परिवार -टूटते रिश्ते… गांगेय

भारतीय समाज में भाई के रिश्ते को बहुत मजबूत माना जाता है। किंतु इस समय सबसे बड़ा टकराव भाई का भाई से है। आपने ने विचार किया है इतनी माधुर्य लिए बन्धु का सम्बंध आज इतनी कडुआहट कैसे पैदा हो गयी?

परिवार का आधार है नारी। यह नारी ,नर को आकार और आधार दोनों देती है। नारी शसक्तीकरण और फेमिनिस्म के चक्कर में भाई-भाई का दुश्मन बन गया। हर घर में कलह का कारण भाई का भाई से सम्बन्ध है। भाई -भाई अलग होने का मतलब है सामूहिक परिवार का एकल परिवार की ओर प्रस्थान। न्यूक्लियर फेमली का आगमन। सब का यही कहना है मुझे कोई झंझट नहीं रखना है अब भाई झंझट होगया है।

भारत ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व में नारी प्रधान समाज रह चुका है लेकिन अन्ततः यही पता चला कि नारी न्याय नहीं कर सकती है वह अपना हित ,अपने सन्तान को तरहीज देगी। वह पति को उसके परिवार से अलग करने के लिए सब कुछ करेगी। साथ ही अपने परिवार से जोड़ने के लिए भी कोई कोर कसर न छोड़ेगी। बात कडुवी है लेकिन सच है।

रामायण,महाभारत से लेकर रूस की क्रांति तक कारण एक नारी का होना। इसके विवाद में जाने की जरूरत नहीं है सिर्फ समझने की कोशिश करिये। जो परिवार भारतीय संस्कृति के आधार पिछले हजारों वर्ष थे उन्हें टूटने में महज 20 वर्ष लगे है। बीस से तीस का दशक बहुत कठिन होने वाला है यह 2090 तक कि सामाजिक रूपरेखा का निर्धारण करेगा। नारी के उत्थान में परिवार की अवनति की ओर चला गया।

जिस तरह परिवार में एक भाई कमाता था पूरा परिवार खाता था। आज पूरा परिवार कमा रहा है लेकिन सुख से कोई नहीं खा रहा है। असन्तोष चहु ओर व्याप्त है। वह नारी भूल जा रही है उसके भी दो बेटे है जो कलह उसके पति के भाइयों में वही उसके पुत्रों के बीच भी होगी। ये नारी की आलोचना का विषय नहीं है बल्कि सामाजिक चिंतन का है।

एकल परिवार में खुशी कितनी है चार परिवार चार कमरें में रह लेता था खुशी खुशी पूरा परिवार एक साथ बैठ के खाता था आज एक ही परिवार न साथ बैठ के खाना बहुत मुश्किल है खुशियां मनाने की बात कौन करें । चार जन सोलह कमरे है। वह कहता है बहुत खुश है! लेकिन कितना है ? वह स्वयं जानता है। मैं,मेरा,हम,हमार है तुम्हारा,तुम,हमसब,हम सबका गायब है। अपने सब सपने हो गये है। अब तो एक चीज है हम तुम हिस्सा बाँट ले और मुक्त हो जाये।

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