भारत की कमजोरी 🎯

आखिरकार अफगानियों का आखिरी किला पंजशीर भी ढह गया। कार्यकारी राष्ट्रपति सालेह देश छोड़कर ताजिकिस्तान में पनाह ली है। अब बस नार्दन आलाइन्स के अशद का छिटपुट प्रतिरोध बचा है उन्होंने कहा है कि वह आखिर सांस तक लड़ेंगें। पाकिस्तान ने जब देखा पंजशीर में तालिबान असफल हो रहे है उन्हें भारी क्षति पहुँची है उन्होंने पंजशीर के साथ ही हक्कानी नेटवर्क का दबदबा तालिबान पर बना दिया है।

पिछले दिनों की गोलाबारी में तालिबान प्रमुख बरादर गोली लगने से घायल है जिसका इलाज अनजानी जगह चल रहा है। अफगानिस्तान पर विदेशी समुदाय खासकर अमेरिका का रुख बौद्धिक लोगों की समझ से बाहर रहा है। बाइडेन को तालिबान और हक्कानी में क्या गुड दिखा है। अलकायदा और ISIS में बैड इस लिए दिखा क्योंकि इनके द्वारा अमेरिका को चुनौती दी जा चुकी है।

अफगानिस्तान में विश्व की आतंकवाद की सबसे बड़ी फैक्ट्री बन रही है पाकिस्तान और चीन का सहयोग तालिबान को इस लिए प्राप्त है क्योंकि उन्हें भारत को अस्थिर करना है।

भारत की स्वयं की नीतियां उसके लिए आत्मघाती है। अफगानिस्तान मामले में मोदी ने जो रुख अपनाया है वह विल्कुल नेहरू से मिलता जुलता है गुट निरपेक्षता, भारत की अभी जारी है।

नार्दन आलाइन्स को विश्व समुदाय खासकर भारत से बड़ी उम्मीद थी लेकिन भारत का लोकतांत्रिक इतिहास कहता है कि भारत ने अपने मित्रों का साथ कभी नहीं दिया। एक इंदिरा गांधी का बंगलादेश की मुक्तिवाहिनी को छोड़कर।

तालिबान,पाकिस्तान और चीन से मिलकर नार्दन आलाइन्स अकेले कब तक प्रतिरोध करता है। नार्दन आलाइन्स की बार बार अपील विश्व सनुदाय और भारत से करता रहा। अमेरिका का हित भारत के लिए सर्वोपरि दिखा।

भारत अपनी आंतरिक राजनीति में उलझा रहा है। जैसे पड़ोस में कुछ हो न रहा हो। मुफ्त के अनाज की बंदरबाट ,ओबीसी आरक्षण विधेयक और हिंदु मुस्लिम के पागल प्रेम प्रलाप में अभियान जारी है। भारत की कुटिनीति बिल्कुल भारत के पति-पत्नियों जैसी है दिनभर गहमा-गहमी रात में मान मनौव्वल ।।

विदेश नीति में ज्यादा दूरदृष्टि नहीं है उसका कारण है भारतीय लोकतंत्र का रोज कही न कही चुनाव।।

स्वस्थ्य नीति और मजबूत नेतृत्व के अभाव में भारत जैसा सम्पन्न देश कायर बना हुआ है। सेना का मतलब बहुत ज्यादा नहीं है वीर योद्धाओं को कायर नेता द्वारा सीमित कर दिया गया है। यह विश्व गुरु बनने का ढोंग रचता है उसके पीछे कोई रचनात्मकता नहीं है।

अफगानिस्तान को बर्बरों ने जिस तरह हथियाया है कभी मध्य काल में इसी तरह भारत के क्षेत्र पर अवैध अधिकार होता गया यहाँ के कुछ राजाओं ने मोर्चा संभाला बाकी आज की दिल्ली की तरह गुटनिरपेक्ष और पंचशील के पालन में लगे थे उन्हें ज्यादा मतलब आंतरिक राजनीति से था। फिर कोई अरबी,गुलाम,अफगान,मुगल और अंग्रेज शासक बन गये।

हम नुक्ता चीनी में लगे रहे वह उच्च है वह नीच उसकी पत्नी ऐसी है उसका पति ऐसा है। विदेशी शासकों ने खैरात बाटी यह बात भारतीयों को जच गयी वह भूल गये कि गुलाम है। जैसे मुफ्त खाया उसकी बची खुची बुद्धि चली गयी। वह उन विदेशियों की प्रशस्ति गायन करने लगा,कुछ पुरस्कार पाने की फिराक में।

भरतीयों की स्थिति में बहुत आमूल चूल परिवर्तन नहीं आया है वह आज भी मुफ्त पाने के लिए कतार में खड़ा है उसे देश से ज्यादा फिक्र, अधिक पाने की है।

यह वही दिल्ली है जहाँ से कभी भीष्म ने कंधार को हस्तिनापुर में शामिल किया था। आज यहाँ की जनता मुस्लिम है फिर भी इसने तालिबान और पाकिस्तान का विरोध किया गोली के दम से उनकी आवाज को रौंद दिया गया। यहाँ की जनता के पास ज्यादा कुछ नहीं आसन्न गरीबी ऊपर से मौलवियों का तालिबान को समर्थन ,विरोध पर सीधे गोली शरीर पर लेना।

भारत का नकारापन है कि भारत की भूमि पर आतंकी शरिया लागू कर रहे है हमें चिंता अमेरिका,रूस,चीन की है कही वह नाराज न हो जाये। पाकिस्तान ने सीख दी है भारत को मित्रता कैसे निभाई जाती है। यह अफगान भूमि हमारी है हम मौन है। कुर्सी का मोह से अधिक कुछ नहीं है। हमारी चिंता जातीय जनगणना और अपनी अपनी मूर्तियां लगाने की कही अधिक है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s