जब राजनीति बदचलन और झूठी है तब न्याय कैसे मिलेगा। ये अंग्रेजी वाला न्याय शास्त्र जो सीधे इंग्लैंड से लाद लाये। वह भारत को न्याय कैसे देगा। मैकाले कहता था कि भारत के समाज से सबसे पहले न्याय व्यवस्था को खत्म करना है।

जब न्याय की बारी आती है तुम जाति,
प्रजाति,सम्प्रदायिक चश्में चढ़ा लेते हो।

वह स्त्री को न्याय कैसे देगा? न्याय के पूर्व उसकी पूरी स्थिति समझी जाती है। जैसे वह
अल्पसंख्यक है कि नहीं,दलित है कि नहीं ,
अपराध करने वाला सवर्ण समाज ब्राह्मण,ठाकुर से ताल्लुक रखता है नहीं, आदि-आदि।

यदि यही अपराध दलित- मुस्लिम द्वारा सवर्ण पर किया गया है तो उसे उस तरह के अपराध की श्रेणी में शामिल नहीं किया जायेगा। क्योंकि यह सेलेक्टिव सोच में फिट नहीं बैठती न ही नैरेटिव की आगे बढ़ा पायेगी । जैसे मुम्बई की मायानगरी में फ़िल्म में एक गरीब अभिनेता न्याय के लिए संघर्ष करता हुआ। वही दबंग ठाकुर एक दबे कुचले वर्ग की लड़की का रेप करता है,उसका सलाहकार ब्राह्मण है ।

ऊपर से वर्षों से उस गरीब परिवार को सूद तले दबाते सेठ जी भी है । इस स्क्रिप्ट पर फ़िल्म की कहानी चटकारे दार बनेगी।उसका प्रभाव समाज में जायेगा। फिर कही किसी साधु और पुजारी को जला के मारा जायेगा।

कुल जमा समाज में पूर्वाग्रह उसी तरह बैठाया गया है जैसे अंग्रेज उद्धारक थे। मुस्लिम भारत का विकास करने आये थे उन्होंने कोई मंदिर नहीं तोड़ा न ही समाज को प्रताड़ित किया। वह तो सेकुलिरिज्म में बहुत पहले विस्वास करते थे। इसी को आगे बढ़ाने के लिए गंगा-जमुनी संस्कृति की शुरुआत की।

इस्लाम जो पूरे विश्व में धर्म के नाम पर तबाही मचाये है वह भारत में गीत गाता है “पीड़ पराई जान ले।” दलित,अल्पसंख्यक,पिछड़ा कहना राजनीति में सफलता की गारंटी है । जिसका सहारा बड़े से लेकर टुच्चा नेता करता है।
गांधी जी हिन्दू उसे कहते थे जो दूसरे की पीड़ा जानता है।

लुटियंस गिरोह की नजर में हिन्दू आतंक और पर को पीड़ा देने वाला धर्म। स्वच्छंद वेश्यायें समाज सुधारक बनी है उच्चश्रृंखल पुरुष नीतिकार।

अब कैसे करेंगे समाज तैयार !
जब कि जाति बना दिया गया राजनीति में हथियार। मानवता का पाठ विश्व को सीखाने वाला सेकुलरों को आतंकवाद की पाठशाला नजर आता है। वास्तव में विश्व को आतंकवाद देने वाला शांतिकौम बन जाता है क्योंकि सत्ता की सीढ़ी उसके वोट से जो चढ़ जाता है।

हिन्दु को दलित,महादलित,पिछड़ा,अत्यन्त पिछड़ा,सवर्ण में बांटा जाता है क्योंकि यह लोकतंत्र है दोष ब्राह्मण पर लगाया जाता है।

कोई इन गिद्दों से नहीं पूछता 70 साल में तुम क्या कर पाएं ? शिक्षा को तुम ऐसा बना दिया छोटी-छोटी बच्चियों में वासना दिखने लगी। नारी का शोषण दिल्ली-मुम्बई में होने लगा। उन आदिवासी,ग्रामीण क्षेत्र में जहाँ नग्न हो नहाती है वहाँ उनकी इज्जत बची है क्योंकि तुम्हारी विदेश वाली सीख अभी नहीं पहुँची है।

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