रेणी में शामिल नहीं किया जायेगा। क्योंकि यह सेलेक्टिव सोच में फिट नहीं बैठती न ही नैरेटिव की आगे बढ़ा पायेगी । जैसे मुम्बई की मायानगरी में फ़िल्म में एक गरीब अभिनेता न्याय के लिए संघर्ष करता हुआ। वही दबंग ठाकुर एक दबे कुचले वर्ग की लड़की का रेप करता है,उसका सलाहकार ब्राह्मण है ।

ऊपर से वर्षों से उस गरीब परिवार को सूद तले दबाते सेठ जी भी है । इस स्क्रिप्ट पर फ़िल्म की कहानी चटकारे दार बनेगी।उसका प्रभाव समाज में जायेगा। फिर कही किसी साधु और पुजारी को जला के मारा जायेगा।

कुल जमा समाज में पूर्वाग्रह उसी तरह बैठाया गया है जैसे अंग्रेज उद्धारक थे। मुस्लिम भारत का विकास करने आये थे उन्होंने कोई मंदिर नहीं तोड़ा न ही समाज को प्रताड़ित किया। वह तो सेकुलिरिज्म में बहुत पहले विस्वास करते थे। इसी को आगे बढ़ाने के लिए गंगा-जमुनी संस्कृति की शुरुआत की।

इस्लाम जो पूरे विश्व में धर्म के नाम पर तबाही मचाये है वह भारत में गीत गाता है “पीड़ पराई जान ले।” दलित,अल्पसंख्यक,पिछड़ा कहना राजनीति में सफलता की गारंटी है । जिसका सहारा बड़े से लेकर टुच्चा नेता करता है।
गांधी जी हिन्दू उसे कहते थे जो दूसरे की पीड़ा जानता है।

लुटियंस गिरोह की नजर में हिन्दू आतंक और पर को पीड़ा देने वाला धर्म। स्वच्छंद वेश्यायें समाज सुधारक बनी है उच्चश्रृंखल पुरुष नीतिकार।

अब कैसे करेंगे समाज तैयार !
जब कि जाति बना दिया गया राजनीति में हथियार। मानवता का पाठ विश्व को सीखाने वाला सेकुलरों को आतंकवाद की पाठशाला नजर आता है। वास्तव में विश्व को आतंकवाद देने वाला शांतिकौम बन जाता है क्योंकि सत्ता की सीढ़ी उसके वोट से जो चढ़ जाता है।

हिन्दु को दलित,महादलित,पिछड़ा,अत्यन्त पिछड़ा,सवर्ण में बांटा जाता है क्योंकि यह लोकतंत्र है दोष ब्राह्मण पर लगाया जाता है।

कोई इन गिद्दों से नहीं पूछता 70 साल में तुम क्या कर पाएं ? शिक्षा को तुम ऐसा बना दिया छोटी-छोटी बच्चियों में वासना दिखने लगी। नारी का शोषण दिल्ली-मुम्बई में होने लगा। उन आदिवासी,ग्रामीण क्षेत्र में जहाँ नग्न हो नहाती है वहाँ उनकी इज्जत बची है क्योंकि तुम्हारी विदेश वाली सीख अभी नहीं पहुँची है।

पूरक मिलन —

स्त्री और पुरुष के मिलन को पूर्णता कहते है यही मेल ही दोनों में आकर्षण का मुख्य कारण है। मैथुनी सृष्टि में नर और मादा मिलकर अर्धनारीश्वर हो जाते है।

एक लिंगी जीव को छोड़ कर इसमें स्थावर,जंगम,उभयचर सभी प्राणी जगत,जिसमें बनस्पतियां सम्मिलित है। किंतु मुख्य आकर्षक मानव है।

पुरुष और स्त्री का योग सृष्टि का आधार है। इसी योग को प्रेम भी कहा जाता है। इस प्रेम का समपक्ष अर्थत जोड़े पूर्व निर्धारित है।
नहीं तो 7.5 अरब में आधी-आधी संख्या दोनों ओर है।

अब प्रश्न है प्रेम किसे कहते है?

जहाँ प्रेम तह नेम नहि तहाँ न बुधि व्यवहार प्रेम मगन जब मन भया तो कौन गिने तिथिवार।

यह प्रेम गोपियों वाला भी हो सकता है और एक साधारण का सामान्य के प्रति भी। किन्तु जीवन में कुछ ऐसे मिलते है जिन्हें देख कर लगता है यही तो है…

प्रेम मिलन चाहता है लेकिन इसमें “काम” कामना से रहित होना चाहिए । काम की कामुकता आप को जीव से जानवर की ओर ले जाती है। यदि वासना रहित है तो बात दूसरी है। प्रेम विस्तार है मनुष्यता और सहृदयता का।

कभी आप भी प्रेम करिये। ये मत कहियेगा की प्रेमी या प्रेयसी कहां से मिले❤️

सखी..

हे सखी तुम क्यों नहीं उठती

मैं रोज उठता हूँ तो लगता है आज बोल दोगी । तुम्हारा यू खामोश लेटे रखना बर्दाश्त नहीं होता

मैं चिड़िया होता तो तुम्हे दूर अंतरिक्ष में ले जा कर फिर से वही बना देता।

मेरा रिश्ता कोई इस जन्म का नहीं यह जन्मोजनम का है कभी मैं तुम बनता कभी तुम मैं बनती ।

तुम मुझे इस जनम में छोड़ नहीं सकती ।
आत्मा के सम्बंध को शरीर कैसे मिटा सकता है।

शास्वत,अमरत्व आत्मा वही है जो तुममें है शरीर इसी धराधाम का है यह यही रह जायेगा।

जो आया वह जायेगा निश्चित ,बस कोई पहले कोई बाद। जो पहले जाय वो दूसरे का इंतजार करें।

जब भी मैं दूर ऊंचाइयों में देखता हूँ तुम ही तुम दिखाई देती हो ,मेरे आस-पास हो ऐसा न जाने क्यूँ महसूस होता है।

यह आत्मा ही ईश्वर है तुम मेरी अमृत कल्पनाओं की सखी हो मैं वही हूँ जो तुम हो। सिर्फ पर्दे रूपी अज्ञान का भेद है… आओ न मैं तुम हो जाऊं😥

गांगेय

भारत में सेकुलिरिज्म दो टाइप का प्रचलित है पहला वामपंथी सेकुलिरिज्म दूसरा इस्लामिक सेकुलिरिज्म। दोनों नैरेटिव के पीछे है “नारी शोषण”। कम्युनिस्टो में इनके सूत्रधार मार्क्स एंजिल की बीबी ले उड़े।

तो सावधान∆ यदि वामपंथी मित्र रखे हो तो अपनी बीबी बचा के रखना। मुस्लिम सेकुलिरिज्म में हिन्दू को चूतिया बनाया जाता है। वह किसी तरह करने आपकी बहन-बेटी को बहकाता।

कम्युनिस्ट की तरह मुस्लिम भी नारी को भोग्या मानता है। समस्या यह है लड़की पोती की उम्र की चाहिए। लाल सलाम..

थोड़ा सा मुम्बई मामा मारीच की नगरी के फ़िल्म इंडस्ट्री पर नजर डाले 🙄

आलम यह है कि तुम्हारी बीबी या गर्लफ्रेंड तुम्हारी अकेली की नहीं है न ही जो बच्चा लिए घूम रहे हो वह भी तुम्हारा न होकर

किसी ड्रग्स पार्टी की पैदावार है। दम मारो दम… कोई किसी मा..ले, जान से भी, मुक्त है।
अरे डारेक्टर करन,भट्ट,अनुराग कश्यप जैसे लोग हीरोइन बनाने की कीमत हेरोइन पिलाते है बाकी भी…

लेकिन अनुराग कश्यप metoo में नहीं आता क्योंकि सेकुलर वामपंथ में दुस्साशन का ही दुस्साहस चलता है द्रौपदी को पांडवों के सामने नंगा होना पड़ता है।

यह पूरी माया नगरी चीर हरण पर धृतराष्ट्र बनी है। जिसकों मरना है वह चक्रव्यूह तोड़ने की हिमायत करें।

पुत्र💥 गांगेय

पुत्र की परिभाषा है जो पुन्नाम नामक नरक से तार दे वह पुत्र है। पूत शब्द में यही दो शब्द लिए गये है। मनुस्मृति में 12 प्रकार के पुत्र बताये गये है औरस,क्षेत्रक,दत्तक,गूढ़ोत्पन्न,अपविद्ध,
कानीन,सहोदढ़,क्रीत,पुनर्भव,स्वयदत्त और शौद्ध।
औरस पुत्र जो अपनी पत्नी से जन्मता है। मनु ने इसे श्रेष्ठ कहा है।

गरुण पुराण में कहा जाता है कि
“पुन्नाम नरके तारते इति पुत्र:”

जो माता-पिता को पुन्नाम नामक नरक से तार दे वही पुत्र है। गरुण पुराण में पुत्र तीन प्रकार के बताये गये है उत्तम,मध्यम और निम्न। उत्तम को सुपुत्र,मध्यम पुत्र और निम्न कुपुत्र भी कहा जाता है।

पुत्र कुपुत्र तो क्या धन संचय।

आज कल इन तीन पुत्रों में और तीन पुत्र जुड़ गये है “बेटा” जो बांट के ले ले। “लड़का” जो लड़ के ले ले। अंतिम अंग्रेजी पुत्र ‘Son’ जो आपको सड़ा दे;आपकी इच्छाओं को मार डाले। यह तीन व्यवहारिक परिभाषा है।

शास्त्रों में चार प्रकार के पुत्र का वर्णन मिलता है
ऋणानुबंध, शत्रु,उदासीन और सेवक पुत्र इसमें सेवक पुत्र को श्रेष्ठ कहा गया है।

महाभारत के अनुसार ‘ज्येष्ठ’ सबसे बड़े पुत्र को कहा जाता है। भारतीय समाज में ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व प्रथम संतान के रूप में पुत्र की आशा रखता है। शास्त्र कहते है
प्रथमो पुत्र: धर्मतो जाय:। बाकी संतान तो काम का प्रतिफल होती है।

पुत्र वही है जो माता-पिता को भौतिक सुख के साथ आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति करा दे। जो उनकी इच्छाओं को जान कर कार्य को पूर्ण कर दे। माता पिता के सुख के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दे। पंच ऋण में सनातनी पुत्र के पैदा होने से ही पित्र ऋण से मुक्त हो जाता है। पुत्र में स्वार्थ से हट कर धर्म की कामना की गयी है इस लिए भारतीय समाज पुत्र के जन्म पर हर्षोल्लायित हो जाता है।

रामायण में मेघनाद से जब पूछा जाता है कि पिता के लिए नारायण से बैर क्यों जबकि जानते हो कि राम स्वयं नारायण है। मेघनाद- मैंने राम से ही शिक्षा ली है पिता के लिए सर्वस्व अर्पित कर देना चाहिए।

अब यह आप पर है कि कौन सा पुत्र बनते है और कैसे पुत्र धर्म का पालन करते है क्योंकि पुत्र,पिता और पित्र बनने में ज्यादा समय नहीं लगता।

मंदिर और मनुष्य •••∆∆∆∆

सनातन हिन्दू धर्म में मंदिर को देवालय,
देवतयन,देवगृह,प्रासाद आदि कहा जाता है। मन्दिर वास्तुकला की दृष्टि से मनुष्य के आकार को आधार मान कर निर्मित किया जाता है।

मंदिर के कई अंग होते है विमान ,शिखर,कलश मंडप,अर्द्धमंडप,प्रदक्षिणापथ,गोपुरम,नृत्यमण्डल और मंदिर की आत्मा गर्भगृह, जहाँ भगवान विग्रह के रूप स्थापित रहते है।

देव पूजन का विधान वैदिककाल,रामायण युग और महाभारत युग में भी हमें रामायण
,महाभारत,वेद आदि से मिलती है। राम-सीता द्वारा पूजन हो पांडवों का अपने कुल देवता का पूजन हो या भगवान कृष्ण द्वारा अपने कुलदेव की पूजा रही हो।

मंदिर ध्यान,उपासना,पूजा,अर्चना के स्थल के रूप में है। मंदिर का जीवंत सम्बन्ध भारतीय संस्कृति से है। हिन्दू धर्म के अलावा उसके पंथ बौद्ध,जैन और सिख में इसका प्रचलन है।

मुख्यतया मन्दिर की तीन शैली प्रसिद्ध है उत्तर भारत में नागर शैली,दक्षिण में द्रविण शैली और विध्य से लेकर उड़ीसा तक वेसर शैली का प्रचलन रहा है।

प्रचलित इतिहास में मूर्तिपूजा मथुरा से मानी जाती है। मंदिर का स्वर्णिम युग गुप्त काल को माना जाता है जिसमें झांसी का ईटो का दशावतार मंदिर,गाजीपुर के भीतरीगांव का मंदिर आदि-आदि।

भारत में मंदिर बहुत भव्यता के साथ बनाये जाते रहे है जिसमें लगता है पत्थर की मूर्तियां स्वयं ही बोल पड़ेंगी । मूर्ख मूर्तिपूजा का आरोप सनातनियों पर लगाते है, बिना संस्कार और विज्ञान को समझे।

हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियां दक्षिण अफ्रीका से लेकर मैक्सिको,तुर्की,कंबोडिया,जापान,
कोरिया,होंडुरास,यूरोप,कंबोडिया,थाईलैंड,मलेशिया,ईरान,इराक,वियतनाम,चीन और इंडोनेशिया आदि देशों से शिव,गणेश,हनुमान,राम आदि की प्राप्त हुई है।

गुहा मंदिर अजंता,एलोरा,एलिफैंट,बाघ,उदयगिरि और अफ्रीका से लेकर होंडुरास में जो मूर्तिया मिली है,वह पुरातत्ववेत्ता के लिए आश्चर्य का विषय है।

भारत के लोगों को तोड़ने के लिए बाहर से आये बर्बर मुस्लिमों ने मंदिर पर आक्रमण करके उसे नष्ट भ्रष्ट किया। इसी तथ्य को भारत के इतिहास में इतना तोड़ा मरोड़ा गया कि हिन्दू को हो दोषी ठहरा दिया गया।

अयोध्या,काशी,मथुरा,कोणार्क,सोमनाथ,अटालामोढ़ेरा,कश्मीर,पाकिस्तान ,धार आदि के मंदिर को बार-बार तोड़ा गया। कई जगह मुस्लिम सुल्तान बार-बार कई वर्ष तक नष्ट करते रहे फिरभी नष्ट नहीं कर पाये। मुस्लिम एक बर्बर समुदाय है। वही बात ईसाई की जाय तो वह भारत भर में धर्मांतरण के साथ गिरजाघर का निर्माण करता चला आया है।

विचार करिये जिस देश की धर्म पताका पूरे विश्व में फहराई है वह आज अपने ही घर में सिकुड़ती जा रही है उसकी नई पीढ़ी अपना इतिहास नहीं जानती तो कैसे मंदिर पर कुछ कह पायेगी? वह मूर्ति पूजा के पक्ष में तर्क देगी?

हे कृष्ण हे माधव🙏♨️

देख रहे है प्रभु संसार की हालत कोरोना कहर के बीच चीनी घुसपैठ,मौसम लगातार रंग दिखा रहा है। जगन्नाथ जी के झंडे में आग लगने। भारतीय तटवर्ती क्षेत्र में लगातार तीन समुद्री तूफान,कई भूकम्प के झटके। कई बार प्लेन रनवे से फिसल गया।

टिड्डी दल ने भारत में दस्तक दी जो किसानों के लिए दुःखद रहा। राजधानी में द्रोही CAA के खिलाफ धरना दिया परिणाम दिल्ली दंगे की साजिश आतंकवादियों ने अंजाम दिया।
फैक्ट्री में विस्फोट से लेकर,नक्सली हमले हुये,कश्मीर में आतंकवादियों को लगातार हूरों के पास पहुँचाने का क्रम जारी रहा है।
और हाँ वासुदेव कई रामद्रोही सड़ रहे है उन्हें सम्मानित मौत का इंतजार है।

हिंदुओं के लिए मुरारी!सबसे बड़ी प्रसन्नता लेकर कर आया अयोध्या में श्रीराममंदिर का शुभारंभ।
प्रभु अभी काशी का विश्वेश्वर मंदिर और स्वयं की जन्मभूमि पर म्लेच्छ कब्जा जमाएं है।
विधर्मी लगातार सत्ता सुख लेकर आज बहुत जोर का खिसिआया है। उसके बोल शत्रु देश जैसे है या कहे शत्रु जैसे और शत्रुओं के मनोबल बढ़ाने वाले है।

हे नारायण!भारत के अर्थशास्त्री ,अर्थव्यवस्था को लेकर इतना चिंतित है उसे विश्व की परिस्थिति नहीं दिख रही है जैसे सेकुलर इतिहासकारो को भारत के इतिहास में सनातन तत्व नहीं दिखाई दिया उसने झूठ के गुब्बारे को ही फुला दिया जो कभी भी फूटने वाला है।

जानते है केशव!धर्मद्रोहियों में इस समय बहुत छटपटाहट है कल तक जिसने श्रीराम को काल्पनिक कहता था अब वह राम सबके है कहता है। प्रभु सूर्पणखा,पूतना का संहार कब तक कलयुग में हो जायेगा क्योंकि इनकी तादाद में वृद्धि जारी है।

हे चक्रधारी!आपकी माया को समझना कभी आसान नहीं है। मूर्ख शिशुपाल,दुर्योधन और
कंस की तरह है जो जगतपति को सत्य न मानकर उसकी माया में लिपटा है। हे जनार्दन सबके बाद भी एक आस है कि आप सब सही कर देंगे।

हे द्वारकाधीश आप गीता में कहते जो होता है वह आपकी इच्छा मात्र से ,एक करनकरावन हार आप है इतने कालनेमि का क्या काम?

हे देवकीनंदन विनाश को आज विकास कहते है जिसमें तुम्हारे जीने से हम मरते है तुम मर जाओ।
जीव को जीभ का स्वाद बना रहे है। चमगादड़ को चीन ने ऐसा खाया कि पूरा विश्व उसका खामियाजा भुगत रहा है कोरोना नामक संक्रामक बीमारी इसी का एक रूप है।

हे कृष्ण!एक दिन वह समय आप लायेंगे जब विश्व सनातन झंडे के नीचे एकत्र होगा और आंनदित भी । धर्म से भटके लोगों के लिए यही सबसे बड़ा पश्चाताप होगा।

श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी 💥
हे नाथ नारायण वासुदेवाय🙏

श्रीराममंदिर और अयोध्या ★

यू तो मंदिर के लिए तरह-तरह के विचार चिरकुट टाइप के विचारक दे रहे है। फला को पूजन शामिल करिये, फला ताला खुलवाया ,फलाने बाबरी ढांचे को नष्ट होने दिया आदि- आदि। इनको मंचासीन करिये ,इन्हें दर्शक दीर्घा में स्थापित करिये।-तिथि-मुहूर्त का विवाद । चहु ओर श्रेय लेने की होड़ मची है।

मंदिर का इतिहास कहता है कि द्वापर में भगवान #कृष्ण ने पुनरस्थापना की था। कलयुग में महाराज #विक्रमादित्य ने भव्य श्रीराममंदिर की पुनरस्थापना की । आगे समय समय पर मंदिर बनता रहा है। एक प्रकार से 1526 में बर्बर बाबर के भारत के आगमन के पूर्व मंदिर त्रेता से कलयुग तक शाश्वत तरीके चलता रहा है।

आक्रमणकारी मुस्लिमों के भारत आगमन से मंदिर जो सिर्फ अर्चना के केंद्र न होकर समाज की गतिविधियों के भी केंद्र थे, नष्ट किये गये जिसमें लगभग 3000 मंदिर शामिल है।

राममंदिर का संघर्ष विजय श्री के साथ पूर्ण हुआ है जिसके क्रम को कोठरी बंधु सहित कितने वीर आहूत हो गये। वह काला बंदर भी याद आता है जब अयोध्या में मुलायम सिंह यादव द्वारा गोली चलवाने जाने पर उन्हें गोली लगी तो श्री राम पताका काला बंदर ले कर चला गया। लोगों ने काले बंदर को हनुमानजी से जोड़ कर देखा।

इतना लंबा 500 वर्षों का संघर्ष कोई राजनीति यदि करता है तो करें ,हमें मंदिर से काम ,रामलला विराजित हो रहे है। विश्व की सबसे प्राचीन राजधानी आयोध्या एकबार पुनः राम के आधीन होगी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी ने संसद में कहा था कि जिसदिन पूर्ण बहुमत हमारा होगा हम मंदिर बनवा देगें। मोदी के 6 वर्ष में मंदिर का कार्य पूर्ण हो रहा है।

आप यदि अयोध्या गये हो तो मुस्लिम के कुकर्म दिख जायेगे। हनुमान गढ़ी,सीता रसोई,दशरथ दरबार, भरत स्थल के इर्दगिर्द कब्रें बना रखी है।
मुस्लिम का अरमान श्रीराम के जन्मस्थल को मक्का के तरीके का कब्रिस्तान बनाने का रहा है। जो कभी पूर्ण नहीं हुआ। श्रेष्ठ धर्म आचरण से बनता है मंदिर को मस्जिद बनाने से नहीं।

हिन्दु समय – समय पर अयोध्या का #रक्तस्नान करता रहा है जिसका प्रतिफल है भव्य राममंदिर। यह विश्व के पुराने विवाद में से एक था। जिसे भारत की न्यायपालिका ने बहुत शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया। इसके लिए पूर्व न्यायाधीश वर्तमान राज्यसभा सांसद गगोई जी कोटि कोटि धन्यवाद के पात्र है ।

राममंदिर राजनीतिक इच्छाशक्ति की बात रही है। कांग्रेस को बहुत अवसर मिले किंतु वह स्वयं ही अड़ंगा डाल रही थी क्योंकि उसकी सेकुलर राजनीति में मुस्लिम बहुत बड़ा फैक्टर है जिसे वह मंदिर निर्माण से नाराज नहीं करना चाहती । नेहरू,इंदिरा,राजीव, और सोनिया के पास अवसर थे लेकिन मामले को इन्होंने और लंबा खींचा। इन्होंने सरकारी वामपंथी इतिहासकारो का प्रयोग कर राम के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे थे। वह राममंदिर बनाने जायेगें?

इंदिरा गांधी पर गौर करिये जिन्होंने स्वर्ण मंदिर पर टैंक चढ़ा दिया। राज्य की सरकारें उन्ही की मर्जी पर चलती थी उनके लिए राममंदिर का निपटारा कराना बड़ी बात नहीं थी। किन्तु वह उस मार्ग से होकर आती है जहाँ अहिंसा की बातें होती है लेकिन बकरीद पर हलाल होते निरीह बकरे हिंसा की दृष्टि में नहीं आते।

कुछ कांग्रेसी कहते है राममंदिर में कांग्रेस की महती भूमिका रही है तो प्रश्न खड़ा होता है कि काशी,मथुरा के मंदिर पर इन्होंने कितना काम किया है? श्रीराममंदिर के लिए विश्व हिंदू परिषद की भूमिका सराहनीय रही है 1983 से जिस तरह बढ़-चढ़ कर अशोक सिंहल जी कार्य किया। वह कबीले तारीफ है शिलान्यास से लेकर बाबरी ढांचे के ढहने तक ।

रामलला का मंदिर, सिर्फ एक मंदिर ही नहीं है वरन यह हिन्दु स्वाभिमान,भारत के पहचान,भारत के आदर्श का स्थान है। हिन्दू 5 अगस्त 2020 के बाद एक दूसरे तरह का विश्व में नजर आयेगा। वामपंथी मंदिर पर अर्थव्यवस्था और लाभ हानि समझा रहे है। ये मूर्ख वर्ग हित से ज्यादा स्वहित पर कपड़े फाड़ रहे है ,हो भी क्यों न वर्षों की दुकान अब टूटती नजर आ रही है।

हे राम सबको सुमति दे🏹

समाजवाद तक…

नमाजवादी पार्टी अब भगवान परशुराम और स्वतंत्रता का शुभारंभ करने वाले मंगल पांडे के सहारे ब्राह्मण राजनीति करेगें! बुद्धि-शुद्धि करिये इनके पाप राममंदिर से लेकर,सैफई नाच तक बहुत किये है । अब यादव- मुस्लिम गठजोड़ का क्या होगा ? कांग्रेस और BSP के सहारे सत्ता का स्वप्नदोष वाले अब ब्रह्म राजनीति का ख्वाब पाल रहे है😊

जब सत्ता में थे परिवार से 36 नेता थे । बिरादरी की खैर बात नहीं उसी की पीड़ा आज भी स्वजातीयों में हो रही है। अक्ललेश व्यक्तिगत तौर पर ब्राह्मण को गाली देने वाले नेता है। पिछड़ा की राजनीति से अगड़ा का इंजन फिट करने की जुगत। जो व्यक्ति कभी चाचा,पिता और बड़े का सम्मान न सीख पाया। मंच से धक्का दे दिया।

लगातार तीन चुनाव महागठबंधन के बाद बुरी गत होना। अहंकार हिलोरे 300 सीट तक गया जो अब बढ़ कर 351हो गया। नेता की जमीन क्या है नेता किसे कहते है? जैसे साधरण सी परिभाषा न जान पाया हो वह सर्वसमाज कैसे जानेगा।

हिस्ट्रीशीटर पिता नेताजी के विरुद लोन पर ले आये,जिनकी विरासत की मौज 5 साल उड़ी।अब आगे का कैसे हो। सैफई का नाच उत्सव जैसा समाज नहीं है जातिवाद और वंशवाद की राजनीति के दिन पूरे हो चुके।

समाजवादी की हालत यह है कि 2 साल किसी के साथ नहीं रहते वही 1 साल दूर भी नहीं रह पाते। जो नेता जमीन पर काम करेगा उसे बहुत जोड़- तोड़ की जरूरत नहीं है। लोकतंत्र में कभी अपने को राजा नहीं समझना चाहिए । सत्ता चढ़ाने की शक्ति जनता में है जिसे चिढ़ाने का कार्य किया जाता है तुम उसके वोटर हो वो मेरे वोटर है ।

खैर खून खासी खुशी वैर पीत मदपान।
रहिमन दाबे न दबे जानत सकल जहान।। ✍️

श्रीराममंदिर और बाबरी विवाद

सुप्रीमकोर्ट के निर्णय पर 5 अगस्त से मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। इसी श्रीराम मंदिर के लिए हिंदुओ ने पिछले 500 वर्ष तक संघर्ष किया । कुल 36 युद्ध लड़े जिसमें लगभग 1 लाख से अधिक हिन्दु वीरगति को प्राप्त हुये।

मंदिर के इतिहास में हिंदुओं के रक्त से कई बार अयोध्या लाल हुई है आखिर बार 1990 में मुलायम सिंह द्वारा कारसेवकों पर गोली चलवा कर लाल किया था, यह गोली जमीन से लेकर हवा में हेलीकॉप्टर से चलायी गई। हिन्दू जमीन पर खून से लथपथ जरूर गिरा लेकिन उसकी दृढ़ता खड़ी रही है जो अब साकार हो रही है।
……………………….

सुप्रीमकोर्ट में मुस्लिम पक्षकार ने कहा राम चबूतरा था, फिर कहा नहीं था। बाबरी ढांचे के लिए पक्षकार ने कहा कि यह ईदगाह पर बनी थी अगले दिन कहा कि यह समतल मैदान पर बनी थी। कोर्ट में बाबरी पक्षकार सिर्फ खीझ दिखाते रहे ,सबूत कपोल-कल्पित ही रहे। अयोध्या से मुस्लिम का क्या काम वह तो विवाद के लिए था।

कोर्ट में कहा गया कि बाबर ने कोई मंदिर नहीं तोड़ा था। जिस जगह बाबरी ढांचा खड़ा था उस जगह से हिंदुओं का कोई सर्वकार नहीं है।
1949 गर्भगृह में रामलला के प्राकट्य से स्पष्ट हो गया कि रामजी की जन्मभूमि यही है। जिसका सबूत उस समय तैनात मुस्लिम सिपाही ने भी दिया।
★★★★★★★★★★★

स्वतंत्रता के बाद सत्ता काले अंग्रेज को मिली, जिसकी धर्म में आस्था नहीं थी वह अंग्रेजों को लम्बरदारी में गर्व महसूस करता था।

जब देश का बटवारा धर्म के आधार पर होगया तो मुस्लिम को देश में रोकने औचित्य नहीं रह जाता। सेकुलरिज्म का छद्म विचार धारण करने की क्या जरूरत थी ? सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस्लाम का सम्बंध अयोध्या,मथुरा,काशी,
उज्जयनी,सोमनाथ से क्या था ?

इतिहास में दर्ज बर्बर मुस्लिमों के आक्रमण जिसमे मंदिर तोड़े गये महिलाओं की अस्मत को तार-तार किया गया। इसके बाबजूद पूरे मध्यकालीन इतिहास में अरबी,गुलाम,मुगल ही हावी रहे है उनके चरित्र को गढ़ने में सेकुलरिज्म शासन और इतिहासकार की महती भूमिका रही है।


तुर्की की 1500 साल पुरानी हागिया सोफिया जो मूलरूप से चर्च था मस्जिद बना , लाइब्रेरी अब पुनः मस्जिद बना दिया गया। यह है इस्लामिक देशों की हकीकत, मुस्लिम की सेकुलरिज्म अब कहा गयी। इसी तुर्की के खलीफा के लिए 1920 में खिलाफत आंदोलन भारतीय मुस्लिम ने चलाया था । यह दूसरे के मंदिर ,चर्च में मीनार बना और थोड़ा बहुत परिवर्तन करके इसे अल्लाह के इबादत का स्थल घोषित कर लेते है।

इराक के पूर्व मुस्लिम तानाशाह सद्दाम हुसैन ने कहा था कि जहाँ तक मैं जानता हूँ भारत के ईमाम,अल्लाह ‘राम’ है जो करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र है भारतीय मुस्लिम रामजन्मभूमि पर नाहक विवाद पैदा कर रहा है। जो कुरान के रास्ते से भी अलग है। कुरान कहती है कि विवादित स्थल पर की गयी इबादत को अल्लाह स्वीकार नहीं करता है।

भारत का मुस्लिम सेकुलरिज्म का हिमायती है वह भी हिन्दू कीमत पर। यदि सेकुलरिज्म और भाई चारे की उसे जरा भी परवाह होती तो वह गलती स्वीकार करता और बड़ा ह्रदय दिखाकर अयोध्या,मथुरा ,काशी आदि पर अपना दावा छोड़ देता।
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सुप्रीमकोर्ट ने जो निर्णय दिया उसमें पांच न्यायाधीश में एक मुस्लिम अब्दुल नजीर थे जिन्होंने भी सर्वसहमति से अपना मत भी हिंदुओं के मंदिर के पक्ष में दिया।

2003 के विवादित स्थल से खुदाई करा के पुरातत्वविदों द्वारा इकट्ठा किये गए अवशेष भी मंदिर की पुष्टि की है।

सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के बाद भूमि के स्थलीकरण में पुरातात्विक अवशेष जिसमें हिंदु स्थापत्यकला निर्माण जिसमें कमलपुष्प,आमलक,9 फीट शिवलिंग के मिलने से रोमिला थापर, हबीब जैसे इतिहासकरो कि हकीकत को उजागर करते हुए मंदिर होने के साक्ष्य की पुष्टि की।
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राममंदिर का बनना वामपंथियों की सबसे बड़ी पराजय है। वह मुस्लिम पक्ष की जगह बौद्ध तथ्य को इसमें शामिल करने का प्रयास किया। साकेत नगरी,सम्राट अशोक के स्तंभ से शिवलिंग की साम्यता आदि-आदि। कुछ नहीं मिला तो तिथि विवाद,करोना गाइडलाइंस पर सुप्रीम दौड़े जहाँ से भगा दिया गया।

वास्तविकता भारतीय मुस्लिमों को भी पता है बाबरी की, किन्तु वह कोई सेकुलर नहीं है यह एक मजहबी कट्टरपंथी समुदाय है जिसमें मौलवियों ने कह दिया, वही इस्लामिक आईन बन जाता है।

यदि विवाद को खत्म किया जाना होता तो जिस समय देश को स्वतंत्रता मिली, देश धर्म के नाम पर बट चुका था । इस्लाम के पैरोकार मार-काट, दंगो पर आधारित रक्तरंजित पाकिस्तान ले चुके थे। उसी समय अयोध्या,मथुरा,काशी मंदिर का प्रस्ताव संसद में पास कर , बना दिया जाता।
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सेकुलरिज्म के हिमायती सोमनाथ मंदिर बनने का विरोध कर रहे थे वह कैसे अयोध्या,
काशी और मथुरा की पैरवी करते । विवाद जिंदा था मुस्लिम थोक वोट कांग्रेस की झोली में था। परिवार को पीढ़ी दर पीढ़ी चांदी की चम्मच में प्रधानमंत्री पद से बेहतर क्या मिलता?

जिन्होंने सरकारी इतिहासकारों को “राम” को ही काल्पनिक बनाने पर लगा दिया। जैसा कि मनमोहन सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा लगाया कि राम काल्पनिक पात्र हैँ।

स्वतंत्रता के बाद मुस्लिम से ज्यादा, शासन व्यवस्था मंदिर नहीं बनने देने के पक्ष में रही है ।
राजीव सरकार शाहबानों मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटकर हिन्दु तुष्टिकरण में अयोध्या में ताला खुलवाया था। साफ्ट हिंदुत्व के मसीहा बनने की जोड़ में नरसिंहाराव ने विवादित स्थल को कारसेवकों द्वारा गिराने में बाधा नहीं बने । जबकि पूरी कांग्रेस सरकार इसके खिलाफ थी। इसी कारण सोनिया गांधी ने कभी नरसिंहा राव को माफ नहीं किया।
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लड़की वाला और जनता मूर्ख लगती है पर होती नहीं है। उसे बेहतरी पता होती है। 80% हिन्दुओं वाले देश में स्वतंत्रता के बाद मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट के निर्णय का इंतजार किया गया। न कि पाकिस्तान की तरह , राजधानी इस्लामाबाद में बन रहे पहले कृष्ण मंदिर को सरकार ने मौलवियों के दबाव से बनाना कैंसिल कर दिया। जिसकी दीवार को मौलवी प्रेरित लोगों ने गिरा दिया। यह होता है बहुसंख्यक।

भारत में सेकुलरिज्म सत्ता का फंडा रहा है जिसकी हिमायत सब करते है किंतु संविधान इसकी स्वीकारोक्ति नहीं देता । इंदिरा ने इमरजेंसी के समय 1975 में सेकुलरिज्म शब्द को घुसा दिया। धर्म की गुणा- गणित की राजनीति चालू है।

बाबरी ढांचे के इतिहास की धूल लिए कभी शौचालय,धर्मशाला ,हॉस्पिटल के हिमायती आज मंदिर विचार के इर्द गिर्द जमा हो रहे है।
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