निकाह और अय्याशी 👫

मुता निकाह, मिस्यार निकाह,हुल्ला,खुला…..
मुता निकाह यह शिया मुस्लिम में प्रचलित है,एक समय अवधि के लिए होता है जिसमें अवधि पूरी होने पर निकाह स्वयं खत्म हो जाता है।

मिस्यार निकाह यह शियाओं को सुन्नियों का जबाब है इसे प्रवासी निकाह कहते है ,इसके कारण वैश्यावृत्ति पर रोक लगने का हवाला दिया जाता है। यह दोनों निकाह अय्यासी को पूरा करते है।

अरबी शेख भारत में आने पर कम उम्र की लड़कियों से उनके बाप को पैसा देकर मिस्यार निकाह कर लेते है।

खुला वह कुप्रथा है जिसमें हलाला निकाह करने पर यदि शौहर तलाक नहीं देता है ऐसे में ख्वातून शहर काजी से निहाल खत्म करने की अपील करती है इस्लामी प्रथा के कारण काजी को निकाह खत्म करने का अधिकार है।

सोचने वाली बात है कि कुरान जैसे ग्रंथ वहुविवाह का समर्थन करते है? क्या लगता है अल्लाह इतना जालिम है कि औरतों को बहुविवाह के जहन्नुम में डालेगा। यह कपोल कल्पित और मर्दानी ख्वाहिश है जिसे मजहबी आधार दिया गया है। क्योंकि चरित्र के मामले में मुहम्मद खुद बदनाम थे।

हलाला के कई मामले देखने में आये है जब शौहर अपनी तलाक शुदा बीबी का हलाला निकाह अपने अब्बू से कर देता है। मुरादाबाद,बरेली,बदायूं में ऐसे कई मामले संज्ञान में आये है । कुछ साल पूर्व प्रयागराज की लड़की का निकाह बदायूं में हुआ। शौहर मुम्बई में काम करता है। घर में ससुर ने बलात्कार किया। मुस्लिम पंचायत ने फैसला दिया कि अब बाप ने सम्बन्ध बना लिया है तो वह बेटे की बीबी नहीं रह सकती है इस लिए वह अपने ससुर के साथ रहे।

मुस्लिम समाज की दिक्कत यह है कि उसकी कुप्रथा पर कोई सुधार की बात नहीं होती है। शाहबानो प्रकरण में जब कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलट दिया। मॉडरेट मुसलमान इससे खफा थे क्या जरूरत थी कांग्रेस को ऐसा करने की।

राजीव गांधी के करीबी अरुण नेहरू से पूछा गया कि मुस्लिम में सुधार से कांग्रेस को क्या दिक्कत है। अरुण नेहरू ने कहा कि जो कौम गन्दी नाली में रहना चाहती है उसे ऊपर उठाने की क्या जरूरत है। हमें वोट चाहिए और वह मिल रहा है।

खतना कुप्रथा पुरुषों के साथ ही महिलाओं की भी कुछ देशों में किया जाता है भारत में सुन्नी कहता है कि यह शिया औरतों का होता है शिया कहता है कि सुन्नी औरतों का होता है। भारत में ज्यादा प्रचलन दाऊदी बोहरा शिया समुदाय में है।

यूनीसेफ के अनुसार हर साल 20 करोड़ महिलाओं का खतना किया जाता है। खतना में ब्लेड से महिलाओं के क्लिटोरिस का कुछ हिस्सा काट दिया जाता है। परम्परावादी मुसलमानों का मानना है कि इससे औरतों में यौन इच्छा कम हो जाती है। वही इससे रक्तस्राव, इंफेक्शन और बांझपन की समस्या उतपन्न होती है।

मुस्लिम कौम पूर्ण रूप से पितृसत्तात्मक है औरत का कोई हक नहीं है। सबसे बड़ी सोचने वाली बात है कि अन्य महिला एक्टविस्ट विंग किंचित मुस्लिम महिला को महिला नहीं मानती है उनके हुक़ूक़ के लिए कोई आवाज नहीं उठती है।

हलाला,मुता,खुला,खतना आदि पर डॉक्युमेंट्री,फ़िल्म या साहित्य भी नहीं है। सोसल एक्टविस्ट महिलाएं डरती है कि यदि मुस्लिम महिलाओं की पैरोकारी करेंगे तो पैगम्बर के कार्टून मामले की तरह गर्दन काट दी जायेगी ।

अफगानिस्तान में कुछ साल पूर्व जब तालिबान के शासन था, वहाँ औरतों के बाजार लगाएं जाते थे। ISIS चरमपंथी संगठन इराक में यजीदी औरतोंके बाजार लगाएं जिसमें औरतों की खरीद फरोख्त की जाती थी। अफगानिस्तान में तालिबान से अमेरिका ने समझौता कर लिया है एक बार फिर तालिबानी शासन लौट रहा है।

भारत में सुधारवादी,वामपंथी,मुस्लिम,
फिल्मकार,साहित्यकार और आलोचक सब का ध्यान हिन्दू बुराई पर जाता है….. आधुनिक समय में बुर्के का क्या औचित्य है क्यों खातून कपड़े की खिड़की से झांकती है। सब मौन है… आमिर खान और सैफ अली खान जिन्हें युवा आईकन मानता है वह भी लवजिहाद और बहुविवाह को बढ़ा रहा है। युवाओं को समझना चाहिए नचनियां सिर्फ नचनियां होता है आईकन नहीं।

शबाना आजमी से लेकर आमिर खान तक हिन्दू कुरूतियों पर फ़िल्म बनाते है बहुविवाह,हलाला
,मुता,मिस्यार,खुला,खतना पर कोई फ़िल्म क्यों नहीं बताते? ये मुस्लिम भी अपनी कौम से खौफजदा है कि चू… चा करने पर उसका मर्डर हो जायेगा।

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