भारत की कमजोरी 🎯

आखिरकार अफगानियों का आखिरी किला पंजशीर भी ढह गया। कार्यकारी राष्ट्रपति सालेह देश छोड़कर ताजिकिस्तान में पनाह ली है। अब बस नार्दन आलाइन्स के अशद का छिटपुट प्रतिरोध बचा है उन्होंने कहा है कि वह आखिर सांस तक लड़ेंगें। पाकिस्तान ने जब देखा पंजशीर में तालिबान असफल हो रहे है उन्हें भारी क्षति पहुँची है उन्होंने पंजशीर के साथ ही हक्कानी नेटवर्क का दबदबा तालिबान पर बना दिया है।

पिछले दिनों की गोलाबारी में तालिबान प्रमुख बरादर गोली लगने से घायल है जिसका इलाज अनजानी जगह चल रहा है। अफगानिस्तान पर विदेशी समुदाय खासकर अमेरिका का रुख बौद्धिक लोगों की समझ से बाहर रहा है। बाइडेन को तालिबान और हक्कानी में क्या गुड दिखा है। अलकायदा और ISIS में बैड इस लिए दिखा क्योंकि इनके द्वारा अमेरिका को चुनौती दी जा चुकी है।

अफगानिस्तान में विश्व की आतंकवाद की सबसे बड़ी फैक्ट्री बन रही है पाकिस्तान और चीन का सहयोग तालिबान को इस लिए प्राप्त है क्योंकि उन्हें भारत को अस्थिर करना है।

भारत की स्वयं की नीतियां उसके लिए आत्मघाती है। अफगानिस्तान मामले में मोदी ने जो रुख अपनाया है वह विल्कुल नेहरू से मिलता जुलता है गुट निरपेक्षता, भारत की अभी जारी है।

नार्दन आलाइन्स को विश्व समुदाय खासकर भारत से बड़ी उम्मीद थी लेकिन भारत का लोकतांत्रिक इतिहास कहता है कि भारत ने अपने मित्रों का साथ कभी नहीं दिया। एक इंदिरा गांधी का बंगलादेश की मुक्तिवाहिनी को छोड़कर।

तालिबान,पाकिस्तान और चीन से मिलकर नार्दन आलाइन्स अकेले कब तक प्रतिरोध करता है। नार्दन आलाइन्स की बार बार अपील विश्व सनुदाय और भारत से करता रहा। अमेरिका का हित भारत के लिए सर्वोपरि दिखा।

भारत अपनी आंतरिक राजनीति में उलझा रहा है। जैसे पड़ोस में कुछ हो न रहा हो। मुफ्त के अनाज की बंदरबाट ,ओबीसी आरक्षण विधेयक और हिंदु मुस्लिम के पागल प्रेम प्रलाप में अभियान जारी है। भारत की कुटिनीति बिल्कुल भारत के पति-पत्नियों जैसी है दिनभर गहमा-गहमी रात में मान मनौव्वल ।।

विदेश नीति में ज्यादा दूरदृष्टि नहीं है उसका कारण है भारतीय लोकतंत्र का रोज कही न कही चुनाव।।

स्वस्थ्य नीति और मजबूत नेतृत्व के अभाव में भारत जैसा सम्पन्न देश कायर बना हुआ है। सेना का मतलब बहुत ज्यादा नहीं है वीर योद्धाओं को कायर नेता द्वारा सीमित कर दिया गया है। यह विश्व गुरु बनने का ढोंग रचता है उसके पीछे कोई रचनात्मकता नहीं है।

अफगानिस्तान को बर्बरों ने जिस तरह हथियाया है कभी मध्य काल में इसी तरह भारत के क्षेत्र पर अवैध अधिकार होता गया यहाँ के कुछ राजाओं ने मोर्चा संभाला बाकी आज की दिल्ली की तरह गुटनिरपेक्ष और पंचशील के पालन में लगे थे उन्हें ज्यादा मतलब आंतरिक राजनीति से था। फिर कोई अरबी,गुलाम,अफगान,मुगल और अंग्रेज शासक बन गये।

हम नुक्ता चीनी में लगे रहे वह उच्च है वह नीच उसकी पत्नी ऐसी है उसका पति ऐसा है। विदेशी शासकों ने खैरात बाटी यह बात भारतीयों को जच गयी वह भूल गये कि गुलाम है। जैसे मुफ्त खाया उसकी बची खुची बुद्धि चली गयी। वह उन विदेशियों की प्रशस्ति गायन करने लगा,कुछ पुरस्कार पाने की फिराक में।

भरतीयों की स्थिति में बहुत आमूल चूल परिवर्तन नहीं आया है वह आज भी मुफ्त पाने के लिए कतार में खड़ा है उसे देश से ज्यादा फिक्र, अधिक पाने की है।

यह वही दिल्ली है जहाँ से कभी भीष्म ने कंधार को हस्तिनापुर में शामिल किया था। आज यहाँ की जनता मुस्लिम है फिर भी इसने तालिबान और पाकिस्तान का विरोध किया गोली के दम से उनकी आवाज को रौंद दिया गया। यहाँ की जनता के पास ज्यादा कुछ नहीं आसन्न गरीबी ऊपर से मौलवियों का तालिबान को समर्थन ,विरोध पर सीधे गोली शरीर पर लेना।

भारत का नकारापन है कि भारत की भूमि पर आतंकी शरिया लागू कर रहे है हमें चिंता अमेरिका,रूस,चीन की है कही वह नाराज न हो जाये। पाकिस्तान ने सीख दी है भारत को मित्रता कैसे निभाई जाती है। यह अफगान भूमि हमारी है हम मौन है। कुर्सी का मोह से अधिक कुछ नहीं है। हमारी चिंता जातीय जनगणना और अपनी अपनी मूर्तियां लगाने की कही अधिक है।

अफगानिस्तान प्राचीन भारत का हिस्सा🚩


अफगानिस्तान भारत की भूमि है रामायण काल में महाराज दशरथ का शासन था यह कैकेय राज्य के अंतर्गत आता था। भरत जी की माता कैकेई यही की थी।

महाभारत काल में भीष्म ने गांधार को हस्तिनापुर राज्य में मिला लिया था गांधार नरेश सुबाला के पुत्र राजा शकुनि और बहन गांधारी इसी राज्य से है। तक्षशिला विश्वविद्यालय इसी की सीमा पर था।

महाराज चन्द्रगुप्त ने पूरा अफगानिस्तान मौर्य साम्राज्य में मिलाया जो अशोक और गुप्त साम्राज्य में शामिल था।

सिकंदर के समय मालव जनजाति यही की थी जिसने हमला करके सिकन्दर को घायल कर दिया तत्पश्चात उसकी मृत्यु हो गयी। यह महाराज पुरु के साम्राज्य का हिस्सा था।

राजा दाहिर के वंश का शासन में अफगानिस्तान के कुछ भाग उनके साम्राज्य में था महाराज रणजीत सिंह का भी अफगानिस्तान के कुछ हिस्से पर अधिकार था। अंततः यह अंग्रेजों के समय 1893 में अंग्रेजों की डूरंड रेखा से भारत से अलग हुआ। तब से अराजकता फैली हुई है।
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अफगानिस्तान के लोगों ने पूजा पद्धति बदली है किंतु संस्कृति भारतीय ही है। किसी कोने में ही सही भारत की ज्योत प्रज्ज्वलित है। महमूद गजनवी और अहमदाबाद शाह अब्दाली के आदर्शों का पालन तालिबान कर रहा है लेकिन उसके मन्शुबे कभी पूरे नहीं होंगे।

आतंक के शासन की अवधि लम्बी नहीं होती है। रूस के प्रभाव को खत्म करने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद से तालिबान को खड़ा किया। 9/12 की घटना के बाद तालिबान अमेरिका के गले की हड्डी बन गया अमेरिका ने तालिबान को 2003 में खदेड़ दिया।

इस समय तालिबान से मोर्चा लेने के लिए खड़े है अफगानिस्तान के कार्यकारी राष्ट्रपति रमुल्लाह सालेह और पंजशीर का शेर कहे जाने वाले अहमद मसूद और उनका संगठन नार्दन आलाइन्स । उनका कहना है कि यदि विश्व समुदाय उनकी हथियारों की मदद करे तो वह तालिबान को खदेड़ कर पाकिस्तान पहुँचा दे।

भारत गुप्त तरीके से मदद करता रहा है किंतु आज आवश्यकता है खुले तौर पर नार्दन आलाइन्स की मदद करने की। यदि भारत नहीं चाहता है कि उसकी सीमा पर आतंक की फैक्टी हो ,हमें नार्दन आलाइन्स की हथियारों और पैसे से सहायत करनी पड़ेगी।

तालिबान सरकार में आते ही भारत से सभी तरह के व्यापार बन्द कर दिया और कश्मीर पर बोलना शुरू किया। हिजबुल मुजाहिदीन का अजहर मसूद कह रहा है कि तालिबान कश्मीर में हमारी मदद करे।

अजहर मसूद आज जीवित होने का कारण यही तालिबान है इसी के समय भारतीय विमान का अपहरण करके कंधार ले जाया गया था जिसमें तालिबान ने मध्यस्थता करके अजहर मसूद को छुड़ाया था। यही मसूद कश्मीर और POK में दहशतगर्दी का दूसरा नाम है।

भारत अपनी नीतियों को खुल के अंजाम दे । Pok वापस लेने के साथ बलूच लोगों की मदद से बलूचिस्तान को आजाद करवाएं। पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता दिला सकता है तो भारत बलूचियों को क्यों नहीं ? नार्दन आलाइन्स को अफगान की सत्ता में लाने के लिए उद्यम करने ही होने।

हम अपनी सुरक्षा को अमेरिका से पूछ कर नहीं चला सकते है स्वतंत्र निर्णय लेना होगा। इंदिरा जी ने बांग्लादेश मामले में ऐसा करके दिखा चुकी है।

साहस और कूटनीति दोनों की जरूरत है कि पाकिस्तानी कोढ़ को सदा के लिए खत्म करें। इजरायल की तरह आक्रामक नीति ही एक विकल्प है। युद्ध सदा विनाश नहीं लाते है पुराने का पतन सृजन का द्वार खोलते है।

अफगानिस्तान के 34 प्रान्तों में तालिबान ने 33 पर कब्जा जमाया है लेकिन स्थिति बदलती नजर आ रही है नार्दन आलाइन्स ने पंजशीर के अलावा अहमद मसूद जिनके पिता पंजशीर के शेर अहमद शाह मसूद है जिन्होंने तालिबान को कभी पंजशीर में घुसने नहीं दिया उन्हें 2001 में तालिबान और अलकायदा ने मिल कर मारा था। वही सालेह की बहन का 1996 में तालिबान ने अपहरण कर ,यातना देकर मार डाला।

सालेह अहमद शाह मसूद के साथ 2001 से ही जुड़ गये थे अब उनके बेटे अहमद मसूद के साथ मिल कर नार्दन आलाइन्स ने बगलान प्रान्त का बानू, पोल ए हिसार ,देह ए सलाह प्रान्त में लोगों के साथ मिलकर अफगानी झंडा फहरा दिया। नार्दन आलाइन्स अफगानिस्तान में लोकतंत्र समर्थक है। भारत को कठोर कदम उठाने होंगे क्योंकि घरेलू नीति आरक्षण और चावल बाटने से सीमाएं सुरक्षित नहीं हो जायेगी।

सेकुलर और अफगान जलेबी…


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नसीरुद्दीन शाह हो या जावेद अख़्तर इन्हें तालिबान से गुरेज नहीं है वो तो इनके दीन के कुरानी है इन्हें दिक्कत RSS ,विश्व हिन्दू परिषद है क्यों कि इनके नाचने वाले कार्यक्रम अर्थात पेट पर लात पड़ रही है।

जहाँ तक लाल्लुक तालिबान का है वह मनोरंजक का पेशा करने वाले को पहले लातों से पीटता, फिर पत्थर मरता है अंत में गर्दन काट देता है। जैसा कि पिछले दिनों मशहूर अफगानी कमेडियन के साथ किया गया।

भारत का सेकुलर जब मुसलमान का मामला आता है या तो वह मौन हो जाता है या ऊलजलूल की दलील देने लगता है। अफगानिस्तान के हालात से इन्हें सबक नहीं मिल रही है तालिबान,अलकायदा,हक्कानी नेटवर्क, isis कौन सही दाबेदार है और कुरान तथा अल्लाह का रहगुजर है।

पाकिस्तान चाहता है कि तालिबान गुट अब्दुल गनी बरादर अफगानिस्तान की सरकार का नेतृत्व न कर हक्कानी नेटवर्क करें। हक्कनी नेटवर्क पर पाकिस्तान का पूरा नियंत्रण है।उसके लिए बाकायदा ISI चीफ अफगानिस्तान पहुँचे है, जिससे दो बार विफल हुए सरकार गठन का काम पूरा किया जा सके। मीडिया चैनल पंजशीर लाइव ने दावा किया है कि हक्कनी नेटवर्क और तालिबान में नेता को लेकर हुए विवाद में गोली चलने से बरादर घायल हो गया है।

हिन्द के मुस्लिममीन की तरफ से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तालिबान का इस्तकबाल किया है उन्हें स्वतंत्रता की लड़ाई जीतने की बधाई दी है। भारत का मुस्लिम मजबूरी में भारत में रुका है क्योंकि 99% से ज्यादा मुस्लिम वोटिंग में अपना मत जिन्ना की लीग को दिया था। हिन्दू कितना मुस्लिम को सम्मान दे ले, लेकिन वह हिन्द की भूमि को मादरे वतन नहीं मानता। भारत को कुफ्र कहता है। भारत के मुसलमान के नाम,पहनावे,खान- पान में अरबी और मध्य एशिया की नकल है।

भारत के मौलवियों को चीन द्वारा उईगुर मुसलमानों का शोषण नहीं दिखाई पड़ता है उसे गुजरात दंगा , 370 और NRC की बहुत पीड़ा है। भारत के पड़ोसी मुस्लिम देश पाकिस्तान,बंगलादेश, अफगानिस्तान, मालदीव का मुसलमान भारत में शरण चाहता है जबकि भारत मे रहने वाला मुसलमान डरा हुआ है। ऐसा क्यों है? न सेकुलर न मौलवी इसका उत्तर दे पाता है।

भारत में एक नया चलन चला है कल तक सेकुलर हिंदु आज सेकुलर सनातनी बन गया है वह श्री राममन्दिर के निर्माण का श्रेय कोर्ट को देता है। पूर्व सरकारों में यही कोर्ट थी तब निर्णय को नहीं ले लिया। सेकुलर सनातनी के तरह तरह के प्रश्न है यह शुद्ध नहीं या सही नहीं है। RSS मुस्लिमों को बढ़ा रही है वही भारत से लेकर पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिम अपने धर्म में RSS जैसा संगठन और मोदी जैसा नेता चाहता है।

भारत का मुस्लिम अभी 1000 वर्ष बाद भी भारत के विरोध में रहेगा जबतक भारत दारुल हर्ब से दारुल इस्लाम न हो जाये। कुछ अपने को प्रगतिशील कहते है सिर्फ हिन्दू धर्म को गाली देने और मखौल उड़ाने के लिए।

भारत में मुस्लिम न शांत रहा है न शांत रहेगा। बल्कि देश हिंदुओं का है कदम तुम्हें उठाने होंगे ,सोचिये कल अफगानिस्तान और पाकिस्तान की स्थिति भारत में हो जाये तब हिंदुओं को कौन देश शरण देगा नेपाल?

राष्ट्र की सुरक्षा के लिए गद्दारों को चिन्हित करके उन्हें देश से बाहर निकलना और उन्हें मृत्युदंड देना ही होगा। ज्यादा उदारता का परिणाम है अब्दुल और हसन के 13-13 बच्चें होकर सभी छोटे आर्थिक उपक्रम पर कब्जा जमाये है। भारत के संसाधनों को चट कर जा रहे है। ट्रेन से लेकर बस में मारामारी बनी है।

नाम अब्दुल मेरा मैं बूट पालिश करता हूं… आंख खोलिए सेकुलर के चक्कर में , उस विदेशी औरत की पार्टी के लिए यह देश छोड़ कर भागना न पड़ जाएं। शरण के लिए तुम्हारें पास यह हिन्द महासागर होगा,जिसमें डूब मरना पड़ेगा।

धर्म के मर्म को न समझने वाले हिंदुओं पूरे विश्व में आज तक के युद्ध के पीछे धर्म रहा है सिर्फ सनातन धर्म अन्य लोगों सताने को पाप कहता है मुस्लिम और ईसाई मजहबियों की संख्या बढ़ाने से जन्नत में सीट रिजर्व कर लेता है उसके लिए चाहे वह तलवार का प्रयोग करें, धन का करे या बम का, सब जायज है।

सन्त और कुँवारी मां♀


एक बार एक गांव में एक सन्त आये झोपड़ी बना कर रहने लगे। सन्त को प्रपंच से क्या मतलब वह अपनी साधना में रमे रहते थे।

गांव वालों ने जब सन्त को देखा ,पूरे गांव में कौतूहल का विषय सन्त बन गये। लोग कहने लगे बहुत पहुँचे हुए महात्मा है किसी से कोई मतलब नहीं रखते वह अपनी धुन में मस्त है। गांवों वालों ने सन्त का खूब आदर सत्कार किया। सन्त बिल्कुल शांत थे गांव वालों के आदर सत्कार का उनके ऊपर कोई प्रभाव न हुआ।

सन्त की झोपड़ी पर भीड़ रहती आरती करने वालो की संख्या बहुत बढ़ गयी संत की खूब वाहवाही होती ।
सन्त उस गांव में लगभग छ: माह तक रहे फिर अन्यत्र यात्रा पर चले गये। उनकी झोपड़ी वही रह गयी।

गांव में इसी बीच एक कुँवारी कन्या को बच्चा हो गया। जब लोगों ने पूछा बच्चा किसका है लड़की ने उसी सन्त का बता दिया। गांव वाले संत के ऊपर बहुत क्रोधित हुये, उनके झोपड़े को जला दिया।

कुछ दिन बाद सन्त आकर फिर झोपड़े को ठीक कर अपनी साधना करने लगे। जब गांव वालों की इसकी जानकारी हुई सब उन्हें मारने के लिए लाठी ठंडे लेकर उनकी कुटी पर पहुँचे। सब कहने लगे इस पाखंडी को मारों। इतने में गांव के एक वृद्ध व्यक्ति ने कहा मारने से समस्या का हल नहीं होगा।

समस्या यह छोटा बच्चा है बच्चे को इस पापी,पाखंडी को बच्चा सौंप दो इसका यह पालन पोषण करें तब इसे अपने किये पाप का एहसास होगा।

सन्त अभी भी मौन थे गांव वाले बच्चें को कुटी पर छोड़कर चले गये। सन्त बच्चें की रोने की आवाज सुनकर उठे और बच्चें को लेकर गांव की तरफ चल दिये। वह घर -घर बच्चें के लिए दूध मांग रहे थे कोई उन्हें दूध नहीं देता, अलबत्ता गाली देता राम राम पापी पाप लेकर द्वार पर आ गया है उन्हें देखते ही किवाड़ बन्द कर ले रहे थे।

ऐसे में सन्त उस बच्चें को लेकर उस घर पहुँचे जिस घर का बच्चा था सन्त ने कहा माँ मेरे बच्चें को थोड़ा दूध दे दीजिये भूखा है रो रहा है। जिस कन्या का बच्चा था बच्चें का रुदन सुन कर उसका मातृत्व जागृत हो उठा। उसने बच्चें को गोदी में उठा लिया सन्त के पैरों में गिर कर क्षमा मांगी । बाबा मुझे अपने प्रेमी की जान बचाने के लिए आप का नाम ले लिया मुझे क्या पता था आप आ जाएंगे।

गांव वाले जब बच्चें की असलित जाने फिर क्या सब लोग मिल कर गाजे बाजे के साथ बाबा की झोपड़ी पर क्षमा मांगने, उनका आदर करने पहुँचे। सन्त अब भी मौन थे। पूजन कीर्तन गांव वालों का फिर शुरू हो गया।

गांव के एक वृद्ध ने सन्त से कहा बाबा आप अब भी मौन है कुछ कहिये। बाबा बच्चा यह लोग भाव में है इनका भाव किया सम्मान कर लिया भाव बदला अपमान। इन पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। मेरा ध्येय अलग है यदि प्रपंच,मान, अपमान,सम्मान की इच्छा ही होती तो सन्त क्यों बनते।

लोग अपनी तरह के है उनका कुछ हित दिखा जयकारा लगाने लगते है थोड़ा नुकसान हुआ कि गाली, मारपीट पर उतारू हो जाते है। क्योंकि भावना में है इस लिए समझ नहीं रहे है आखिर वह क्या कर रहे है उनका आचरण किस प्रकार का है।

हे मनुष्य ईश्वर ने आप को विवेक दिया उसका प्रयोग करिये। भावना में किसी को अच्छा या बुरा न बनाइये। गुरु सदा जानकर ही बनाएं। स्वार्थ की पतंग न उड़ाये।

मोबाइल ने क्या छीना..


उदारीकरण के बाद मोबाइल का प्रचलन एक चमत्कार से कम न था एक समय था मोबाइल भीड़ में बज जाये लोग देखने लगते थे। मोबाइल अच्छी स्टेटस का प्रतीक था। वैसे देखा जाय तो पहले से फोन था किंतु सबसे बड़ा परिवर्तन मोबाइल लेकर आया।

मोबाइल के प्रचलन से अन्तर्देशी,चिट्ठी (पत्र या पाती),टार्च,घड़ी,रेडियों, कैल्कुलेटर,कैंपस के साथ दो लोगों के बीच के इंतजार को खत्म कर दिया । किसी को कुछ सामान किसी माध्यम से पहुँचाना होता तो लोग बता देते फला ट्रेन से इस नाम के व्यक्ति जा रहे है इस कलर का कपड़ा पहने है आप उनसे स्टेशन पर इस जगह मिल लेना।

मोबाइल ने सम्बन्धों में खलल डाल दिया है। आप को लगेगा कि कैसे देखिये मनुष्य में क्रोध और राग दोनों है । मान लीजिए दो लोगों किसी बात पर अनबन हो गयी या किसी बात से नाराज है एक काल करके गुस्सा करने से सम्बन्ध खत्म।

कितने शराबी है पीने के बाद काल किये फिर क्या रिश्ता टूट गया क्योंकि शराबी है तो बहक जाता है। पहले जब मोबाइल नहीं था पति के परिवार के रिश्ते आज की तरह बिखरे नहीं थे क्योंकि माता अपनी पुत्री को ससुराल में, घर से कोचिंग नहीं दे पाती थी।

दो लोग क्रोध में आमने सामने होते तभी रिश्ता टूटता लेकिन मोबाइल ने दूरी कम कर दी है। रिश्ते से मिठास वैसे भी कम होती जा रही थी मोबाईल उसे और सहयोग दे रहा है।

मोबाइल ने TV को युवा वर्ग में लगभग खत्म कर दिया है। मोबाइल के साथ इंटरनेट की दुनिया के कारण पास बैठे सहयात्री से पहले गपशप होती थी वह अब मोबाइल पर मुस्करा रहा।

एक और चीज मोबाइल ने खूब बढ़ाया प्यार का खेल अरे वही GF/BF वाला। मोबाइल पूरी वर्चुअल दुनिया बना ली है। अधिकांश लोगों का अधिकांश समय यही खा जा रहा है।

तरह तरह के मोबाइल गेम बच्चों को लोगों की तरफ़ इनट्रैक्ट नहीं करने दे रहा है आउटडोर गेम में उसकी दिलचस्पी नहीं रह गयी है।

मोबाइल ज्यादा देर रोज चलाने में कंधे में दर्द,आंख में दर्द,चिड़चिड़ापन, देर से सोकर उठाना और डिप्रेशन आम बात हो चुकी है। कुछ भी चीज वायरल कर लोगों की निजता भंग की जा रही है। पोर्न मूवी किंचित कोई मोबाइल यूजर हो जिसने न देखा हो।

छोटे मोटे प्रोग्राम में लोग इतना मोबाइल से फोटो खींचने लगते है कि सही वाला फोटोग्राफर को भी फोटो लेने में दिक्कत होती है। मोबाइल यूजर से पूछिए क्यों बे तुमको क्या जरूरत है किसी के प्रोग्राम में मोबाइल चमकाने की।

मोबाइल का लाभ निश्चित रूप से है लेकिन इसका सही प्रयोग न होने से प्रयोगकर्मी को नुकसान हो रहा है। लोग एक दूसरे से बहुत बात करते थे वह मोबाइल के दौर में थम गया है।

भारत के पड़ोसी देश…. 🍁

अमेरिका अफगानिस्तान से तालिबान से समझौता करने वापस जा रहा है तालिबान बहुत तेजी से शहरों पर नियंत्रण स्थापित करते जा रहा है। एक बार पुनः अफगानिस्तान को आतंक वादियों के सौंपा जा रहा है। सवाल यह है कि अमेरिका इतना लंबा अभियान, जिसे 2001 में शुरू किया गया था वह अचानक कैसे खत्म हो गया।

2008 में बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनते उन पर भी अमेरिका सैनिकों को अफगानिस्तान से हटाने का दबाव के बावजूद उन्होंने अभियान जारी रखा। डोनाल्ड ट्रंप अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिक बनाएं रखने के पक्षधर थे। राष्ट्रपति वाइडेन घरेलू दबाव में आकर अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी का कदम बहुत बड़ी गलती साबित होगा।

भारत में अफगानी राजदूत फरीद मंमुडगे ने बड़े विश्वास के साथ कहा है कि भविष्य में भारत को अफगानिस्तान की तालिबान के खिलाफ सैनिक मदद करनी होगी।

अमेरिका को जब अफगानिस्तान नीति में फायदा कम नुकसान ज्यादा नजर आया तो गुड टेरिरिज्म और बैड टेरिरिज्म की बात करने लगे। आखिरकार तालिबानियों से समझौता करके सैनिक वापसी तक पहुँच गये। जबकि पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्लू बुश कह रहे है कि अमेरिका का खतरनाक कदम है जोकि अफगानिस्तानियों को क्रूर तालिबानियों के चंगुल में छोड़ना ।

सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति भारत के लिए है अभी तक कि अफगान सरकार भारत की मित्र रही है वही तालिबान का नाम कंधार विमान अपहरण में जुड़ा हुआ है विमान को हाईजैक करके कंधार ले जाया गया था।

भारत की सीमा पर पुनः आतंकवाद की खेती शुरू होगी। पाकिस्तान की ISI और तालिबान के रिश्ता बहुत पुराना है। अफगानिस्तान में चुनी सरकार और आम नागरिक के लिए बहुत कठिन समय है पुनः शरिया शासन का दौर चलेगा। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत के विदेशमंत्री यस जयशंकर से अपनी चिंता व्यक्त की है। आतंकवाद का एक ट्रायंगल बनता नजर आ रहा है ISI ,तालिबान और ISIS का। अमेरिका और भारत की अपेक्षा यहाँ चीन जरूर लाभ की स्थिति में रहेगा।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अफगानिस्तान में तालिबान के शासन की वकालत कर रहे है। खैबर पख्तून के सांसद का कहना है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान पूरा इंट्रेस्ट है क्योंकि इमरान खान चाहते है चुनी सरकार न रहे है आतंक और शरिया लौटे यह अल्लाह की मर्जी है।

विश्व राजनीति में कब परिवर्तन हो जाये यह महाशक्तियों के स्वार्थ तय करते है। भारत की स्थिति यह है कि वह चाह कर भी अफगानिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार की मदद नहीं कर सकते है जिस तरह से वह म्यामांर में आन शान सूकी की चुनी सरकार को नहीं कर पाएं ।

भारत को अपनी विदेश नीति में परिवर्तन लाना होगा यदि वह महाशक्ति बनना चाहते है। पड़ोसी देश की अस्थिरता से भारत पर प्रभाव पड़ता है जिसका उदाहरण बंगलादेश,नेपाल,अफगानिस्तान और म्यामांर है वहाँ से शरणार्थी अच्छी तादाद में भारत का रुख करते है। भारत अपने हितों के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। अपने मित्रों को पड़ोसी देश में हर तरह की मदद मुहैया करें।

भारत की स्थिति विश्व अखाड़े में उस पहलवान की तरह है जो लगोंट बार-बार टाइट करता है किंतु अखाड़े में नहीं उतरता। चीन जीते या अमेरिका इससे भारत की स्थिति कोई परिवर्तन नहीं होगा। क्योंकि वह आखड़े में उतारा ही नहीं। भारत ने गुट निरपेक्ष की नीति का कब का त्याग कर दिया है।

भारत को अमेरिका के दबाव में तालिबानी पीस डेलिगेशन से नहीं मिलना था। 2001 में अमेरिका ने भारत से पूछकर अफगानिस्तान नहीं आया था यह स्मरण रहना चाहिए। अफगानिस्तान में भारत द्वारा किया गया इन्वेस्टमेंट बेकार हो जायेगा। वैसे भी भारत ने अपने प्रतिनिधियों को वापस बुला रहा है। भारत किंचित भूल गया है कि युद्ध से वीरों के भाग्य बदलते है।

कुटिनीति, विदेशनीति अपने देश को लाभ पहुँचाने की होनी चाहिए। कृष्ण और चाणक्य के देश शांति और युद्ध का विकल्प सदा रहना चाहिए।

भारत का जोर सक्रिय विरोध का होना चाहिए ,जरूरत पड़ने पर सेना का प्रयोग हो। नहीं तो भारत के समुद्री क्षेत्र में चीन जैसे देश मल तो अमेरिका जैसे देश युद्धाभ्यास करके चले जायेगें। हम दर्शक बने रहोगें। सिर्फ लंगोटा बांधने से पहलवान नहीं बन जाओगे उसके लिए आखड़े में उतरना होता है।

हिंदुत्व कैसे आये…. गांगेय

हमारी गर्लफ्रैंड हो वह भी मॉडर्न वाली। मेरी बहन का चक्कर किसी से न हो। मेरी पत्नी वर्जिन और सावित्री टाइप हो। बच्चें हम अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाएंगे,खुद भी अल्ट्रा आधुनिक बनेंगे। जबकि कोई भी शिक्षा अपना संस्कार छोड़ती है। हुआ भी वही हम किस संस्कृति के है हम भी कन्फ्यूज है।आज हम GF/BF की तकनीक में पिले है। सभी तरह के “डे” सेलिब्रेट कर रहे है। इसके बावजूद हिंदुत्व की स्थापना करना चाहते है।

न शिक्षा हमारी,न वस्त्र हमारा,न ही शास्त्र न ही आचार-विचार हमारे। संस्कृति सेकुलर हो गयी है। हम वह बन्दर बन गये है जिसने अन्य जानवरों का स्वांग रह गया है बस स्वयं का खो गया है। एक बात स्मरण रहे बिना हमारी मां के कोई हिंदुत्व आने वाला नहीं है। क्योंकि वही हमारी प्रथम गुरु है।

वेद कौन- कौन है उपनिषद क्या होता है महाभारत कैसा होता है हमें पता नहीं है लेकिन हम हिंदुत्व की रक्षा करेंगे…. लेकिन कैसे! चतुर मानव।

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एक उदाहरण लीजिये कैसे रक्षक है हिंदुत्व के… एक यादवों का गांव था उनके गांव में एक कुआं खोदा गया लेकिन पानी नहीं निकला। उधर से एक संत जा रहे थे गांव वाले संत से इसका कारण जानना चाहा। संत ने कहा कि सब लोग रात्रि में एक-एक लोटा दूध कुँए में छोड़ देना,सुबह तक पानी आ जायेगा।

सुबह देखा गया कुआँ सूखा हुआ है उसमें दूध के एक बूंद का निशान नहीं है। सन्त ने कहा कि जिस गांव में ऐसी सामुदायिक भावना है वहाँ जल कैसे निकलेगा।

हालत आज की हिदुत्व की कुछ ऐसी है। एक समय था जब लोगों ने कहा गांधी महाराज की जय हो अभी जयकारा पूरा नहीं हुआ था कि, कहा पंडित नेहरू की जय हो। शास्त्री जी के आने पर जय जवान,जय किसान के नारे में सुर मिलाये। किन्तु भारत की राजनीतिक महत्वाकांक्षा ने शास्त्री जी को ताशकंद से ताबूत में बन्द करके लाया। तुम तब भी मौन थे।

अब पदार्पण किया गया गूंगी गुड़िया का ,बाद में यही गुड़िया ऐसी पुड़िया बन गयी कि अच्छे-अच्छे की राजनीतिक दुकान पर ताले लग गये।

मेरा आशय यहाँ राजनीति बताना नहीं है लेकिन हिंदुत्व को बताना है इंदिरा ने पारसी और मुस्लिम की संतान फिरोज से निकाह कर लिया और अल्पसंख्यक आयोग बनाया गया। ये हिदुत्व की बात करने वाले तब धर्म के नाम पर धरना क्यों नहीं दिया ,जब एक विधर्मी महिला को प्रधानमंत्री बनाया गया, खुलेआम मुस्लिम तुष्टीकरण किया गया। समाजवाद और सेकुलरिज्म को संविधान में घुसाया गया। तुम मौन थे ..अब हिंदुत्व की बात कैसे कर सकते हो।

नेहरू परिवार की लम्पटता ऐसी बढ़ी की राजीव ने ईसाई महिला सोनिया से विवाह किया अब हिन्दू,मुस्लिम,पारसी और ईसाई का कम्बो हो गया। तुम्हारा हिंदुत्व फिर भी नहीं जागा। हिंदुओं का धर्मांतरण होता रहा,धर्मांतरण कराने के लिए टेरेसा को भारत रत्न दिया गया। भिंडरावाले और प्रभाकर को यही नेहरू परिवार खड़ा किया ,फिर मारे और मारे भी गये।

तुम्हारी गुलामी पर ईसाई महिला की अंतरात्मा की आवाज भारी पड़ गयी। तुम सेकुलर पगडंडी पकड़े जाली टोप लगाये इफ्तार छकते रहे। तुम हिन्दू नहीं ,पाखंडी जरूर बने रहे।

रामायण सीरियल ने तुम्हारें खोये हिंदुत्व पर चोट करी। कुछ हिंदुत्व के पागल पुजारी बाबरी विध्वंस कर दिए। किंचित हिंदुत्व जन्म लेने लगा।

अटल जी कहा मुझे पूर्ण बहुत दो मन्दिर और 370 दोनों का गोविन्दाय नमो नमः कर देंगे। जिसे मोदी ने पूरा भी कर दिया।

अब देखें पुराने सेकुलर कांग्रेसी जो बड़ा वाला हिंदूवादी टोप खिसिआहाट में पहन कर आ गया है वह हिंदुत्व कैसा हो, ज्ञान भी देने लगा है। इसे इंदिरा, राजीव, सोनिया,राहुल और प्रिंयका पर दिक्कत नहीं है लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से है। मोदी से भी है हो भी क्यों न आस्था के केंद्र नेहरू परिवार की जो दुर्गति बन गयी है वह उसके अहम को अहमद कर रहा है।

तो फिर बोलिये नये वाले हिंदुत्व की जय हो। प्रश्न पर प्रश्न पूछने वाले हिंदुत्व की जय हो।

सबसे विचारणीय यह है कि हम एक पार्टी के लिए हिंदुत्व को छोड़ दिये। हमारी संस्कृति खिचड़ी बन गयी। एक विदेशी ईसाई महिला 10 साल शासन कर जाती है। कई तिलक धारी उसकी चरण रज लेने के लिए व्याकुल रहते है। एंटोनियो माई की जय!क्या खाक तुम हिंदुत्व की लौ जलाओगे । जब विदेशी आक्रांता एक छोटी सी सेना लेकर भारत जीत लेता है तुम हिंदुपादशाही में कमियां खोजते रहे है तुम्हें बेहतर मुसलमान लगा, कभी ईसाई।

सच बताओं क्या तुम हिन्दू हो, क्या तुम उसके संस्कारों का पालन करते हो? तब तुम्हें वर्णसंकरता और कर्मसंकरता भी पता होगी।

यदि नहीं पता तो तुमसे नय होगा तुम पेटीकोट शासन में रहे हो, तुम्हें विदेशी शासक और उसकी संताने अच्छी लगती है । तुम आज भी कहते हो जो काम अंग्रेज करके चले गये उसे कोई न कर पायेगा।

जैसे तुम आज सवाल पूछ रहे हो यही नेहरू और इंदिरा के समय पूछते ? सेकुलरिज्म का भूत न चढ़ पाता हम चीनी और जापानी की तरह अपनी भाषा में विकास क्या नहीं कर सकते थे । क्यों गुलामी की प्रतीक अंग्रेजी थोपी गयी। तुम समय रहते नहीं जगते ,सत्ता से वजीफा चाहते हो। समय पर जग जाते तो आज मोदी से सवाल न पूछने पड़ते है। एक प्रश्न अपने से भी पूछ लो तुम कितने हिन्दू हो।।।

हमारे घरों में अंग्रेजी कल्चर घुस चुका है कभी आप ने ध्यान दिया है अंग्रेज और अमेरिकन द्वारा हमारे संस्कृति से क्या स्वीकार किया गया है?

हिंदुत्व की रक्षा लोकतंत्र के रहते कैसे हो सकती है राष्ट्रपति भवन से लेकर सरकारी ऑफिस,मन्दिर का प्रांगण और बगल में या सड़कों पर मस्जिद बनी है रेल मार्ग को इस लिए मोड़ दिया गया है कि शौच के लिए गये अब्दुल ट्रेन की जद में आ गये, अब वही मजार है।

खैर हमारा लब्बोलुआब है हिंदुत्व,सनातन हिन्दू धर्म ,उसका संस्कार और संस्कृति की स्थापना । यह संभव तभी है जब तुममें शुद्ध हिंदूवादी भावना हो, राजनीति नहीं।

भारत क्या पाकिस्तान,बंग्लादेश अफगानिस्तान, ईरान, म्यामार का DNA राम वाला नहीं है यह लोग मार्ग से भटक गए है इन्हें पुनः मार्ग पर लाना है। उसके लिए हिंदुओं को संगठित होना पड़ेगा।

निकाह और अय्याशी 👫

मुता निकाह, मिस्यार निकाह,हुल्ला,खुला…..
मुता निकाह यह शिया मुस्लिम में प्रचलित है,एक समय अवधि के लिए होता है जिसमें अवधि पूरी होने पर निकाह स्वयं खत्म हो जाता है।

मिस्यार निकाह यह शियाओं को सुन्नियों का जबाब है इसे प्रवासी निकाह कहते है ,इसके कारण वैश्यावृत्ति पर रोक लगने का हवाला दिया जाता है। यह दोनों निकाह अय्यासी को पूरा करते है।

अरबी शेख भारत में आने पर कम उम्र की लड़कियों से उनके बाप को पैसा देकर मिस्यार निकाह कर लेते है।

खुला वह कुप्रथा है जिसमें हलाला निकाह करने पर यदि शौहर तलाक नहीं देता है ऐसे में ख्वातून शहर काजी से निहाल खत्म करने की अपील करती है इस्लामी प्रथा के कारण काजी को निकाह खत्म करने का अधिकार है।

सोचने वाली बात है कि कुरान जैसे ग्रंथ वहुविवाह का समर्थन करते है? क्या लगता है अल्लाह इतना जालिम है कि औरतों को बहुविवाह के जहन्नुम में डालेगा। यह कपोल कल्पित और मर्दानी ख्वाहिश है जिसे मजहबी आधार दिया गया है। क्योंकि चरित्र के मामले में मुहम्मद खुद बदनाम थे।

हलाला के कई मामले देखने में आये है जब शौहर अपनी तलाक शुदा बीबी का हलाला निकाह अपने अब्बू से कर देता है। मुरादाबाद,बरेली,बदायूं में ऐसे कई मामले संज्ञान में आये है । कुछ साल पूर्व प्रयागराज की लड़की का निकाह बदायूं में हुआ। शौहर मुम्बई में काम करता है। घर में ससुर ने बलात्कार किया। मुस्लिम पंचायत ने फैसला दिया कि अब बाप ने सम्बन्ध बना लिया है तो वह बेटे की बीबी नहीं रह सकती है इस लिए वह अपने ससुर के साथ रहे।

मुस्लिम समाज की दिक्कत यह है कि उसकी कुप्रथा पर कोई सुधार की बात नहीं होती है। शाहबानो प्रकरण में जब कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलट दिया। मॉडरेट मुसलमान इससे खफा थे क्या जरूरत थी कांग्रेस को ऐसा करने की।

राजीव गांधी के करीबी अरुण नेहरू से पूछा गया कि मुस्लिम में सुधार से कांग्रेस को क्या दिक्कत है। अरुण नेहरू ने कहा कि जो कौम गन्दी नाली में रहना चाहती है उसे ऊपर उठाने की क्या जरूरत है। हमें वोट चाहिए और वह मिल रहा है।

खतना कुप्रथा पुरुषों के साथ ही महिलाओं की भी कुछ देशों में किया जाता है भारत में सुन्नी कहता है कि यह शिया औरतों का होता है शिया कहता है कि सुन्नी औरतों का होता है। भारत में ज्यादा प्रचलन दाऊदी बोहरा शिया समुदाय में है।

यूनीसेफ के अनुसार हर साल 20 करोड़ महिलाओं का खतना किया जाता है। खतना में ब्लेड से महिलाओं के क्लिटोरिस का कुछ हिस्सा काट दिया जाता है। परम्परावादी मुसलमानों का मानना है कि इससे औरतों में यौन इच्छा कम हो जाती है। वही इससे रक्तस्राव, इंफेक्शन और बांझपन की समस्या उतपन्न होती है।

मुस्लिम कौम पूर्ण रूप से पितृसत्तात्मक है औरत का कोई हक नहीं है। सबसे बड़ी सोचने वाली बात है कि अन्य महिला एक्टविस्ट विंग किंचित मुस्लिम महिला को महिला नहीं मानती है उनके हुक़ूक़ के लिए कोई आवाज नहीं उठती है।

हलाला,मुता,खुला,खतना आदि पर डॉक्युमेंट्री,फ़िल्म या साहित्य भी नहीं है। सोसल एक्टविस्ट महिलाएं डरती है कि यदि मुस्लिम महिलाओं की पैरोकारी करेंगे तो पैगम्बर के कार्टून मामले की तरह गर्दन काट दी जायेगी ।

अफगानिस्तान में कुछ साल पूर्व जब तालिबान के शासन था, वहाँ औरतों के बाजार लगाएं जाते थे। ISIS चरमपंथी संगठन इराक में यजीदी औरतोंके बाजार लगाएं जिसमें औरतों की खरीद फरोख्त की जाती थी। अफगानिस्तान में तालिबान से अमेरिका ने समझौता कर लिया है एक बार फिर तालिबानी शासन लौट रहा है।

भारत में सुधारवादी,वामपंथी,मुस्लिम,
फिल्मकार,साहित्यकार और आलोचक सब का ध्यान हिन्दू बुराई पर जाता है….. आधुनिक समय में बुर्के का क्या औचित्य है क्यों खातून कपड़े की खिड़की से झांकती है। सब मौन है… आमिर खान और सैफ अली खान जिन्हें युवा आईकन मानता है वह भी लवजिहाद और बहुविवाह को बढ़ा रहा है। युवाओं को समझना चाहिए नचनियां सिर्फ नचनियां होता है आईकन नहीं।

शबाना आजमी से लेकर आमिर खान तक हिन्दू कुरूतियों पर फ़िल्म बनाते है बहुविवाह,हलाला
,मुता,मिस्यार,खुला,खतना पर कोई फ़िल्म क्यों नहीं बताते? ये मुस्लिम भी अपनी कौम से खौफजदा है कि चू… चा करने पर उसका मर्डर हो जायेगा।

भारत की लूट🔯

भारत में 45 (3,19,29,75,00,00,00,000.50 ₹)ट्रिलियन डॉलर की लूट अंग्रेजों द्वारा अंग्रेजी शासन में की गई है। भारत के दलित चिंतक ज्योतिबा फुले, पेरियार,भीमराव अंबेडकर के लिए विषय दलित था अर्थव्यवस्था क्यों नहीं? षड्यंत्र बू नहीं आती आपको!

शुद्र को दलित किसने बनाया? दलित शब्द (डिप्रेस क्लास) 1902 में अंग्रेजों ने दिया जिसे उनके एजेंट द्वारा खूब उछाला गया। अंबेडर और पेरियार का विचार था कि दलित को हिन्दू जाति से अलग किया जाय ,जिसमें वह सफल रहे। हीन भावना से ग्रसित अंबेडर शुद्र होकर उच्चशिक्षा प्राप्त की । शुद्र के कारण उन्हें ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया।

संविधान बनाने में योग्यता की बात करेगें तो सच्चाई यह है कि भारत के संविधान के 395 अनुच्छेद में से 235 भारतीय संविधान अधिनियम 1935 से है बाकी सब अंग्रेजों के गुलाम रह चुके देशों से लिया गया। अंग्रेजी कानून को क्यों स्वीकार किया जबकि उसी देश आज भी संवैधानिक राजतंत्र लागू है फिर भी उसे लागू नहीं किया गया।

शुद्र जिनका भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान था वह इंजीनियरिंग से लेकर , चित्रकार,चर्मकार,स्थापत्यकार शिल्पकार आदि थे अंग्रेज का समय आते आते वह शुद्र से दलित होगा। भारत निर्यातक अर्थव्यवस्था से आयातक में परिवर्तित कर दिया गया।

विश्व प्रसिद्ध भारत के कपड़े और हस्तनिर्मित वस्त्रों की जगह भारत को रा मेटेरियल का देश बनाया गया। अंग्रेजों ने ताक़वी दे कर, बुनकरों के हाथ काट लिए। मार्क्स ने कहा अंग्रेजों ने भारत खड्डी और चरखे को तोड़ डाला।

बंगाल के लिए विलियम वेटिंग ने कहा कलकत्ता के मैदान लोगों की हड्डियों से अटे पड़े है। इस पर अम्बेडकर, फुले और पेरियार क्यों मौन थे? क्या उन्हें अर्थव्यवस्था की समझ नहीं थी? उनसे पूर्व दादाभाई नैरोजी ने इस पर विस्तार से लिखा था।

बुनकर को मजदूर बनाया गया कृषि पर अतिरिक्त भार पड़ा । कृषि जीविकोपार्जन का धंधा बन कर रह गयी। अंग्रेजों की कर व्यवस्था ने उन्हें गरीबी की दुष्चक्र में फंसा लिया। बंगाल और बिहार की निलहे की दशा का वर्णन एक अंग्रेज करता है कि वह खा न सके इस लिए नील की खेती कराई जा रही है।

किसी देश की सम्पन्नता उसकी अर्थव्यवस्था में निहित होती है। यदि जनसंख्या के बराबर अर्थात 17% जनसंख्या और विश्व व्यापार में 17% भागीदारी होने पर वह सम्पन्न देश होगा। भारत की हिस्सेदारी बमुश्किल अब भी 2 फीसदी है।

अम्बेडकर और पेरियार का एजेंडा वही था जो अंग्रेजों का था भारत जब गुलाम था उस समय यह जातिवादी राजनीति में लगे थे। अम्बेडकर ने अंग्रेजों से कहा था आप हमें ब्राह्मणों के भरोसे छोड़ कर नहीं जा सकते है। पहले हमें स्वतंत्रता दीजिये फिर भारत को स्वतंत्र करियेगा।

जात-पात की खाई को समाज से कही ज्यादा राजनीति ने गहरा कर दिया। भारत में नेता बनने की योग्यता है कि आप बड़ी जाति के नेता हो।

संविधान सबकी की सुरक्षा की गारंटी देता है तब दलित,आदिवासी,महिला और अल्पसंख्यक के लिए अलग कानून की जरूरत क्या थी।

अलग अलग कानून देश को जाति और वर्ग के खांचे में ढलने दिया गया, समाज तोड़ने के वृक्ष रोपे गये।समाजवादी नेता लोहिया ने इसी लिए कहा है कि राजनीति में जातियां बीमा है।

फुले,पेरियार और अम्बेडकर जैसे नेताओं ने मिलकर समाज को बांटने का कार्य किया है न कि स्तर उठाने का अंग्रेजों द्वारा पैदा की गई समस्या को ब्राह्मण के माथे मढ़ कर अंग्रेजों को साफ साफ बचाने की साजिश हुई । शोर,शराबा, आंदोलन,चुनावी आरक्षण आदि ने मिलकर भारतीय समाज व्यवस्था को छिन्न भिन्न करके, अंग्रेजों की उद्धारक की छवि बनाई। अंग्रेजों द्वारा लूट के बावजूद हमारे लिए सम्मानित और आदर्श बना रहा है।

राजनीतिक नफे-नुकसान के बीच जातिवादी राजनीति पर मोहर लगा दी गयी। फर्जी SC/ST कितने निरापराध सलाखों के पीछे दिन गिन रहे है । अंग्रेजों वाली लूट को काले अंग्रेज (नेता-अधिकारी आदि) जारी रखे है।

आरक्षण का खेल जिसे अंग्रेजों से सत्ता मजबूत करने के लिए शुरू किया था वह प्रयोग नेता कुर्सी के लिए करने लगा।

कलयुग की प्रेमगाथा ❤️❤️

यह समय अंग्रेजी वाले लवर का चल रहा है GF, BF के बाद प्रचलन में X भी आ गया। मेरी X तेरा X,लवर का प्रचलन फैलता जा रहा है एक वायरस की तरह। चरित्र क्या होता है न BF को पता न GF को। इनका मानना है जितना दिन मन कर रहा हो रहो उसके बाद आगे का रास्ता नापो यहाँ मेरे पास तुम्हारी कहानी के लिए टाइम नहीं है।

लड़की कहती है लौंडा पांच दिन बाद दूसरी ढूढ़ने लगता है हम क्यों एक में फंसे रहे । रात-रात भर बाते,चैटिंग,Msg, vedio cal ऐसा लगेगा यही धरती का परफेक्ट जोड़ा है । कुछ दिन बीते सेटिंग चेंज ,फिर दोनों अलग टेस्ट के लिए दूसरी/ दूसरा,तीसरी/ तीसरा आगे श्रृंखला कितनी दूर जाये पता नहीं।

टूटते रिश्ते,कमजोर होता व्यतित्व ,एक दूसरे को धोखे में रखते लोग आखिर यह सीख उन्हें अंग्रेजी शिक्षा ने ही दी है। आज इतने ज्यादा स्वार्थ में अंधे हुये लोग है कि उन्हें अपने ऊपर चिंतन के लिए तनिक समय नहीं है। स्त्री की गरिमा और पुरुष की महिमा को देहसुख के लिए मलीन कर रहे है।

मेरे इस विषय पर लिखने का मकसद यह है कि लवर का बार-बार बदलाव किस लिए है? आखिर ये क्यों चल रहा है । कुछ लड़कियां घर से भाग कर अंतर्जातीय शादी कर रही है। उन्हें लगता है कि उसके बगैर मर जायेगी। इस शादी का भविष्य बहुत छोटा होता है (अपवाद छोड़ के)।

आज यह चारित्रिक पतन क्यों है! हमारा युवा मन TV और सिनेमा से प्रभावित हो गया। वह कॉकटेल बना रहा है।

सम्बन्ध प्रगाढ़ ,स्थायी और प्रेममय होता है। यह गर्मी दूर करने और वेडियों बनाने वाले, टाइम पास करने वाले नायक-नायिका भविष्य देख कर बाइंडिंग नहीं किये है बल्कि स्वार्थ देख कर । आज वाले लव में नायिका अपने नायक से तरह-तरह का उपहार चाहती है विश्वास और प्रेम से उसका कोई सर्वकार नहीं है।

वह कहती है जब तक मन हुआ हम-तुम मजे लिए अब मेरा मन तुम पर नहीं लगता। अब मैं पप्पू से प्यार करती हूँ । लड़का मुझे क्यों छोड़ा ? मैं तुम्हें वाइफ बनना चाहता था, मैं तुम पर कितना पैसा और समय बर्बाद किया । तुम ऐसा मेरे साथ कैसे कर सकती हो ? लड़की-मैं कोई तुम्हारी पहली नहीं थी मुझसे पहले और बाद रहेगी ,आजकल के लौंडो को मैं अच्छे से जानती हूं। मैं नहीं तो कोई और सही।

अब रिश्ते लिव इन रिलेशनशिप वाले हो गये। जब तक अच्छा लगे बिना विवाह किए एक घर में पति-पत्नी की तरह रहे। किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं। फिर तुम अपने रास्ते हम अपने।

प्रेमी-प्रेमिका और पति-पत्नियों की अदला-बदली अमेरिकी-यूरो संस्कृति के प्रभाव में रिश्तों में पशुता आ जा रही है। माया नगरी के सिनेकलाकार की तरह मेरी बीबी सिर्फ मेरी नहीं है वह तब तक है जब तक वह चाहे।

भारतीय संस्कृति में प्रेम में ,रिश्तों में पशुता और नीचता नहीं रही है रिश्ता मतलब विश्वास, रिश्ता मतलब प्रेम,रिश्ता मतलब आदर्श, रिश्ता मतलब एकत्व की भावना, रिश्ता मतलब संस्कार है। आज रिश्ता मजाक बन गया।

अंग्रेजी शिक्षा अंग्रेजी संस्कार को हमारे समाज में रोप रही है। पति-पत्नी का रिश्ता अभिन्न था। प्रेमी-प्रेयसी की कितनी कहानियां रही है जिसका मन से वरण कर लिया वही तन से वर हो जाता है। नल दमयन्ति की प्रेम गाथा, दुष्यन्त-शकुंतला की प्रेम गाथा अजर-अमर है।

महाभारत में वर्णन है जब जुएं में अपना सब कुछ हार कर नल रात्रि में सराय में दमयंती को छोड़ कर चले जाते है । दमयंती नदी से,पहाड़ से,पेड़ से, जंगली पशुओं से,चिड़िया आदि से कहती है तुम मेरे नल को देखें हो, मैं उनके बिना जीवित न रहूंगी।

जब माता सीता का हरण हो जाता है श्रीराम उन्हें खोजने के लिए जाते है तो कहते है कि

हे खग मृग हे मधुकर श्रेणी ।
तुमने देखी मेरी सीता मृग नैनी।।

श्रीराम अपनी “श्री” के लिए व्याकुल दिखे। क्या यह प्रेम तुम्हें नहीं दिखा जो वैलेंटाइन में तुम प्रेम की तलाश करने लगे।

प्रेम का भारतीय ग्रंथों अद्भुत वर्णन है आज के युवाओं को पढ़ना चाहिए जिन्होनें प्रेम को बदनाम कर दिया है। प्यार पूरे जीवन एक से होता है लगाव कई लोगों से होता है।

“प्रेम गली अति साकरी जामे दो न समाय”

चरित्र के लिए हिटलर कहता है कि चरित्रहीन व्यक्ति समाज में वायरस की तरह है समाज में उसे फैलता जाता है इस लिए चरित्रहीन को गोली मार देनी चाहिये।

चरित्र से आप पता नहीं कहा तक सहमत है! स्त्री पुरुष में रिश्ता मित्र का हो ही नहीं सकता है बारूद और माचिस में मित्रता कैसी? रिश्तों को घुमाया न जाय बल्कि वास्तविकता में जिन्होंने ने अनुभव लिया उनसे पूछ कर देखिये। स्त्री-पुरुष सम्बन्ध पिछले 5000 वर्षों सबसे निम्न स्तर के दौर से गुजर रहा है।

भारत की भूमि चरित्र को बहुत महत्व देती रही है जिसको मन,वचन से पति/पत्नी मान लिया वही कर्म से भी होता है।

कौशिक और कौशिकी की कथा में जब कौशिकी के पिता कौशिक के साथ कौशिकी का विवाह निश्चित कर देते है। कुछ दिन बाद कौशिक को कुष्ठ रोग हो जाता है वह विवाह के लिए मना कर देते है। कौशिकी अपने पिता को लेकर कौशिक के पिता गाधि के आश्रम जाती है उनसे कहती है यह बीमारी विवाह के पश्चात होती तो क्या मैं इनका परित्याग कर देती ? नहीं ! मैंने मन वचन से इन्हें पति मान लिया है यह बंधन सात जन्मों का है जो मेरे भाग्य में है वही होगा। आगे कहती है कि-

पति पत्नी वह रथ के पहिये है जिसपर सृष्टि घूमती है। मैं आप को मन से ,वचन से पति मान लिया मैं दूसरे का वरण नहीं कर सकती।

कौशिक-कौशिकी,नल- दमयंती,दुष्यंत-शकुंतला
,राम-सीता की भूमि पर प्रेम,विश्वास और रिश्तों का अभाव है। रिश्तों की उखड़ती डोर। चिंता है हमें भारतीय संस्कृति की है जिसका आचरण युवा पीढ़ी में नहीं दिखता है। यह दशक 2020- 2030 बहुत कठिन है इसमें जिस तरह से समाज में आदर्श रोपेंगे वह 2090 तक चलने वाला है। इस बहुत सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है।

चरित्र,संस्कार,मर्यादा और अनुशासन बीते युग की बाते होनी लगी है। हमारे घर में ,हमारी सोच में अपसंस्कृति का प्रवेश जिससें हमारा मन विशृंखलित हो गया है। दूसरे के प्रभाव में कुछ दूसरा कर रहे। एको ही नारी सुंदरी या दरीवा कही गयी है पति को देव तुल्य माना गया है। विवाह के समय पत्नी अपने पति से सात वचन लेती है और एक वचन देती है।

एको नारी व्रत: । एको पति व्रत: कहा गया है।

यह डोर प्रेम भरे विश्वास की है अभिन्नता,एकात्म के अनुभति की है।

अपने सतीत्व की शक्ति से माता अनुसूइया ने ब्रह्म,विष्णु और महेश को बालक बना दिया।

भगवान परशुराम ने अपने पिता जमदग्नि के कहने पर अपनी माता रेणुका वध का उनकी अशक्ति(चरित्र) डिग जाने की वजह से कर दिया। चरित्र का बल सबसे बड़ा बल। उच्चश्रृंखल होकर देयभोग की वासना सुख नहीं देगी बल्कि अहंकार और भ्रम पैदा करेगी। जीवन पत्नी और पुत्री के शंका में बीतेगा।

मनुष्य के रूप एक पुरुष को एक स्त्री संग का अधिकार है यही बात नारी पर लागू होती है। भौतिक भोगों से कामनाओं की तृप्ति नहीं होती है। उससे शरीर जर्जर और कामी हो जाते है। हमारे शास्त्रों में कहा जाता धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष ! अर्थ और काम का सेवन धर्मानुसार होना चाहिए। वह धर्म से नियंत्रित रहे तभी वह उत्तम है अन्यथा व्यसन बन जाता है।

प्रेम सह्रदय,कोमलता,एकत्व का बोध करता है स्त्री-पुरुष के भेद को दूर कर देता है। प्रेमी-प्रेयसी एक हो जाते है वह जीवन से लेकर मृत्यु तक अभिन्न रहते है।

रूठे सुजन मनाइये जो रूठे सौ बार।
रहिमन फिरि फिरि पोइए टूटे मुक्ता हार।।