कोरोना और मनोचिकित्सा……

डॉक्टर कम है ,बेड कम है अस्पताल कम है बढ़ता कोरोना, डरते लोग । इस बीमारी की 90 प्रतिशत चिकित्सा अपनी सकारात्मकता है। मन से न डरना है न हरना ,मृत्यु का क्या है वह नियत समय पर आनी है मौत के पहले मौत की भगदड़ न करें।

कोरोना को पहले मन से निकाले, फिर तन से । भारत में डॉक्टर और बिस्तर कम हो सकते है अमेरिका,फ्रांस,इटली में नहीं फिर कम न थे, फिर भी मौत नहीं रुकी। लोगों के इलाज में डॉक्टरों की संख्या संक्रमित होने में तेजी से बढ़ी है।

हो सकता है जितने डॉक्टर है उसमें 20 प्रतिशत आने वाले समय में उपलब्ध रहे है। जिस तरह से संक्रमण की दर बढ़ रही है अभी और बढ़ने वाली है। महाराष्ट्र की तरह सरकार भी जल्द हाथ खड़े कर देगी। तब की स्थिति कितनी भयावह हो सकती है।

Pic भैंसा कुंड, लखनऊ

किसी स्थिति के बावजूद आप को इनर चिकित्सा यानि मन से मजबूत रहना है।

सीमित विकल्प है डरने से काम चलने वाला नहीं है जब तक जरूरी न हो घर को अस्पताल मान कर वही रहे। संघर्ष भूख और बीमारी का साथ ।एक लंबा दौर चल रहा कोविड का जो मानवता की परीक्षा के स्वयं को भी सफल करना है।

कोरोना से कोई 100 वर्ष पहले 1918 में विश्व युद्ध में मध्य यूरोप से लौटे सैनिक अपने साथ स्पेनिश फ्लू नामक संक्रामक बीमारी के लौटे । इसमें बीमारी ज्ञात इतिहास में मनुष्य के लिए सबसे बड़ी त्रासदी लागा ,जिसमें लगभग 2-5 करोड़ लोग मारे गये। स्पेनिश फ्लू में मृत्यु दर 35% तक थी।

स्पेनिश फ्लू का प्रथम विश्व में मरे एक करोड़ लोगों के बाद आया। कितना बड़ा संकट उस समय विश्व पर था। यह बीमारी युवाओं पर ज्यादा खतरनाक थी। यूरोप युवा पुरुष की भारी कमी हो गयी। इसी समय महिलाओं के घर से बाहर निकलने और अन्य विदेशी पुरुष से विवाह का अवसर मिला। क्योंकि यूरोप में नवयुवक असमय ही करोड़ो की संख्या में मर चुके थे।

इतिहास में एक और संक्रामक बीमारी चिकेन पॉक्स-स्माल पॉक्स जिसे भारत में बड़ी माता-छोटी माता कहा जाता है। समय- समय पर अपना तांडव मचाती रही है इस बीमारी ने विश्व भर में 30 करोड़ लोगों की मृत्य का कारण बनी। इसे रेड फ्लू भी कहा जाता है। भारत में इससे गांव के गांव खाली हो जाते थे। संक्रमण को रोकने के लिए अपने मरीज को उसी गांव में छोड़ कर लोग पलायन कर जाते थे।

इसी बीमारी का इलाज चीन में पल्लव राजकुमार बोधिधर्मन ने किया गया। आधुनिक विश्व में 1798 में जेनिंग के टीके के बाद विश्व इस पर विजय पायी।

इन बीमारियों को बताने का मतलब है मनुष्य के समक्ष चुनौतियां सदा रही है वह अपनी युक्ति से उसका सामना निकाला है। मनुष्य के संघर्ष में जीवन संचालित होता है। पीड़ा में रह कर मां सृष्टि का सृजन करती है। मनुष्य की सबसे बड़ी खासियत है वह विपरीत समय में बहुत अच्छा काम करता है।

अतः कोरोना से बचाव रखे ,न कि आतंकित हो। एक बात और जब तक आप जीवित हो दुनिया की कोई ताकत मार नहीं सकती है यदि आप मर गये, दुनिया की कोई ताकत जीवित नहीं कर सकती है। फिर डरना कैसा ? छुआछूत का पालन करें, मास्क और दो गज दूरी बनाएं रखे। घर को मन्दिर और अस्पताल दोनों समझ कर रहें, जबतक जरूरी न हो घर से बाहर न निकलें। " मन के हारे हार है मन जीते जीत"

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