समाजवाद तक…

नमाजवादी पार्टी अब भगवान परशुराम और स्वतंत्रता का शुभारंभ करने वाले मंगल पांडे के सहारे ब्राह्मण राजनीति करेगें! बुद्धि-शुद्धि करिये इनके पाप राममंदिर से लेकर,सैफई नाच तक बहुत किये है । अब यादव- मुस्लिम गठजोड़ का क्या होगा ? कांग्रेस और BSP के सहारे सत्ता का स्वप्नदोष वाले अब ब्रह्म राजनीति का ख्वाब पाल रहे है😊

जब सत्ता में थे परिवार से 36 नेता थे । बिरादरी की खैर बात नहीं उसी की पीड़ा आज भी स्वजातीयों में हो रही है। अक्ललेश व्यक्तिगत तौर पर ब्राह्मण को गाली देने वाले नेता है। पिछड़ा की राजनीति से अगड़ा का इंजन फिट करने की जुगत। जो व्यक्ति कभी चाचा,पिता और बड़े का सम्मान न सीख पाया। मंच से धक्का दे दिया।

लगातार तीन चुनाव महागठबंधन के बाद बुरी गत होना। अहंकार हिलोरे 300 सीट तक गया जो अब बढ़ कर 351हो गया। नेता की जमीन क्या है नेता किसे कहते है? जैसे साधरण सी परिभाषा न जान पाया हो वह सर्वसमाज कैसे जानेगा।

हिस्ट्रीशीटर पिता नेताजी के विरुद लोन पर ले आये,जिनकी विरासत की मौज 5 साल उड़ी।अब आगे का कैसे हो। सैफई का नाच उत्सव जैसा समाज नहीं है जातिवाद और वंशवाद की राजनीति के दिन पूरे हो चुके।

समाजवादी की हालत यह है कि 2 साल किसी के साथ नहीं रहते वही 1 साल दूर भी नहीं रह पाते। जो नेता जमीन पर काम करेगा उसे बहुत जोड़- तोड़ की जरूरत नहीं है। लोकतंत्र में कभी अपने को राजा नहीं समझना चाहिए । सत्ता चढ़ाने की शक्ति जनता में है जिसे चिढ़ाने का कार्य किया जाता है तुम उसके वोटर हो वो मेरे वोटर है ।

खैर खून खासी खुशी वैर पीत मदपान।
रहिमन दाबे न दबे जानत सकल जहान।। ✍️

6 thoughts on “समाजवाद तक…

  1. राजनीति सभी पार्टी की निम्न स्तर की हो गई जिस प्रदेश में जनता बहुत गरीब है उस प्रदेश के नेता भी करोड़पति हैं। इन सब नेताओं में एक कुशलता है ये जनता को अपने वोट के लिए बांट देते हैं और हर नेता किसी भी पार्टी का हो ऐशो आराम से रहता है अपना सेकुरिटी में रहने वाला जनता की क्या सेवा करेगा।जनता को आपस में लड़वाएगा और राज्य करेगा।

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    1. लोकतंत्र एक मूर्खतंत्र है इसमें जनभावनाओं से खेल कर सत्ता परिवार को सौप दी जाती है। भ्रष्टाचार रोक कैसे लगे हमाम में सब नंगे है।

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  2. लोकतंत्र जनता की पावर है जहां जब तक चाहा जिसको छह उसे जनता ने चुना मोदिजी भी मुरखतन्त्र से नही लोकतंत्र की महिमा से ही आए और इस से पहले भी लोकतंत्र से ही आए।बिना चुनाव जीते केवल राज्य सभा तक पहुंचे ।अमितशाहजी को भी चुनाव लड़ना पड़ा। लोकतंत्र अर्थात जनता द्वारा चुना जाना।

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    1. जम्हूरियत वह सिला है जहाँ सिर तौले नहीं गिने जाते है। समानता का आलम यह है कि किसी को घसीट के बराबर किया जाता है तो किसी बेड़ियों में बांध के। भारत का लोकतंत्र जुगाड़ का लोकतंत्र है जनता की पावर को दारू की एक शीशी पलट देती है😜

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      1. सही कहा आपने। हमारे मन्दिर मस्ज़िद में भगवान अल्लाह locked डाउन में कई महीने बंद रहे और श्रीगणेश मंदिरालय से हुआ। 😄

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