मानव और सत्ता का बाजार●◆★

तुम परेशान सत्ता और विपक्ष के लिए हो वह तुम्हें कोरोना दे दिया। परिवार को तोड़ दिया चार रोटी के लिए तुम रेस्तरां पर निर्भर हो गये। हजारों मिठाइयों के बावजूद तुम चाकलेट खा रहे हो। स्नेक के नाम पर तुम जहर और जंक फूड खाकर बीमार पड़ रहे हो…।

तुम लाई,चने,घी चुपड़ी रोटी और तरह-तरह के अनाज भुने,भिगोये और अंकुरित सब भूल गये। ब्रेड,चाउमीन,मैगी आदि पर निर्भर हो गये। तुम्हारे पौष्टिक खाने को कब का रिप्लेस कर दिया गया है तुम्हें खबर नहीं हो पायी। तुम्हें जल्द ही फैक्ट्री वाला चावल,गेंहू,मक्का और आलू खाने को मिलेगा।

खराब खाने का दो फायदा पहला प्रचार के दम पर फूड इंडस्ट्री बना लेना। दूसरा बीमार पड़ने पर मेडिकल इंडस्ट्री विकसित कर लेना । लोकतंत्र के नाम पर चुनाव में हजारों करोड़ खर्च होता है जिसमें सारे हथकंडे प्रयोग होते है फिर भी इसे सबसे अच्छा विचार कहते है क्योंकि इस पर पश्चिम की मुहर लगी है। अरे भाई ये हजार करोड़ किसकी जेब से आता है? तुम वास्तव में मानव का कल्याण चाहते हो तो इस लोकतंत्र को खत्म करो।

जाति, आरक्षण,संरक्षण और नौकरी के नाम तुम सड़को पर लड़ रहे हो क्योंकि लोकतंत्र जिंदा है। एक निरपराध दण्डित नहीं होने का सिद्धांत विष्णु तिवारी के मामले में क्या हुआ।

तुम जातिवाद दूर करने का वादा करके जाति को संवैधानिक बना दिये है ये तुमको खूब फबता है हम आपस में नहीं लड़ेंगे तो नेता की चौधराहट की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अमेरिका और यूरोप विश्व के खाद्य व्यापार पर कब्जा करना चाहता है वह नया वर्ग वीगन फूड लाया गया है शाकाहार का जिसमें मिल्क प्रोडक्ट भी नहीं रहेगा अरे भैया जानवर काट खाने वाले में इतनी दया कहा से आ गयी व्यापार समझिये।

कुछ दिन पहले मांस की जगह एगटेरियन( अण्डा) का प्रयास हुआ था। अब “वीगन प्रोडक्ट” मार्केट में लांच हो रहे है। आर्गेनिक फूड और हाइजेनिक फूड की तरह। इससे नया बाजार मिलेगा कुछ नये अरबपति बनेंगे। तब विचार है तुम रासायनिक उर्वरक को बाजार में क्यों बिकने देते हो। आगे कृत्रिम मांस और अण्डे ,कृत्रिम दूध और पनीर की तरह मिलेंगे।

तुम बाजार और व्यापार को क्या जानोगे मानुष बाबू😶

एक तरफ कल्याणकारी राज्य दूसरी तरफ शराब को लाइसेंस । यदि तुम समझना चाहोगे तो संविधान के दो तीन अनुच्छेद मिला कर साथ पढ़के जज साहब कहेंगे इसका मतलब यह निकलता है।

परिवार टूटने से तुम्हारा समाज टूटा है व्यापार नहीं, वह तो तेजी से बढ़ा है एक चूल्हे से 30 लोगो का कहना उपले-लकड़ी पर बन जाता था अब एक सिलेंडर से एक लोग का खाना चल रहा है चूल्हा,वर्तन,तेल,मसाला आदि आदि अलावा ऊपर से होटल में खाने का चलन । दोस्त इन सबसे तुम कितना खुश हो कभी शायद सोचा नहीं! क्योकि तुम कहते हो समय नहीं है कभी विचार किया आखिर तुम्हारे समय का क्या हो गया? फेमिनिज्म के कारण चार रोटी ,पति-पत्नी के प्रेम का निर्धारक कोई और हो गया। वही बाजार पौरुषवर्धक गोली बेच रहा। तुम अब भी नहीं समझे।

तुम्हारे विचार को कौन बना रहा है? न्यूजपेपर,न्यूजचैलन,फ़िल्म वाले या कुछ राजनेता! इसमें तुम्हारा क्या फायदा है? युद्ध संस्कृतियों का सदा चल रहा है कभी बाजार के नाम पर कभी साम्यवाद के नाम पर । भारतीय तो एक आर्थिक ईकाई या ज्यादा से ज्यादा दर्शक है खेला कोई और खेल रहा है।

हाँ एक चीज शोर मचाने वाला है कि हम सबसे बड़े लोकतंत्र है अमेरिका ,यूरोप आदि इसकी शाबाशी तुम्हे दे रहे है। तुम्हारी मान्यताएं,संस्कृति, धर्म और भाषा सब गुलामी में सनी है क्योंकि उन्होंने लोचा तुम्हारें माइंड में कर दिया है।

तुमने क्या खोया ? परिवार,स्वास्थ्य,रिश्ते,धर्म,संस्कृति
,प्रेम बदले में तुम्हें आधुनिकता और विकास का झुनझुना पकड़ा दिया गया। कम से कम 1000 स्क्वायर फीट में रहने वाले को अब 100 स्क्वायर फिट में 50 मंजिले वाले कबूतर खाने में रखकर आगे एक पार्क बना दिया। नाम दिया “कालोनी”,क्या तुम जानते हो अंग्रेज कालोनी ,उपनिवेश को कहता था। जिसे आज तुम सीना चौड़ा करके अपने को कालोनी वासी ,पॉस कालोनी में रहने वाला बता रहे हो।

ये जो उदारवाद,मानवतावाद,समाजवाद मार्क्सवाद,राष्ट्रवाद आदि देख रहे हो यह सब शासन प्राप्त करने का जुगाड़ है तुम्हारी उन्नति सनातन व्यवस्था में थी जिसे दफन कर दिया गया।

स्वतंत्रता, समानता,न्याय,व्यक्तिवाद के गुब्बारे फोड़े जाते है लेकिन फिर भी तुम दलित,वंचित,पिछड़ा और सवर्ण ही रहते हो । यह डिक्रमिनेशन से बहुत लाभ उन सत्ताधीशों को है। उनके बाद उनका लौड़ा आ जायेगा। तुम्हारे लड़के का खून चूसने। तुम इनके-उनके राजनीतिक विचार को लेकर सिर फुटऔउल करना।

तुम एक चीज सोचों तुम क्या हो ,तुम्हारी उन्नति किसमें है
तुम एक भैतिक ईकाई से जैविक ईकाई बन पाओगे ,क्या तुम खुशियां परिवार के साथ बाट पाओगे या चिप्स,कोलड्रिंक और शराब की पार्टी ही तुम्हारी हकीकत बन गई है। समझ आये तो बताइयेगा तुम कैसा समाज चाहते हो?

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