अफगानिस्तान प्राचीन भारत का हिस्सा🚩


अफगानिस्तान भारत की भूमि है रामायण काल में महाराज दशरथ का शासन था यह कैकेय राज्य के अंतर्गत आता था। भरत जी की माता कैकेई यही की थी।

महाभारत काल में भीष्म ने गांधार को हस्तिनापुर राज्य में मिला लिया था गांधार नरेश सुबाला के पुत्र राजा शकुनि और बहन गांधारी इसी राज्य से है। तक्षशिला विश्वविद्यालय इसी की सीमा पर था।

महाराज चन्द्रगुप्त ने पूरा अफगानिस्तान मौर्य साम्राज्य में मिलाया जो अशोक और गुप्त साम्राज्य में शामिल था।

सिकंदर के समय मालव जनजाति यही की थी जिसने हमला करके सिकन्दर को घायल कर दिया तत्पश्चात उसकी मृत्यु हो गयी। यह महाराज पुरु के साम्राज्य का हिस्सा था।

राजा दाहिर के वंश का शासन में अफगानिस्तान के कुछ भाग उनके साम्राज्य में था महाराज रणजीत सिंह का भी अफगानिस्तान के कुछ हिस्से पर अधिकार था। अंततः यह अंग्रेजों के समय 1893 में अंग्रेजों की डूरंड रेखा से भारत से अलग हुआ। तब से अराजकता फैली हुई है।
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अफगानिस्तान के लोगों ने पूजा पद्धति बदली है किंतु संस्कृति भारतीय ही है। किसी कोने में ही सही भारत की ज्योत प्रज्ज्वलित है। महमूद गजनवी और अहमदाबाद शाह अब्दाली के आदर्शों का पालन तालिबान कर रहा है लेकिन उसके मन्शुबे कभी पूरे नहीं होंगे।

आतंक के शासन की अवधि लम्बी नहीं होती है। रूस के प्रभाव को खत्म करने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद से तालिबान को खड़ा किया। 9/12 की घटना के बाद तालिबान अमेरिका के गले की हड्डी बन गया अमेरिका ने तालिबान को 2003 में खदेड़ दिया।

इस समय तालिबान से मोर्चा लेने के लिए खड़े है अफगानिस्तान के कार्यकारी राष्ट्रपति रमुल्लाह सालेह और पंजशीर का शेर कहे जाने वाले अहमद मसूद और उनका संगठन नार्दन आलाइन्स । उनका कहना है कि यदि विश्व समुदाय उनकी हथियारों की मदद करे तो वह तालिबान को खदेड़ कर पाकिस्तान पहुँचा दे।

भारत गुप्त तरीके से मदद करता रहा है किंतु आज आवश्यकता है खुले तौर पर नार्दन आलाइन्स की मदद करने की। यदि भारत नहीं चाहता है कि उसकी सीमा पर आतंक की फैक्टी हो ,हमें नार्दन आलाइन्स की हथियारों और पैसे से सहायत करनी पड़ेगी।

तालिबान सरकार में आते ही भारत से सभी तरह के व्यापार बन्द कर दिया और कश्मीर पर बोलना शुरू किया। हिजबुल मुजाहिदीन का अजहर मसूद कह रहा है कि तालिबान कश्मीर में हमारी मदद करे।

अजहर मसूद आज जीवित होने का कारण यही तालिबान है इसी के समय भारतीय विमान का अपहरण करके कंधार ले जाया गया था जिसमें तालिबान ने मध्यस्थता करके अजहर मसूद को छुड़ाया था। यही मसूद कश्मीर और POK में दहशतगर्दी का दूसरा नाम है।

भारत अपनी नीतियों को खुल के अंजाम दे । Pok वापस लेने के साथ बलूच लोगों की मदद से बलूचिस्तान को आजाद करवाएं। पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता दिला सकता है तो भारत बलूचियों को क्यों नहीं ? नार्दन आलाइन्स को अफगान की सत्ता में लाने के लिए उद्यम करने ही होने।

हम अपनी सुरक्षा को अमेरिका से पूछ कर नहीं चला सकते है स्वतंत्र निर्णय लेना होगा। इंदिरा जी ने बांग्लादेश मामले में ऐसा करके दिखा चुकी है।

साहस और कूटनीति दोनों की जरूरत है कि पाकिस्तानी कोढ़ को सदा के लिए खत्म करें। इजरायल की तरह आक्रामक नीति ही एक विकल्प है। युद्ध सदा विनाश नहीं लाते है पुराने का पतन सृजन का द्वार खोलते है।

अफगानिस्तान के 34 प्रान्तों में तालिबान ने 33 पर कब्जा जमाया है लेकिन स्थिति बदलती नजर आ रही है नार्दन आलाइन्स ने पंजशीर के अलावा अहमद मसूद जिनके पिता पंजशीर के शेर अहमद शाह मसूद है जिन्होंने तालिबान को कभी पंजशीर में घुसने नहीं दिया उन्हें 2001 में तालिबान और अलकायदा ने मिल कर मारा था। वही सालेह की बहन का 1996 में तालिबान ने अपहरण कर ,यातना देकर मार डाला।

सालेह अहमद शाह मसूद के साथ 2001 से ही जुड़ गये थे अब उनके बेटे अहमद मसूद के साथ मिल कर नार्दन आलाइन्स ने बगलान प्रान्त का बानू, पोल ए हिसार ,देह ए सलाह प्रान्त में लोगों के साथ मिलकर अफगानी झंडा फहरा दिया। नार्दन आलाइन्स अफगानिस्तान में लोकतंत्र समर्थक है। भारत को कठोर कदम उठाने होंगे क्योंकि घरेलू नीति आरक्षण और चावल बाटने से सीमाएं सुरक्षित नहीं हो जायेगी।

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