मेरे राम तेरे राम….

तुम किसको राम कहते हो- राम का मतलब भारत से है अरे मुकुट और धनुष लिए ही नहीं बल्कि मैली सी धोती पहना किसान ,कुर्ता पहना मास्टर या कहे टिफिन लिए ऑफिस जाता वह आदमी जिसे लौटते समय माँ चश्मे,पत्नी की दवाई और बच्चों की किताबें लाना है। इन सबमें राम है।

वैसे तो बहुत से लोगों के मन में राम का जिक्र होते ही भगवा कपड़ा पहने कुछ दिखने लगता है बहुतों को चिढ़ मचती है इसी राम की वजह से उसकी बनी बनाई सत्ता चली गयी। जिस सत्ता रूपी मुर्गी से कुल जमां तीन पीढ़ी निकल गयी थी। ये ससुरा राम को कुदा दिया..।अब लौंडा कौन सा रोजगार ढूढे उसे कुछ आता नहीं सिवा चूतिया बना के कुर्सी पाने के। अरे भाई वह खून से जो पाया है। राम के नाम पर दुकानें चलाने वाले भी हो गये है। ऐसा कुछ नेता जी टाइप के लोग कहते है।

खैर हमें राजनीति से क्या? हम बताते है राम क्या है मेरे लिए…मैं बहुत छोटा था अभी स्कूल जाना शुरू किया था कि बड़े भाई के साथ हनुमान चालीसा गाते-गाते याद हो गई थी । हनुमान जैसे कि हर बच्चे के हीरों बचपन में रहते है,उम्र इतनी थी कि दोनों भाई मिलकर शर्त लगाते थे कि किसका मूत्र आगे जायेगा🙃

राम पर थे ये कहा चले गये। बचपन में ही घर में सुंदरकांडका पाठ शनिवार को घर में होता था। स्कूल से एक दिन आया तो बाबरी टूट गयी ऐसा दादी ने बताया। यह भी कहा कि वहाँ भव्य राम मन्दिर बनेगा। मैंने दादी से पूछा राम को भगवान जी क्यों कहते है। दादी- उन्होंने धर्म की रक्षा की पापी और दुष्टों को दण्ड दिया। मैंने कहा क्या इतने से कोई भगवान हो जायेगा?

दादी- वह भक्तों पर बहुत कृपा करते है वह करुणा के सागर है। मैं- वह कहाँ रहते है क्यों नहीं दिखते है? दादी भक्तों के ह्रदय और सबको ऐसे ही दिखते रहेंगे तो यह बहुत चालक मानव है उन्हें अपने को भगवान सिद्ध करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और मानव नित्य एक सबूत मांगेगा आज के नेता की तरह।

दादी जैसे मुझे मिलना हो राम भगवान से तब क्या करें
दादी-अच्छे काम करो,भगवान को स्मरण करते रहो, दीन दुःखियों की सेवा करों। मैंने कहा कि इसे हम कर सकते है। राम मेरे जीवन-मरण का प्रश्न है तुम्हारे लिए राजनीति हो सकती है।

विवेकानंद जी ने राम के बारे में शिकागो में कहा था कि जब तक भारत में एक पुरुष और एक महिला जीवित है तब तक राम और सीता जीवित है। सीता-राम सदैव सनातनियों के आदर्श है और रहेंगे।

कुछ उच्चश्रृंखल लोगों की वाचालता से राम पर कोई आंच आने वाली नहीं है। इस धरती पर राम पर प्रश्न अब तक सबसे ज्यादा उठे है फिर भी वह हम सबके आदर्श है। गांधी जी ने लोकतंत्र की नहीं रामराज्य की बात की थी। जहाँ सब सुखी रहे मनुष्य तो मनुष्य, कुत्ता भी न्याय पा सके। शेर और बकरी एक घाट पानी पिये।

राम जिसमें रमन और मरण समाहित है सृष्टि का आदि अंत निरन्तर चलता रहता है । वैसे ये तुम्हारी समझ में नहीं आयेगा क्योंकि तुम उदारवादी पंथी हो। राम सहजता और प्रेम का विषय है जो तुम्हारे बस का नहीं है।

मानव की खोपडिया भागती बहुत है वह दानी की जगह ग्राही सिस्टम को जोर से एक्टिवेट किया है उसे सबमें लाभ चाहिए,इसमें क्या फायदा पहला प्रश्न होता है? कुछ कम ऐसे है जिन्हें तुम बिना लाभ के करते हो जैसे नशा,बकैती,सोसल मीडिया इत्यादि। एक बार राम में प्रीति करके देखों ये तुम्हें एक्टिवेट कर देगा। राजनीति करो उसकी पूछ पकड़ के लटके न रहो। तुम्हारे में कुछ जीवित है जो तुम्हे ढूढ़ रहा है तुम हो कि कुछ बाहर ढूढ़ रहे है।

जब अंदर बाहर एक बराबर जब हो जायेगा उस समय तुम्हें समानता,स्वतंत्रता और न्याय के लिए संग्राम की आवश्कता नहीं पड़ेगी।

बिना कारण कुछ नहीं होता इसकी सिद्धि विज्ञान से चाहो तो कर लो।यह विश्वास की तुम हो यह जगत भी है तुम्हें बनाने वाले तुम्हारें माता पिता है तो इस जगत का भी कोई माता पिता भी होगा । उसे ही हम राम कहते है तुम क्या कहते हो?

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